Vote Chor campaign: छत्तीसगढ़ की सियासत में एक बार फिर हलचल तेज़ हो गई है। बिलासपुर ज़िले के तखतपुर में बुधवार को कांग्रेस पार्टी ने “वोट चोर गद्दी छोड़” हस्ताक्षर अभियान की शुरुआत की। इस अभियान के माध्यम से कांग्रेस ने मतदाता सूचियों में गड़बड़ी और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। कार्यक्रम में कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव और छत्तीसगढ़ प्रभारी सचिन पायलट भी शामिल हुए।

राहुल गांधी के आंकड़ों की हो रही जांच
सचिन पायलट ने कार्यक्रम के दौरान कहा कि राहुल गांधी द्वारा प्रस्तुत किए गए आंकड़ों की गहन समीक्षा की जा रही है। उन्होंने कहा “हम किसी पर सीधा आरोप नहीं लगा रहे, लेकिन जो आंकड़े हमारे पास हैं, उन्हें हमने चुनाव आयोग को सौंपा है। अब यह देखना जरूरी है कि उन पर निष्पक्ष जांच होती है या नहीं।” उन्होंने स्पष्ट किया कि मामला पूरी तरह तथ्यों पर आधारित है और जांच की मांग भी उसी के आधार पर की जा रही है।

भूपेश बघेल के बयान को मिला समर्थन
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने हाल ही में आरोप लगाया था कि “वोट चोरी” के जरिए राज्य में कांग्रेस सरकार को गिराया गया। इस बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए सचिन पायलट ने कहा कि “कई जगहों से तथ्य सामने आए हैं। यदि गड़बड़ी अन्य राज्यों में हुई है, तो यह संभव है कि छत्तीसगढ़ भी इससे अछूता न रहा हो।” पायलट ने साफ किया कि पार्टी इस मामले को केवल राजनीतिक मुद्दा नहीं बना रही, बल्कि इसे लोकतंत्र की शुचिता से जोड़कर देख रही है।
जनता से सीधा संवाद
“वोट चोर गद्दी छोड़” अभियान के तहत कांग्रेस जनता से हस्ताक्षर जुटा रही है, ताकि इस मुद्दे को व्यापक जन समर्थन मिल सके। पार्टी नेताओं का कहना है कि मतदाता सूची में गड़बड़ी से लोगों का भरोसा लोकतंत्र से उठ सकता है, जिसे दोबारा स्थापित करना जरूरी है।
चुनाव आयोग की भूमिका पर सवाल
कांग्रेस ने इस अभियान के ज़रिए चुनाव आयोग की भूमिका पर भी सवाल खड़े किए हैं। पार्टी का आरोप है कि आयोग की लापरवाही या पक्षपातपूर्ण रवैये के चलते लोकतांत्रिक प्रक्रिया प्रभावित हुई है। अब कांग्रेस मांग कर रही है कि आयोग स्वतंत्र एजेंसी से इन आरोपों की जांच करवाए।
छत्तीसगढ़ की राजनीति में “वोट चोर गद्दी छोड़” अभियान से नया मोड़ आ गया है। एक ओर कांग्रेस इसे लोकतंत्र की रक्षा की लड़ाई बता रही है, वहीं दूसरी ओर सत्तारूढ़ दल अभी इस पर प्रतिक्रिया देने से बच रहा है। आने वाले दिनों में यह देखना रोचक होगा कि चुनाव आयोग इन आरोपों पर क्या रुख अपनाता है और क्या इस पर कोई औपचारिक जांच होती है या नहीं।
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