Afghanistan Earthquake: अफगानिस्तान में 6.3 तीव्रता का भूकंप: 20 की मौत, 115 से ज्यादा घायल

Afghanistan Earthquake:  अफगानिस्तान में रविवार रात एक शक्तिशाली भूकंप ने तबाही मचा दी। नेशनल सेंटर फॉर सिस्मोलॉजी (NCS) के अनुसार, भूकंप की तीव्रता रिक्टर स्केल पर 6.3 मापी गई और इसका केंद्र जमीन से 160 किलोमीटर नीचे था। भूकंप के झटके भारतीय समयानुसार रात 12:47 बजे महसूस किए गए।

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भूकंप का प्रभाव: जानमाल का नुकसान

बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक, इस भूकंप में अब तक करीब 20 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 115 से अधिक लोग घायल हुए हैं। घायलों को नांगरहार और कुनार प्रांतों के अस्पतालों में भर्ती कराया गया है।

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इस शक्तिशाली झटके के बाद लगातार आफ्टरशॉक्स महसूस किए गए, जिनकी तीव्रता 4.3, 4.7 और 5.0 रही। भूकंप के झटके पाकिस्तान के इस्लामाबाद, एबटाबाद और आसपास के इलाकों तक महसूस किए गए, जिससे लोग दहशत में घरों से बाहर निकल आए।

अफगानिस्तान: भूकंपों का केंद्र क्यों?

अफगानिस्तान भूकंप की दृष्टि से एक संवेदनशील क्षेत्र है। यह इलाका हिंदूकुश पर्वतमाला के पास स्थित है, जो एक सक्रिय भूकंपीय क्षेत्र माना जाता है। अफगानिस्तान, भारतीय और यूरेशियन टेक्टोनिक प्लेट्स के संगम पर स्थित है। इन प्लेट्स की आपसी टकराहट और हलचल की वजह से यहां बार-बार भूकंप आते हैं।

यह इलाका एक प्रमुख फॉल्ट लाइन पर स्थित है, जो हेरात से होकर गुजरती है। जब टेक्टोनिक प्लेट्स आपस में टकराती हैं, तो उनके किनारे मुड़ते हैं और अंदर जमा ऊर्जा अचानक बाहर निकलती है, जिससे भूकंप आता है।

2023 में भी बड़ा भूकंप आया था

यह पहली बार नहीं है जब अफगानिस्तान ने इतना विनाशकारी भूकंप झेला है। 7 अक्टूबर 2023 को भी यहां एक भयानक भूकंप आया था, जिसमें तालिबान सरकार के मुताबिक करीब 4,000 लोगों की मौत हुई थी। हालांकि, संयुक्त राष्ट्र ने इस आंकड़े को 1,500 बताया था।

भूकंप क्यों आता है?

धरती की सतह कई टेक्टोनिक प्लेट्स से मिलकर बनी होती है जो लगातार हिलती रहती हैं। जब ये प्लेट्स टकराती हैं या एक-दूसरे के ऊपर-नीचे खिसकती हैं, तो ऊर्जा निकलने लगती है। जब यह ऊर्जा सतह तक पहुंचती है, तो भूकंप महसूस होता है।

अफगानिस्तान एक बार फिर प्राकृतिक आपदा का शिकार हुआ है। लगातार आ रहे भूकंप और आफ्टरशॉक्स से लोगों में डर बना हुआ है। राहत और बचाव कार्य जारी हैं, लेकिन भूकंप के प्रति जागरूकता और मजबूत बुनियादी ढांचे की जरूरत पहले से कहीं ज्यादा महसूस की जा रही है।

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