77th Republic Day
77th Republic Day 2026: भारत आज यानी 26 जनवरी 2026 को अपना 77वां गणतंत्र दिवस पूरे उत्साह और आन-बान-शान के साथ मना रहा है। यह दिन हर भारतीय के लिए गर्व का विषय है, क्योंकि इसी दिन 1950 में हमारे देश का संविधान लागू हुआ था और भारत एक संप्रभु लोकतांत्रिक गणराज्य बना था। 15 अगस्त 1947 को ब्रिटिश हुकूमत की 200 साल की गुलामी से आजाद होने के बाद, भारत को अपने स्वयं के कानूनों और मूल्यों की आवश्यकता थी, जिसे बाबासाहेब डॉ. बी.आर. अंबेडकर के नेतृत्व में निर्मित संविधान ने पूरा किया। आज कर्तव्य पथ (पूर्व में राजपथ) पर होने वाली परेड हमारी सैन्य शक्ति और सांस्कृतिक विविधता की गवाह बन रही है।
इस वर्ष गणतंत्र दिवस की परेड कई मायनों में अनूठी और आधुनिक है। 2026 की परेड की झांकियों में भारत के हालिया साहसिक सैन्य अभियान ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की झलक प्रमुख आकर्षण का केंद्र है। यह झांकी भारतीय सेना की एकजुटता और रणनीतिक विजय का प्रतीक है। इसके साथ ही, पंजाब की झांकी इस बार सिखों के नौवें गुरु, गुरु तेग बहादुर साहिब की महान शहादत और उनके धार्मिक स्वतंत्रता के प्रति अटूट बलिदान को समर्पित है। ये झांकियां न केवल इतिहास का स्मरण कराती हैं, बल्कि नए भारत के आत्मनिर्भर और मजबूत इरादों को भी दुनिया के सामने पेश करती हैं।
राष्ट्रीय पर्व के इस मौके पर लोग एक-दूसरे को शुभकामना संदेश भेजते हैं। अगर आप भी अपने सोशल मीडिया जैसे व्हाट्सएप, फेसबुक या एक्स (ट्विटर) के लिए कुछ प्रभावशाली पंक्तियां ढूंढ रहे हैं, तो महान शायरों की ये रचनाएं आपके स्टेटस की शोभा बढ़ा सकती हैं:
कंवल डिबाइवी के शब्दों में खुशी:
“हिन्दोस्तान खुश है, हर पासबान खुश है, हर नौ-जवान खुश है, सारा जहान खुश है… एक जोश-ए-सरमदी है, छब्बीस जनवरी है।”
अमर बलिदान का आह्वान (बिस्मिल अजीमाबादी):
“सरफरोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है, देखना है जोर कितना बाज़ू-ए-क़ातिल में है।”
आजादी की इस रक्षा के लिए हमारे वीरों ने अपने लहू से इतिहास लिखा है। लाल चन्द फलक की ये पंक्तियां दिल को छू जाती हैं:
“दिल से निकलेगी न मर कर भी वतन की उल्फ़त, मेरी मिट्टी से भी खुशबू-ए-वफ़ा आएगी।”
वहीं फिराक गोरखपुरी ने आजादी के गौरव को कुछ इस तरह बयां किया है:
“लहू वतन के शहीदों का रंग लाया है, उछल रहा है जमाने में नाम-ए-आजादी।”
आदिल जाफरी की रचना इस दिन के महत्व को रेखांकित करती है कि कैसे 26 जनवरी को भारत ने अपनी ‘गुमशुदा दौलत’ यानी स्वशासन को प्राप्त किया था। यह दिन हमारे उद्देश्यों की कामयाबी का दिन है। अंत में, नजीर बनारसी की ये पंक्तियां शांति और अहिंसा के प्रतीक भारत की सुंदरता को दर्शाती हैं:
“ऐ शांति अहिंसा की उड़ती हुई परी, आ तू भी आ कि आ गई छब्बीस जनवरी।”
इन शेरों और शायरी के जरिए हम न केवल अपने पूर्वजों के संघर्ष को याद करते हैं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों में भी राष्ट्रवाद और शांति का जज्बा पैदा करते हैं। आइए, हम सब मिलकर इस 77वें गणतंत्र दिवस पर संकल्प लें कि हम अपने देश के लोकतांत्रिक मूल्यों को हमेशा बनाए रखेंगे।
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