Stock Market Closing Bell : भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार, 22 अक्टूबर को भारी बिकवाली देखने को मिली। कारोबार के दौरान सेंसेक्स और निफ्टी दोनों प्रमुख सूचकांक दबाव में रहे और गिरावट के साथ बंद हुए। हालांकि, दिन के निचले स्तर से बाजार में कुछ रिकवरी जरूर आई, लेकिन इससे नुकसान की भरपाई नहीं हो सकी। आईटी शेयरों में भी बिकवाली लौट आई, जो पिछले करीब 10 कारोबारी सत्रों से मजबूती दिखा रहे थे। बाजार में गिरावट के कारण निवेशकों की संपत्ति में 4 लाख करोड़ रुपये से अधिक की कमी आने की खबर है।
460 अंक गिरकर बंद हुआ सेंसेक्स
गुरुवार के कारोबार में बीएसई सेंसेक्स गिरकर 73,005.11 अंक के निचले स्तर तक पहुंच गया था। वहीं, दिन का उच्चतम स्तर 73,720.83 अंक रहा। कारोबार के अंत में सेंसेक्स 460.30 अंक यानी 0.62 प्रतिशत की गिरावट के साथ 73,249.39 अंक पर बंद हुआ। शुरुआती और मध्य कारोबारी दबाव के बाद निचले स्तरों से हुई रिकवरी के बावजूद बाजार बढ़त हासिल नहीं कर सका।
निफ्टी में भी 123 अंकों से ज्यादा की गिरावट
एनएसई निफ्टी में भी पूरे दिन कमजोरी बनी रही। कारोबार के दौरान यह 22,554.85 अंक तक फिसल गया था। हालांकि, बाद में खरीदारी लौटने से निफ्टी ने 22,785 अंक का दिन का उच्चतम स्तर छुआ। इसके बावजूद सूचकांक 123.70 अंक यानी 0.54 प्रतिशत की गिरावट के साथ 22,687.65 अंक पर बंद हुआ। मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में बड़ी कंपनियों की तुलना में अधिक दबाव देखने को मिला।
कच्चे तेल की तेजी ने बढ़ाई चिंता
बाजार में गिरावट की प्रमुख वजहों में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें शामिल रहीं। उपलब्ध कारोबारी आंकड़ों के मुताबिक, ब्रेंट क्रूड की कीमत कारोबार के दौरान 112.51 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई और बाद के अपडेट में यह करीब 111.82 डॉलर प्रति बैरल पर थी। तेल महंगा होने से भारत के आयात बिल, महंगाई और कंपनियों की लागत पर दबाव बढ़ने की आशंका रहती है। इसी चिंता ने निवेशकों की धारणा प्रभावित की।
RBI के मिनट्स से ब्याज दरों की आशंका
भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति की बैठक के मिनट्स ने भी बाजार की चिंता बढ़ाई। रिपोर्ट के अनुसार, महंगाई पर नियंत्रण के लिए भविष्य में ब्याज दरें बढ़ाने की संभावना को लेकर निवेशक सतर्क रहे। ऊंची ब्याज दरें कंपनियों की उधारी लागत बढ़ा सकती हैं और निवेश तथा खपत पर असर डाल सकती हैं।
कमजोर वैश्विक संकेत और रुपये पर दबाव
एशियाई बाजारों में गिरावट का असर भारतीय बाजार पर भी पड़ा। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, दक्षिण कोरिया का कोस्पी 3.65 प्रतिशत, हांगकांग का हैंग सेंग 3.23 प्रतिशत, जापान का निक्केई 225 2.65 प्रतिशत और चीन का शंघाई कंपोजिट 1.50 प्रतिशत गिरा। दूसरी ओर, डॉलर के मुकाबले रुपये में कमजोरी और इंडिया VIX में बढ़ोतरी ने निवेशकों की सतर्कता बढ़ाई। बाजार में आगे की दिशा अब वैश्विक संकेतों, कच्चे तेल की कीमतों और महंगाई संबंधी घटनाक्रम पर निर्भर करेगी।
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