Ram Mandir Donation Row : अयोध्या स्थित श्रीराम मंदिर के निर्माण के लिए जुटाए गए चंदे और मंदिर में चढ़ाए जाने वाले धन को लेकर राजनीतिक विवाद फिर चर्चा में है। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने आरोप लगाया है कि मंदिर निर्माण के लिए एकत्र किए गए चंदे से जुड़े कथित अनियमितताओं के आरोपों की प्रभावी जांच नहीं हुई। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सवाल किया कि यदि ऐसी गतिविधियां उनकी जानकारी के बावजूद होती रहीं, तो उन्होंने इस मामले पर चुप्पी क्यों साधे रखी। ये आरोप कांग्रेस की ओर से लगाए गए हैं।
भाजपा, आरएसएस और विहिप पर लगाए आरोप
जयराम रमेश ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक पोस्ट के जरिए भाजपा, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) और विश्व हिंदू परिषद (विहिप) को निशाने पर लिया। उन्होंने राम मंदिर ट्रस्ट के बाग बिजैसी जमीन सौदे का उल्लेख करते हुए पारदर्शिता पर सवाल उठाए। रमेश ने आरोप लगाया कि मंदिर निर्माण के लिए देशभर के श्रद्धालुओं से जुटाई गई रकम के इस्तेमाल को लेकर उठे सवालों का संतोषजनक जवाब नहीं मिला है। हालांकि, इन आरोपों को स्वतंत्र रूप से प्रमाणित तथ्य के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
जमीन सौदे की कीमत को लेकर उठाए सवाल
कांग्रेस महासचिव ने अपने बयान में 18 मार्च 2021 को हुए एक जमीन सौदे का जिक्र किया। उनके मुताबिक, शाम 7 बजकर 10 मिनट पर तिवारी-अंसारी ने कुसुम पाठक से जमीन दो करोड़ रुपये में खरीदी थी। इसके पांच मिनट बाद, शाम 7 बजकर 15 मिनट पर, उसी जमीन को राम मंदिर ट्रस्ट द्वारा 18.5 करोड़ रुपये में खरीदे जाने का दावा किया गया। रमेश ने सवाल उठाया कि इतनी कम अवधि में कीमत में इतनी बड़ी बढ़ोतरी कैसे हुई। इस दावे और सौदे के सभी विवरणों की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है।
रजिस्ट्रियों में समान गवाह होने का दावा
जयराम रमेश ने जमीन की दोनों रजिस्ट्रियों में कथित तौर पर समान गवाह होने का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने तत्कालीन भाजपा महापौर ऋषिकेश उपाध्याय और ट्रस्ट से जुड़े अनिल मिश्रा का नाम लेते हुए सवाल किया कि क्या दोनों दस्तावेजों में उनकी गवाही दर्ज थी। कांग्रेस नेता ने इस पहलू को सौदे की पारदर्शिता से जुड़ा महत्वपूर्ण प्रश्न बताया। इन दावों पर संबंधित पक्षों का आधिकारिक पक्ष और दस्तावेजों की पुष्टि महत्वपूर्ण होगी।
जांच रिपोर्ट और एसआईटी के नतीजों पर सवाल
रमेश ने यह भी पूछा कि 2021 में हुई जांच की रिपोर्ट अब तक सार्वजनिक क्यों नहीं की गई। उन्होंने जमीन सौदों से संबंधित विशेष जांच दल (एसआईटी) की जांच के नतीजों को लेकर भी जवाब मांगा। कांग्रेस का कहना है कि मामले में उठाए गए सवालों पर स्पष्ट जानकारी सामने आनी चाहिए, ताकि जनता को वास्तविक स्थिति का पता चल सके।
प्रधानमंत्री से जवाब देने की मांग
अपने बयान के अंत में जयराम रमेश ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सीधे सवाल करते हुए आरोप लगाया कि चंदे और चढ़ावे से संबंधित कथित अनियमितताओं पर पर्याप्त कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने भाजपा और उससे जुड़े संगठनों से स्पष्टीकरण मांगा। फिलहाल, इस राजनीतिक विवाद में लगाए गए आरोपों, संबंधित दस्तावेजों और सभी पक्षों की प्रतिक्रियाओं की स्वतंत्र पुष्टि अहम है।
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