Stock Market Closing Today : भारतीय शेयर बाजार में शुक्रवार को कारोबारी सप्ताह का अंत गिरावट के साथ हुआ। सेंसेक्स और निफ्टी दोनों प्रमुख सूचकांक लाल निशान में बंद हुए। महंगे कच्चे तेल, विदेशी निवेशकों की बिकवाली और तकनीकी स्तरों पर दबाव ने बाजार की धारणा कमजोर कर दी। सबसे ज्यादा नुकसान मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में देखने को मिला, जहां प्रमुख सूचकांकों की तुलना में कहीं अधिक गिरावट दर्ज की गई।
सेंसेक्स और निफ्टी गिरावट के साथ बंद
बीएसई सेंसेक्स 125.56 अंक यानी 0.17 प्रतिशत टूटकर 73,123.83 पर बंद हुआ। वहीं, एनएसई निफ्टी 50 में 87.65 अंक यानी 0.39 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई और यह 22,600 के स्तर पर आ गया। कारोबार के दौरान निफ्टी एक समय फिसलकर 22,372 तक पहुंच गया था। निचले स्तरों से बाजार में कुछ सुधार जरूर हुआ, लेकिन खरीदारी का पर्याप्त समर्थन नहीं मिलने के कारण दोनों प्रमुख इंडेक्स बढ़त हासिल नहीं कर सके।
एक दिन में निवेशकों की संपत्ति में ₹7.36 लाख करोड़ की कमी
शुक्रवार की गिरावट का असर निवेशकों की कुल संपत्ति पर भी पड़ा। बीएसई में सूचीबद्ध कंपनियों का कुल बाजार पूंजीकरण गुरुवार के कारोबार के अंत में लगभग ₹459.26 लाख करोड़ था, जो शुक्रवार को घटकर ₹451.90 लाख करोड़ रह गया। इस तरह एक ही कारोबारी सत्र में बाजार पूंजीकरण करीब ₹7.36 लाख करोड़ कम हो गया। बाजार में लगातार बिकवाली के चलते निवेशकों के बीच सतर्कता बढ़ी और जोखिम वाले शेयरों में दबाव ज्यादा दिखाई दिया।
कच्चे तेल की कीमतों ने बढ़ाई बाजार की चिंता
बाजार में कमजोरी की प्रमुख वजहों में कच्चे तेल की ऊंची कीमतें शामिल रहीं। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, शुक्रवार को ब्रेंट क्रूड करीब 114.19 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार कर रहा था। पश्चिम एशिया में तनाव और ऊर्जा आपूर्ति बाधित होने की आशंकाओं ने तेल बाजार को प्रभावित किया। कच्चा तेल महंगा रहने से भारत जैसे आयात पर निर्भर देश में महंगाई, कंपनियों की लागत और चालू खाते पर दबाव बढ़ने की चिंता रहती है। इससे शेयर बाजार की धारणा भी कमजोर हो सकती है।
अमेरिकी ब्याज दरों और आईटी शेयरों पर नजर
अमेरिकी फेडरल रिजर्व के सख्त मौद्रिक रुख को लेकर भी निवेशक सतर्क रहे। ब्याज दरों में संभावित बढ़ोतरी या लंबे समय तक ऊंची दरें बने रहने से वैश्विक निवेश प्रवाह और कंपनियों की मांग प्रभावित हो सकती है। भारतीय आईटी कंपनियों के लिए अमेरिका एक महत्वपूर्ण बाजार है, इसलिए वहां आर्थिक गतिविधियों में सुस्ती का असर उनके कारोबार पर पड़ सकता है। शुक्रवार को आईटी शेयरों में भी बिकवाली देखने को मिली और निफ्टी आईटी गिरावट के साथ बंद हुआ।
मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में सबसे ज्यादा गिरावट
शुक्रवार को व्यापक बाजार में दबाव प्रमुख इंडेक्सों से कहीं अधिक रहा। निफ्टी स्मॉलकैप 50 में 3.15 प्रतिशत, स्मॉलकैप 100 में 2.94 प्रतिशत और स्मॉलकैप 250 में 2.79 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। स्मॉलकैप 500 भी 2.64 प्रतिशत टूटा, जबकि निफ्टी मिडस्मॉलकैप 400 50:50 सूचकांक 2.43 प्रतिशत नीचे बंद हुआ।
कई सेक्टरों में बिकवाली हावी
सेक्टोरल सूचकांकों में निफ्टी मिडस्मॉल फाइनेंशियल सर्विसेज 2.78 प्रतिशत, निफ्टी मेटल 2.71 प्रतिशत और निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स 2.63 प्रतिशत गिरा। निफ्टी रियल्टी में 2.38 प्रतिशत और निफ्टी केमिकल्स में 2.32 प्रतिशत की कमजोरी रही। कुल मिलाकर महंगे तेल, वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता और व्यापक बिकवाली ने बाजार पर दबाव बनाए रखा। आगे निवेशकों की नजर कच्चे तेल की कीमतों, विदेशी निवेशकों की गतिविधियों और वैश्विक केंद्रीय बैंकों के रुख पर रहेगी।
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