Saurabh Rajput Murder Case : उत्तर प्रदेश के चर्चित सौरभ राजपूत हत्याकांड में मृत्युदंड की सजा पाने वाले मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला अब निचली अदालत के फैसले को इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती देने की तैयारी में हैं। दोनों दोषियों की ओर से संयुक्त अपील दाखिल किए जाने का दावा किया जा रहा है। अपील में दोषसिद्धि और फांसी की सजा को रद्द करने की मांग की गई है। हालांकि, इस कानूनी प्रक्रिया से जुड़ी जानकारी और अपील की वर्तमान स्थिति की आधिकारिक पुष्टि महत्वपूर्ण होगी।
फांसी की पुष्टि को लेकर क्या है कानूनी प्रक्रिया?
मामले में अभियोजन पक्ष के अधिवक्ता कृष्णकांत चौबे के मुताबिक, दोनों दोषियों को सुनाई गई मृत्युदंड की सजा की पुष्टि के लिए मामला हाईकोर्ट भेजा गया है। उनके अनुसार, अभी हाईकोर्ट से सजा की पुष्टि नहीं हुई है। सामान्य प्रक्रिया में मृत्युदंड की पुष्टि पर हाईकोर्ट विचार करता है। इसके साथ ही, दोषियों की ओर से फैसले को चुनौती देने की अपील भी कानूनी प्रावधानों के तहत दाखिल की जा सकती है। इस मामले में आगे की कार्रवाई अदालत में उपलब्ध रिकॉर्ड और संबंधित याचिकाओं पर निर्भर करेगी।
क्या है नीले ड्रम वाला चर्चित हत्याकांड?
सौरभ राजपूत हत्याकांड ने मेरठ ही नहीं, बल्कि पूरे उत्तर प्रदेश में काफी सुर्खियां बटोरी थीं। मामला मेरठ के ब्रह्मपुरी थाना क्षेत्र का है। आरोपों के मुताबिक, सौरभ की हत्या के बाद उसके शव को नीले रंग के प्लास्टिक ड्रम में रखा गया और उसे सीमेंट तथा कंक्रीट से बंद कर दिया गया था। घटना सामने आने के बाद पुलिस ने मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला को गिरफ्तार किया। मामले की गंभीरता और शव छिपाने के तरीके के कारण यह प्रकरण लंबे समय तक चर्चा में रहा।
जिला अदालत ने कब सुनाई थी फांसी की सजा?
इस मामले की सुनवाई पूरी होने के बाद मेरठ की जिला एवं सत्र अदालत ने 30 सितंबर 2026 को दोनों आरोपियों को हत्या और साक्ष्य मिटाने से संबंधित आरोपों में दोषी ठहराया था। इसके बाद 14 अक्टूबर 2026 को अदालत ने मामले को दुर्लभतम श्रेणी का मानते हुए दोनों को मृत्युदंड की सजा सुनाई। अदालत ने प्रत्येक दोषी पर 50-50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया। सजा सुनाए जाने के बाद अब मामला उच्च न्यायालय की संभावित कानूनी समीक्षा के महत्वपूर्ण चरण में पहुंच गया है।
अपील में किन कानूनी आधारों पर उठाए गए सवाल?
दोषियों की ओर से निचली अदालत के फैसले को गैरकानूनी और मनमाना बताते हुए उसे निरस्त करने की मांग किए जाने की बात सामने आई है। अपील में भारतीय न्याय संहिता की धारा 103(1), धारा 3(5) और धारा 238(ए) के तहत दोषसिद्धि को चुनौती देने की बात कही गई है। हालांकि, अपील के सभी आधारों और दस्तावेजों की आधिकारिक पुष्टि होने के बाद ही उनकी विस्तृत कानूनी स्थिति स्पष्ट होगी।
हाईकोर्ट में वरिष्ठ वकील रखेंगे पक्ष
मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सुशील शुक्ला समेत अन्य वकीलों के पैरवी करने की जानकारी दी गई है। हाईकोर्ट मामले के रिकॉर्ड, साक्ष्यों, दोषसिद्धि और मृत्युदंड से जुड़े कानूनी पहलुओं की समीक्षा कर सकता है। अब सबकी नजर इस बात पर रहेगी कि अपील और मृत्युदंड की पुष्टि से जुड़ी कार्यवाही में अदालत क्या रुख अपनाती है। अंतिम निर्णय न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।
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