सरगुजा के मैनपाट स्थित ग्राम केसरा में 3.46 हेक्टेयर शासकीय भूमि के राजस्व रिकॉर्ड में कथित कूटरचना के मामले में कलेक्टर ने आजाद इराकी सहित पांच लोगों के विरुद्ध FIR दर्ज कराने और अवैध प्रविष्टि हटाने के निर्देश दिए।
सरगुजा के मैनपाट स्थित ग्राम केसरा में 3.46 हेक्टेयर शासकीय भूमि के राजस्व रिकॉर्ड में कथित कूटरचना के मामले में कलेक्टर ने आजाद इराकी सहित पांच लोगों के विरुद्ध FIR दर्ज कराने और अवैध प्रविष्टि हटाने के निर्देश दिए।

Ambikapur News : सरगुजा जिले के मैनपाट में शासकीय भूमि को राजस्व अभिलेखों में कथित कूटरचना के जरिए निजी व्यक्ति के नाम दर्ज कराने और बाद में उसकी रजिस्ट्री किए जाने का मामला सामने आया है। ग्राम केसरा स्थित 3.46 हेक्टेयर भूमि के रिकॉर्ड की जांच में गंभीर अनियमितताएं सामने आने के बाद कलेक्टर सरगुजा ने आजाद इराकी सहित कुल पांच क्रेता-विक्रेताओं के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज कराने के निर्देश दिए हैं। साथ ही राजस्व अभिलेखों में की गई कथित अवैध प्रविष्टि को विलोपित करने के निर्देश भी दिए गए हैं।

मामला तहसील मैनपाट के ग्राम केसरा स्थित खसरा नंबर 1378, रकबा 3.46 हेक्टेयर भूमि से जुड़ा है। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि यह शासकीय भूमि है, जिसे राजस्व अभिलेखों में कूटरचना कर निजी व्यक्ति के नाम दर्ज कराया गया और बाद में दूसरे निजी व्यक्तियों के पक्ष में रजिस्ट्री कर दी गई।

शिकायत मिलने के बाद कलेक्टर ने इसे समय-सीमा में दर्ज कर तहसीलदार मैनपाट से जांच प्रतिवेदन मांगा था। जांच में सामने आया कि वर्ष 1954-55 के अधिकार अभिलेख में अंतिम खसरा नंबर 650 था। ऐसे में उस अभिलेख में खसरा नंबर 1378 की प्रविष्टि होना संभव नहीं था। जांच के अनुसार, खसरा नंबर 1378 पहली बार वर्ष 1995-96 के राजस्व दस्तावेजों में रिनंबरिंग खसरे के रूप में दर्ज हुआ।
जांच प्रतिवेदन के मुताबिक, वर्ष 1954-55 के अधिकार अभिलेख में खसरा नंबर 1378 की प्रविष्टि बाद में कथित रूप से कूटरचना कर विजय सिंह पिता चन्द्रचरण सिंह के नाम दर्ज की गई। इसके बाद विजय सिंह के मुख्तार आम दिलीप चिकवा पिता रामप्रसाद चिरवा और तुलेश्वर गुप्ता पिता गणेश गुप्ता के माध्यम से आजाद इराकी पिता रियाजुद्दीन इराकी तथा अनुपम कुमार सिंह पिता रामाशंकर सिंह के पक्ष में भूमि की रजिस्ट्री किए जाने की जानकारी सामने आई।
वहीं, वर्ष 1995-96 के बंदोबस्त अभिलेख में खसरा नंबर 1378 छोटे झाड़ जंगल मद की शासकीय भूमि के रूप में दर्ज पाया गया। इस प्रविष्टि को भी जांच में भूमि के शासकीय होने के महत्वपूर्ण आधार के रूप में देखा गया है।

प्रकरण में वन भूमि के हस्तांतरण को लेकर वन संरक्षण अधिनियम, 1980 और सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप प्रक्रिया अपनाए जाने का उल्लेख किया गया है।
जांच प्रतिवेदन के आधार पर कलेक्टर सरगुजा ने तहसीलदार मैनपाट को आजाद इराकी सहित कुल पांच क्रेता-विक्रेताओं के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज कराने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही संबंधित राजस्व अधिकारी को अभिलेखों में दर्ज कथित अवैध प्रविष्टि विलोपित करने के लिए आवश्यक कार्रवाई करने को कहा गया है।

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