NEET Exam CBT Mode : देश की परीक्षा व्यवस्था को पारदर्शी, सुरक्षित और पेपर लीक जैसी घटनाओं से मुक्त बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। इन्फोसिस के सह-संस्थापक नंदन नीलेकणि की अध्यक्षता वाली उच्चस्तरीय टास्क फोर्स का कार्यकाल जनवरी 2027 तक बढ़ा दिया गया है। जुलाई 2026 में गठित इस छह सदस्यीय समिति को अब अपनी अंतिम रिपोर्ट तैयार करने और सरकार को सौंपने के लिए अतिरिक्त समय दिया गया है। समिति का उद्देश्य देश की परीक्षा प्रणाली में मौजूद कमियों की पहचान करना और व्यापक सुधारों की सिफारिश करना है।
छात्रों के प्रदर्शन के बाद हुआ था टास्क फोर्स का गठन
इस टास्क फोर्स के गठन की घोषणा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 25 जुलाई को दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए छात्रों के बड़े विरोध प्रदर्शन के बाद की थी। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, यह घोषणा तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के अगले दिन की गई थी। उस समय परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों और पेपर लीक की घटनाओं को लेकर छात्रों तथा अभिभावकों में नाराजगी थी। सरकार ने परीक्षा व्यवस्था को अधिक भरोसेमंद बनाने के लिए विशेषज्ञों की समिति गठित करने का फैसला लिया था।

समिति को मिले 50 हजार से अधिक सुझाव
टास्क फोर्स को अब तक छात्रों, अभिभावकों, शिक्षकों, शैक्षणिक संस्थानों, विषय विशेषज्ञों, उद्योग संगठनों और परीक्षा आयोजित करने वाली संस्थाओं से 50 हजार से अधिक सुझाव प्राप्त हुए हैं। सूत्रों के अनुसार, समिति विभिन्न संबंधित पक्षों से बातचीत कर रही है और सुझावों का अध्ययन किया जा रहा है। सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल कर समिति के कामकाज और अब तक हुई प्रगति की जानकारी भी दी है। अब जनवरी 2027 तक अंतिम रिपोर्ट सौंपने का लक्ष्य रखा गया है।

के. राधाकृष्णन से भी ली गई सलाह
परीक्षा सुधारों पर काम कर रही समिति ने इसरो के पूर्व अध्यक्ष के. राधाकृष्णन से भी सलाह ली है। उन्होंने वर्ष 2024 में NEET पेपर लीक विवाद के बाद केंद्र सरकार की ओर से गठित समिति की अध्यक्षता की थी। जून 2024 में बनी उस समिति ने अक्टूबर में अपनी रिपोर्ट और सिफारिशें सरकार को सौंप दी थीं। इसके बाद सुझावों को लागू करने और उनकी निगरानी के लिए हाई पावर्ड स्टीयरिंग कमेटी बनाई गई थी। इसकी जिम्मेदारी भी के. राधाकृष्णन को दी गई थी।
NEET विवाद के बाद फिर तेज हुई सुधारों की मांग
शिक्षा मंत्रालय पहले से ही राधाकृष्णन समिति की सिफारिशों को लागू करने की दिशा में काम कर रहा था। इसी बीच NEET परीक्षा के पेपर लीक होने की खबरों ने एक बार फिर देशभर में विवाद खड़ा कर दिया। छात्रों और अन्य पक्षों ने विरोध प्रदर्शन किए, जिसके बाद परीक्षा व्यवस्था और शिक्षा मंत्रालय की कार्यप्रणाली पर सवाल उठे। इस घटनाक्रम के बीच तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान पर दबाव बढ़ा और उन्होंने इस्तीफा दे दिया। इसके बाद परीक्षा सुधारों को लेकर नई टास्क फोर्स की घोषणा हुई।

नंदन नीलेकणि की अध्यक्षता में छह सदस्यीय टीम
टास्क फोर्स में नंदन नीलेकणि के अलावा इसरो के पूर्व चेयरमैन एस. सोमनाथ, इंटेलिजेंस ब्यूरो के पूर्व निदेशक तपन डेका, IIT मद्रास के निदेशक वी. कामाकोटी, पूर्व शिक्षा सचिव अनीता करवाल और लॉजिस्टिक्स विशेषज्ञ अमृत लाल मीना शामिल हैं। अलग-अलग क्षेत्रों के इन विशेषज्ञों से परीक्षा आयोजन, सुरक्षा, तकनीक, निगरानी और प्रशासनिक व्यवस्था में सुधार के सुझाव देने की अपेक्षा है।
अगले साल से CBT मोड में होगी NEET परीक्षा
पेपर लीक विवाद के बाद केंद्र सरकार ने घोषणा की है कि अगले वर्ष से NEET परीक्षा कंप्यूटर आधारित टेस्ट यानी CBT मोड में आयोजित की जाएगी। इससे परीक्षा प्रक्रिया को अधिक सुरक्षित और व्यवस्थित बनाने की उम्मीद है। वहीं, राधाकृष्णन समिति ने मेडिकल प्रवेश परीक्षा को चरणों में आयोजित करने तथा पूरी तरह पेन-एंड-पेपर व्यवस्था पर निर्भर रहने के बजाय कंप्यूटर आधारित या हाइब्रिड मोड अपनाने का सुझाव दिया था।
अंतिम रिपोर्ट पर टिकी रहेंगी छात्रों की उम्मीदें
अब नंदन नीलेकणि टास्क फोर्स को जनवरी 2027 तक का समय मिलने के बाद परीक्षा सुधारों की दिशा में उसकी सिफारिशों पर नजर रहेगी। 50 हजार से अधिक सुझावों और विशेषज्ञों की राय के आधार पर तैयार होने वाली रिपोर्ट में परीक्षा सुरक्षा, पारदर्शिता और तकनीकी बदलावों से जुड़े महत्वपूर्ण सुझाव सामने आ सकते हैं। हालांकि, अंतिम सुधारों का स्वरूप सरकार के फैसले और सिफारिशों के क्रियान्वयन पर निर्भर करेगा।
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