Delhi Pollution : देश की राजधानी दिल्ली में वायु प्रदूषण एक बार फिर गंभीर चिंता का विषय बन गया है। नवंबर की शुरुआत के साथ ही हवा की गुणवत्ता में गिरावट दर्ज की जा रही है। प्रदूषण के कारण लोगों को सांस लेने में परेशानी, आंखों में जलन और गले में खराश जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। खासकर बच्चों, बुजुर्गों और सांस संबंधी बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए यह स्थिति अधिक चिंताजनक है। सरकारी एयर क्वालिटी अर्ली वार्निंग सिस्टम के अनुसार, 4 नवंबर की सुबह कई निगरानी केंद्रों पर वायु गुणवत्ता बेहद खराब से गंभीर श्रेणी में दर्ज की गई।
कई इलाकों में AQI 400 के पार
भारतीय उष्णकटिबंधीय मौसम विज्ञान संस्थान (IITM) के एयर क्वालिटी अर्ली वार्निंग सिस्टम के 4 नवंबर रात 2 बजे के आंकड़ों के अनुसार, अलीपुर में AQI 410, बवाना में 403, रोहिणी में 425 और सोनिया विहार में 402 दर्ज किया गया। वहीं मुंडका में 431, पंजाबी बाग में 436 और मंदिर मार्ग में 389 का स्तर सामने आया। इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि राजधानी के कई इलाकों में प्रदूषण का स्तर काफी अधिक बना हुआ है। अलग-अलग निगरानी केंद्रों के आंकड़ों में अंतर हो सकता है, क्योंकि हर स्टेशन अपने आसपास की हवा की गुणवत्ता मापता है।

प्रदूषण से राहत के संकेत फिलहाल कमजोर
दिल्ली में प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए सरकार और संबंधित एजेंसियां कई उपाय करती हैं। सड़कों पर धूल कम करने, पानी का छिड़काव करने, निर्माण स्थलों की निगरानी और खुले में कचरा जलाने पर रोक जैसे कदम उठाए जाते हैं। इसके बावजूद मौसम की परिस्थितियां प्रदूषकों को हवा में जमा रहने का मौका दे सकती हैं। हवा की गति कम होने और प्रदूषण के स्रोत लगातार सक्रिय रहने से स्थिति और बिगड़ सकती है।

GRAP के तहत लागू होते हैं प्रदूषण नियंत्रण के उपाय
दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण की स्थिति के आधार पर ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान यानी GRAP के अलग-अलग चरण लागू किए जाते हैं। इसके तहत निर्माण गतिविधियों, वाहनों, डीजल जनरेटर और धूल नियंत्रण से जुड़े उपायों पर सख्ती की जाती है। हालांकि, GRAP का कौन-सा चरण लागू है, इसकी पुष्टि संबंधित आयोग के ताजा आदेश से ही की जानी चाहिए। केवल AQI के किसी एक आंकड़े के आधार पर लागू चरण का अनुमान लगाना सही नहीं होगा।
आने वाले दिनों में कैसा रहेगा प्रदूषण का हाल?
IITM के पूर्वानुमान के मुताबिक, 4 से 6 नवंबर के बीच दिल्ली की हवा बेहद खराब श्रेणी में रह सकती है। इसके बाद के छह दिनों में वायु गुणवत्ता बेहद खराब से गंभीर श्रेणी के बीच रहने की आशंका जताई गई है। ऐसे में आने वाले दिनों में प्रदूषण से राहत मिलने की उम्मीद मौसम की परिस्थितियों पर निर्भर करेगी। हवा की रफ्तार, तापमान और वातावरण में नमी प्रदूषकों के फैलाव को प्रभावित कर सकते हैं।

प्रदूषण से बचने के लिए बरतें सावधानी
खराब हवा के बीच लोगों को सुबह और देर शाम लंबे समय तक खुले में व्यायाम करने से बचना चाहिए। बाहर निकलते समय अच्छी फिटिंग वाला N95 मास्क उपयोगी हो सकता है। बच्चों, बुजुर्गों और सांस के मरीजों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। आंखों में जलन, लगातार खांसी या सांस लेने में परेशानी होने पर चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है। फिलहाल दिल्लीवासियों की नजरें प्रशासनिक कदमों और मौसम में संभावित बदलाव पर टिकी हुई हैं।
Read More : IND vs NZ 1st ODI : भारत-न्यूजीलैंड पहले वनडे में आज होगी भिड़ंत, रोहित-कोहली पर रहेंगी सबकी निगाहें


