Iran Protest : अमेरिका के 2026 के मध्यावधि चुनावों में रिपब्लिकन पार्टी को लगे झटके के बाद ईरान की राजधानी तेहरान में अमेरिका और इजरायल के खिलाफ विरोध प्रदर्शन तेज हो गए हैं। राजधानी के प्रमुख इंकलाब स्क्वायर पर बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी एकत्र हुए और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, उपराष्ट्रपति जेडी वेंस तथा इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की तस्वीरों वाले पोस्टर और बैनर जलाए। इस दौरान लोगों ने अमेरिका और इजरायल के खिलाफ नारेबाजी करते हुए उनकी सैन्य नीतियों और हालिया कार्रवाइयों पर नाराजगी जाहिर की।
इंकलाब स्क्वायर पर ट्रंप और नेतन्याहू के पोस्टर जलाए
तेहरान के इंकलाब स्क्वायर में आयोजित प्रदर्शन के दौरान अमेरिका और इजरायल के शीर्ष नेताओं को निशाना बनाया गया। प्रदर्शनकारियों ने ट्रंप, जेडी वेंस और नेतन्याहू की तस्वीरों वाले बैनरों को आग के हवाले कर दिया। लोगों का गुस्सा खासतौर पर मध्य पूर्व में जारी सैन्य तनाव और अमेरिकी-इजरायली रणनीतियों को लेकर दिखाई दिया।

ईरान में इन चुनावी नतीजों को अमेरिका की युद्ध नीति के खिलाफ जनता की नाराजगी के रूप में पेश किया जा रहा है। तेहरान के राजनीतिक हलकों में इसे रिपब्लिकन पार्टी के लिए कूटनीतिक झटका बताया जा रहा है। हालांकि, अमेरिकी चुनाव परिणामों और ईरान के साथ सैन्य तनाव के बीच सीधे संबंध को लेकर अलग-अलग राजनीतिक विश्लेषण सामने आ रहे हैं।

रिपब्लिकन पार्टी की हार में ईरान संघर्ष की भूमिका
अमेरिका के मध्यावधि चुनावों में रिपब्लिकन पार्टी के खराब प्रदर्शन के बाद ईरान के साथ जारी तनाव एक प्रमुख राजनीतिक मुद्दा बन गया है। खबर में दावा किया गया है कि उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और कुछ विश्लेषकों ने भी ईरान के साथ संघर्ष तथा सैन्य तनाव को चुनावी नतीजों से जुड़ा महत्वपूर्ण कारण माना।
ईरान की सरकार और वहां के प्रदर्शनकारी इन परिणामों को वाशिंगटन की विदेश नीति के खिलाफ प्रतिक्रिया के तौर पर देख रहे हैं। उनका मानना है कि अमेरिकी मतदाताओं ने सैन्य टकराव और युद्ध संबंधी नीतियों के प्रति अपनी असहमति जाहिर की है।

अमेरिकी दूतावास की सालगिरह पर भी सड़कों पर उतरे लोग
तेहरान में 4 और 5 नवंबर को आयोजित रैलियों के दौरान भी बड़ी संख्या में लोग सड़कों पर दिखाई दिए। ये प्रदर्शन 1979 में अमेरिकी दूतावास पर कब्जे की सालगिरह के अवसर पर आयोजित कार्यक्रमों से भी जुड़े थे। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने अमेरिकी और इजरायली नेतृत्व के खिलाफ नारे लगाए तथा उनके प्रतीकात्मक कटआउट जलाए।इन प्रदर्शनों में ईरान की अमेरिका और इजरायल विरोधी राजनीतिक भावनाएं खुलकर सामने आईं। चुनावी नतीजों को भी इसी विरोध के साथ जोड़कर देखा गया।
#WATCH | Tehran, Iran: People burn the banner of US President Donald Trump, Vice President JD Vance and Israeli PM Benjamin Netanyahu, following the Republican Party's losses in the US midterm elections.
(Source: Reuters) pic.twitter.com/talNHm1vnh
— ANI (@ANI) November 5, 2026
होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव से बढ़ी अंतरराष्ट्रीय चिंता
मध्य पूर्व में ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच संबंध लंबे समय से तनावपूर्ण बने हुए हैं। विशेष रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य में सैन्य गतिविधियों, हमलों और प्रतिबंधों को लेकर स्थिति संवेदनशील बनी हुई है। इस क्षेत्र का अंतरराष्ट्रीय व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति के लिहाज से काफी महत्व है।
ईरानी अधिकारियों का दावा है कि अमेरिकी जनता ने चुनाव के माध्यम से युद्ध आधारित नीतियों के खिलाफ अपना संदेश दिया है। दूसरी ओर, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अपनी रणनीति को सही ठहराते रहे हैं। ऐसे में अमेरिकी चुनावी नतीजों के बावजूद तेहरान और वाशिंगटन के बीच तनाव कम होने के स्पष्ट संकेत नहीं दिखाई दे रहे हैं।
क्या चुनावी नतीजों से बदलेगी अमेरिका की ईरान नीति?
तेहरान में हुए विरोध प्रदर्शनों ने एक बार फिर अमेरिका-ईरान संबंधों को अंतरराष्ट्रीय चर्चा में ला दिया है। अब सवाल यह है कि क्या अमेरिकी चुनावी झटके के बाद वाशिंगटन अपनी मध्य पूर्व नीति में बदलाव करेगा या दोनों देशों के बीच टकराव आगे भी जारी रहेगा। आने वाले दिनों में दोनों देशों के राजनीतिक और कूटनीतिक कदमों पर दुनिया की नजर रहेगी।

