Mekedatu Dam Project : तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने कावेरी नदी पर प्रस्तावित मेकेदातू डैम प्रोजेक्ट को लेकर केंद्र सरकार के सामने अपनी चिंता जाहिर की है। शनिवार, 7 नवंबर 2026 को उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर इस परियोजना पर महत्वपूर्ण मांग रखी। मुख्यमंत्री ने अपील की है कि कावेरी नदी के बेसिन से जुड़े सभी राज्यों की सहमति के बिना मेकेदातू बांध परियोजना को किसी भी तरह की वैधानिक या प्रशासनिक मंजूरी नहीं दी जानी चाहिए।विजय का कहना है कि इस परियोजना से तमिलनाडु के किसानों और कावेरी डेल्टा क्षेत्र में रहने वाले लोगों के हित प्रभावित हो सकते हैं। उन्होंने केंद्र सरकार से अंतरराज्यीय जल विवाद और निचले तटवर्ती राज्य के अधिकारों को ध्यान में रखकर फैसला लेने का आग्रह किया है।
केंद्रीय अधिकारियों के साइट निरीक्षण से किसानों की बढ़ी चिंता
समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में मुख्यमंत्री विजय ने केंद्रीय अधिकारियों की ओर से मेकेदातू परियोजना के स्थल का निरीक्षण किए जाने पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि इस निरीक्षण से कावेरी डेल्टा के किसानों की चिंताएं और बढ़ गई हैं।मुख्यमंत्री के अनुसार, तमिलनाडु के किसान पहले से ही वर्ष 2026-27 में जल संकट जैसी परिस्थितियों का सामना कर रहे हैं। ऐसे समय में प्रस्तावित बांध परियोजना को लेकर सामने आ रही गतिविधियां उनकी परेशानियां बढ़ा सकती हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कर्नाटक तमिलनाडु को उसके निर्धारित हिस्से का पानी आनुपातिक आधार पर भी उपलब्ध कराने से इनकार कर रहा है।

पानी की मात्रा के साथ मासिक आपूर्ति का अधिकार सुरक्षित रखने की मांग
मुख्यमंत्री विजय ने अपने पत्र में कहा कि कावेरी नदी के निचले तटवर्ती राज्यों के अधिकारों की पूरी तरह सुरक्षा की जानी चाहिए। इसमें केवल पानी की कुल निर्धारित मात्रा ही नहीं, बल्कि हर महीने पानी छोड़ने की समय-सारणी और व्यवस्था भी शामिल होनी चाहिए।उन्होंने प्रधानमंत्री से कहा कि यह मामला तमिलनाडु में कावेरी जल की निरंतर उपलब्धता और राज्य के किसान समुदाय की आजीविका से जुड़ा हुआ है। इसलिए किसी भी निर्णय में सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों और पहले से निर्धारित जल बंटवारे की व्यवस्था का पालन सुनिश्चित किया जाना चाहिए।

67.16 TMC क्षमता वाला प्रस्तावित मेकेदातू जलाशय
सीएम विजय ने प्रस्तावित मेकेदातू जलाशय की क्षमता 67.16 हजार मिलियन क्यूबिक फीट (TMC) बताई है। उनके मुताबिक, इस जलाशय का निर्माण कर्नाटक और तमिलनाडु की अंतरराज्यीय सीमा के ठीक ऊपर करने का प्रस्ताव है।उन्होंने आशंका जताई कि इतनी बड़ी क्षमता वाला जलाशय तमिलनाडु के हिस्से के पानी को रोकने की स्थिति पैदा कर सकता है। इससे राज्य के कावेरी बेसिन में रहने वाले लोगों को सुप्रीम कोर्ट के फैसले के अनुसार मिलने वाली मासिक जल आपूर्ति भी प्रभावित हो सकती है। मुख्यमंत्री ने इसे तमिलनाडु के जल हितों से जुड़ा गंभीर विषय बताया है।
कर्नाटक के मुख्यमंत्री की केंद्रीय अधिकारियों से मुलाकात पर सवाल
मुख्यमंत्री विजय ने अपने पत्र में कर्नाटक के मुख्यमंत्री की ओर से मेकेदातू परियोजना की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) को मंजूरी दिलाने के लिए केंद्र सरकार के अधिकारियों से संपर्क किए जाने की खबरों का भी उल्लेख किया है।उन्होंने कहा कि ऐसी जानकारी सामने आ रही है कि कर्नाटक के मुख्यमंत्री जल शक्ति मंत्रालय और पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के अधिकारियों से मुलाकात कर रहे हैं। इन बैठकों का उद्देश्य मेकेदातू परियोजना की DPR को मंजूरी दिलाना बताया जा रहा है।विजय ने आरोप लगाया कि तमिलनाडु की सहमति के बिना इस तरह की गतिविधियां निचले तटवर्ती राज्य के किसानों के बीच असुरक्षा और चिंता पैदा कर रही हैं।

कावेरी जल विवाद में केंद्र सरकार के फैसले पर टिकी नजरें
मेकेदातू बांध परियोजना को लेकर तमिलनाडु और कर्नाटक के बीच लंबे समय से मतभेद बने हुए हैं। तमिलनाडु को आशंका है कि प्रस्तावित जलाशय के निर्माण से उसके हिस्से के कावेरी जल की उपलब्धता प्रभावित हो सकती है।मुख्यमंत्री विजय ने प्रधानमंत्री मोदी से इस मामले में व्यक्तिगत हस्तक्षेप करने और सभी संबंधित राज्यों के हितों को ध्यान में रखने की मांग की है। अब इस मुद्दे पर केंद्र सरकार क्या रुख अपनाती है, इस पर दोनों राज्यों की नजरें टिकी हैं।

