Russia Earthquake : फिर कांपी रूस की धरती: कामचटका में 6.0 तीव्रता का भूकंप, एक हफ्ते में दूसरी बड़ी हलचल

Russia Earthquake : रूस के कामचटका द्वीप के पूर्वी तट पर एक बार फिर भूकंप के झटके महसूस किए गए। शनिवार रात 7 बजकर 44 मिनट पर आए इस भूकंप की तीव्रता रिक्टर स्केल पर 6.0 दर्ज की गई। नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी के अनुसार, इसका केंद्र धरती की सतह से 20 किलोमीटर नीचे स्थित था। भूकंप के झटके इतने तेज थे कि लोगों में दहशत फैल गई। सुनामी का भी बना था खतरा इससे पहले 30 जुलाई 2025 को भी कामचटका क्षेत्र में 8.8 तीव्रता का भयानक भूकंप आया था। यह भूकंप रूस के इतिहास का छठा सबसे शक्तिशाली भूकंप माना गया। उस समय इसका केंद्र पेट्रोपावलोव्स्क-कामचट्स्की के पास समुद्र में 20.7 किलोमीटर की गहराई में था। यह क्षेत्र प्रशांत महासागर के ‘रिंग ऑफ फायर’ में आता है, जहां अक्सर भूकंप और ज्वालामुखीय गतिविधियां होती रहती हैं। भूकंप ने पहुंचाया था इमारतों को नुकसान 30 जुलाई को आए शक्तिशाली भूकंप से कामचटका के पेट्रोपावलोव्स्क-कामचट्स्की क्षेत्र में कई इमारतों को नुकसान पहुंचा था। लगभग 1.80 लाख की आबादी वाले इस इलाके में कुछ लोग घायल हुए थे, हालांकि किसी की मृत्यु की खबर सामने नहीं आई थी। स्थानीय प्रशासन और आपदा प्रबंधन टीम ने तत्काल राहत कार्य शुरू किया था और स्थिति को संभाल लिया गया था। भूकंप के बाद आई थी सुनामी 30 जुलाई को आए भूकंप के तुरंत बाद प्रशांत महासागर में सुनामी की लहरें उठीं। रूस के सेवेरो-कुरिल्स्क तट पर करीब 4 मीटर यानी 13 फीट ऊंची लहरों ने समुद्र किनारे तबाही मचाई। बंदरगाह और आसपास के क्षेत्रों में जलभराव हो गया। तटीय इलाकों को खाली कराकर लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया। जापान से पेरू तक फैला था सुनामी का असर भूकंप के कारण उत्पन्न सुनामी का प्रभाव केवल रूस तक सीमित नहीं रहा। जापान, हवाई, कैलिफोर्निया, अलास्का, न्यूजीलैंड, चिली और पेरू तक इसकी लहरें पहुंचीं। हवाई में 5.7 फीट और कैलिफोर्निया में 3.5 फीट ऊंची लहरें तट से टकराईं। जापान को एक बार फिर 2011 की तबाही की याद दिला दी गई, जब 130 फीट ऊंची लहरों ने देश को झकझोर दिया था। हालांकि इस बार लहरें अपेक्षाकृत छोटी थीं, लेकिन एहतियात के तौर पर जापान में करीब 20 लाख लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया। रूस में एक हफ्ते के भीतर दो बड़े भूकंपों ने खतरे की घंटी बजा दी है। वैज्ञानिक इसे ‘रिंग ऑफ फायर’ की सक्रियता का संकेत मान रहे हैं और अगले कुछ हफ्तों तक सतर्क रहने की चेतावनी दी गई है। Read More  : Tejashwi Yadav vs EC : तेजस्वी यादव बनाम चुनाव आयोग: वोटर लिस्ट विवाद पर सीधी टक्कर, आयोग ने दी पूरी जानकारी

Russia Earthquake : रूस के कामचटका द्वीप के पूर्वी तट पर एक बार फिर भूकंप के झटके महसूस किए गए। शनिवार रात 7 बजकर 44 मिनट पर आए इस भूकंप की तीव्रता रिक्टर स्केल पर 6.0 दर्ज की गई। नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी के अनुसार, इसका केंद्र धरती की सतह से 20 किलोमीटर नीचे स्थित था। भूकंप के झटके इतने तेज थे कि लोगों में दहशत फैल गई।

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सुनामी का भी बना था खतरा

इससे पहले 30 जुलाई 2025 को भी कामचटका क्षेत्र में 8.8 तीव्रता का भयानक भूकंप आया था। यह भूकंप रूस के इतिहास का छठा सबसे शक्तिशाली भूकंप माना गया। उस समय इसका केंद्र पेट्रोपावलोव्स्क-कामचट्स्की के पास समुद्र में 20.7 किलोमीटर की गहराई में था। यह क्षेत्र प्रशांत महासागर के ‘रिंग ऑफ फायर’ में आता है, जहां अक्सर भूकंप और ज्वालामुखीय गतिविधियां होती रहती हैं।

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भूकंप ने पहुंचाया था इमारतों को नुकसान

30 जुलाई को आए शक्तिशाली भूकंप से कामचटका के पेट्रोपावलोव्स्क-कामचट्स्की क्षेत्र में कई इमारतों को नुकसान पहुंचा था। लगभग 1.80 लाख की आबादी वाले इस इलाके में कुछ लोग घायल हुए थे, हालांकि किसी की मृत्यु की खबर सामने नहीं आई थी। स्थानीय प्रशासन और आपदा प्रबंधन टीम ने तत्काल राहत कार्य शुरू किया था और स्थिति को संभाल लिया गया था।

भूकंप के बाद आई थी सुनामी

30 जुलाई को आए भूकंप के तुरंत बाद प्रशांत महासागर में सुनामी की लहरें उठीं। रूस के सेवेरो-कुरिल्स्क तट पर करीब 4 मीटर यानी 13 फीट ऊंची लहरों ने समुद्र किनारे तबाही मचाई। बंदरगाह और आसपास के क्षेत्रों में जलभराव हो गया। तटीय इलाकों को खाली कराकर लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया।

जापान से पेरू तक फैला था सुनामी का असर

भूकंप के कारण उत्पन्न सुनामी का प्रभाव केवल रूस तक सीमित नहीं रहा। जापान, हवाई, कैलिफोर्निया, अलास्का, न्यूजीलैंड, चिली और पेरू तक इसकी लहरें पहुंचीं। हवाई में 5.7 फीट और कैलिफोर्निया में 3.5 फीट ऊंची लहरें तट से टकराईं। जापान को एक बार फिर 2011 की तबाही की याद दिला दी गई, जब 130 फीट ऊंची लहरों ने देश को झकझोर दिया था। हालांकि इस बार लहरें अपेक्षाकृत छोटी थीं, लेकिन एहतियात के तौर पर जापान में करीब 20 लाख लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया।

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रूस में एक हफ्ते के भीतर दो बड़े भूकंपों ने खतरे की घंटी बजा दी है। वैज्ञानिक इसे ‘रिंग ऑफ फायर’ की सक्रियता का संकेत मान रहे हैं और अगले कुछ हफ्तों तक सतर्क रहने की चेतावनी दी गई है।

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