Raksha Bandhan 2026: रक्षाबंधन भाई-बहन के पवित्र प्रेम, विश्वास और स्नेह का त्योहार है। इस दिन बहनें भाई की कलाई पर राखी बांधती हैं और भाई उनकी सुरक्षा, सम्मान व सुख-समृद्धि का संकल्प लेते हैं। रक्षाबंधन से जुड़ी कई धार्मिक परंपराएं भी अलग-अलग परिवारों में प्रचलित हैं। इन्हीं में भगवान गणेश को सबसे पहले रक्षा सूत्र अर्पित करने की मान्यता विशेष रूप से बताई जाती है।
भगवान गणेश को सबसे पहले राखी अर्पित करने की मान्यता
धार्मिक मान्यताओं में भगवान गणेश को प्रथम पूज्य और विघ्नहर्ता माना गया है। इसलिए किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत गणेश पूजन से करने की परंपरा रही है। इसी विश्वास के आधार पर कई परिवारों में रक्षाबंधन के दिन भाई को राखी बांधने से पहले भगवान गणेश को रक्षा सूत्र अर्पित किया जाता है। मान्यता है कि इससे पर्व की शुरुआत शुभ तरीके से होती है और परिवार पर गणेश जी की कृपा बनी रहती है।
ऐसे करें गणेश जी की पूजा
रक्षाबंधन के दिन सबसे पहले भगवान गणेश की प्रतिमा या तस्वीर के सामने दीपक जलाकर पूजा की जा सकती है। इसके बाद उन्हें रोली, अक्षत, फूल और मिठाई अर्पित करने की परंपरा है। पूजा के बाद गणेश जी को राखी या रक्षा सूत्र बांधा जाता है। श्रद्धालु इस दौरान परिवार की सुख-शांति, समृद्धि और सभी सदस्यों के कल्याण की प्रार्थना करते हैं। कई परिवारों में इष्टदेव, कुलदेवता और भगवान कृष्ण को भी राखी अर्पित करने की परंपरा है।
गणेश पूजा के बाद भाई को बांधें राखी
भगवान गणेश की पूजा और उन्हें रक्षा सूत्र अर्पित करने के बाद भाई को राखी बांधने की रस्म पूरी की जाती है। सबसे पहले बहन भाई के माथे पर रोली या कुमकुम से तिलक लगाती है। इसके बाद अक्षत लगाए जाते हैं और भाई की आरती उतारी जाती है। फिर उसकी कलाई पर राखी बांधी जाती है। राखी बांधने के बाद बहन भाई को मिठाई खिलाती है। भाई भी बहन को उपहार देकर उसके सुखी और सुरक्षित जीवन की कामना करता है।
रक्षाबंधन पर गणेश पूजा का धार्मिक महत्व
भगवान गणेश को बुद्धि, शुभता और मंगल के देवता के रूप में पूजा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, उनकी पूजा से शुभ कार्यों में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं। यही कारण है कि कई लोग रक्षाबंधन जैसे महत्वपूर्ण त्योहार की शुरुआत भी गणेश पूजन से करना शुभ मानते हैं। हालांकि, यह परंपरा आस्था और पारिवारिक रीति-रिवाजों पर आधारित है।
रक्षाबंधन 2026 कब मनाया जाएगा?
पंचांग के अनुसार, वर्ष 2026 में रक्षाबंधन का पर्व 28 अगस्त, शुक्रवार को मनाया जाएगा। श्रावण पूर्णिमा तिथि 27 अगस्त की सुबह 9 बजकर 8 मिनट से शुरू होकर 28 अगस्त की सुबह 9 बजकर 48 मिनट तक रहने की जानकारी दी गई है। इसी अवधि को ध्यान में रखते हुए 28 अगस्त को सुबह 5:57 बजे से 9:48 बजे तक राखी बांधने का शुभ समय बताया गया है।
क्या गणेश जी को राखी बांधना अनिवार्य है?
भगवान गणेश को राखी अर्पित करना धार्मिक आस्था और परंपरा से जुड़ी मान्यता है। इसे प्रत्येक परिवार के लिए अनिवार्य धार्मिक नियम नहीं माना जाता। कुछ परिवार रक्षाबंधन की शुरुआत गणेश पूजा और रक्षा सूत्र अर्पित करने से करते हैं, जबकि कई परिवार सीधे भाई को राखी बांधने की रस्म निभाते हैं। इसलिए गणेश जी को राखी अर्पित करना श्रद्धा और पारिवारिक परंपरा के अनुसार किया जा सकता है।
रक्षाबंधन का मूल संदेश है प्रेम और विश्वास
रक्षाबंधन की परंपराओं का उद्देश्य भाई-बहन के रिश्ते में प्रेम, विश्वास और पारिवारिक जुड़ाव को मजबूत करना है। गणेश पूजा से पर्व की शुरुआत करने की मान्यता भी इसी धार्मिक भावना का हिस्सा है। परिवार अपनी परंपरा और श्रद्धा के अनुसार पूजा-पाठ कर सकते हैं और इसके बाद भाई-बहन राखी बांधने की रस्म पूरी कर सकते हैं।
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