Kidney Stone Prevention: पथरी से बचना है तो पानी, नमक, कैल्शियम और प्रोटीन का रखें ध्यान

किडनी स्टोन की समस्या से बचाव में रोजाना की डाइट और पानी पीने की आदत अहम भूमिका निभा सकती है। पर्याप्त पानी पीना, ज्यादा नमक से बचना और कैल्शियम व प्रोटीन का संतुलित सेवन जरूरी है। हालांकि पथरी का प्रकार और व्यक्ति की स्थिति अलग हो सकती है, इसलिए बार-बार समस्या होने पर डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है।

Kidney Stone Prevention:  किडनी स्टोन यानी गुर्दे की पथरी का दर्द बेहद परेशान करने वाला हो सकता है। कमर या पेट के किसी एक हिस्से में अचानक तेज दर्द, बेचैनी, उल्टी और पेशाब के दौरान जलन जैसे लक्षण मरीज की रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित कर सकते हैं। एक बार पथरी निकल जाने के बाद भी दोबारा इसके बनने की आशंका बनी रहती है। इसलिए इलाज के साथ ऐसी आदतों पर ध्यान देना जरूरी है, जो भविष्य में पथरी बनने का जोखिम कम करने में मदद कर सकें।

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किडनी स्टोन आखिर क्यों बनता है?

जब पेशाब में कैल्शियम, ऑक्सलेट या यूरिक एसिड जैसे कुछ खनिज और रसायन जरूरत से ज्यादा मात्रा में जमा होने लगते हैं, तो छोटे क्रिस्टल बन सकते हैं। समय के साथ यही क्रिस्टल आपस में जुड़कर पथरी का रूप ले सकते हैं। पर्याप्त पानी न पीना इसका एक महत्वपूर्ण जोखिम कारक है। इसके अलावा ज्यादा नमक का सेवन, खानपान की कुछ आदतें, मोटापा, पारिवारिक इतिहास और कुछ स्वास्थ्य समस्याएं भी पथरी बनने की संभावना बढ़ा सकती हैं।

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हर किडनी स्टोन एक जैसा नहीं होता

किडनी स्टोन कई प्रकार की हो सकती है। इनमें कैल्शियम ऑक्सलेट स्टोन सबसे आम माना जाता है। इसके अलावा यूरिक एसिड, कैल्शियम फॉस्फेट, स्ट्रुवाइट और सिस्टीन स्टोन भी पाए जाते हैं। पथरी का प्रकार जानना इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि हर व्यक्ति के लिए एक जैसी डाइट या बचाव की रणनीति प्रभावी नहीं होती। बार-बार पथरी बनने पर डॉक्टर से जांच और व्यक्तिगत सलाह लेना बेहतर है।

पूरे दिन पर्याप्त पानी पीना सबसे जरूरी

किडनी स्टोन से बचाव के लिए पर्याप्त तरल पदार्थ लेना सबसे महत्वपूर्ण आदतों में शामिल है। पर्याप्त पानी पीने से पेशाब अधिक पतला रहता है और उसमें मौजूद खनिजों के क्रिस्टल बनने की संभावना कम हो सकती है। पानी की जरूरत हर व्यक्ति में अलग हो सकती है और यह मौसम, शारीरिक मेहनत तथा पसीना निकलने की मात्रा पर निर्भर करती है।

पानी एक साथ नहीं, दिनभर लेते रहें

गर्मी में बाहर काम करने या ज्यादा व्यायाम करने वाले लोगों को सामान्य दिनों की तुलना में अधिक तरल की जरूरत पड़ सकती है। इसलिए पानी को एक ही बार में बहुत ज्यादा पीने के बजाय पूरे दिन थोड़ी-थोड़ी मात्रा में लेना बेहतर आदत हो सकती है। पेशाब का बहुत गहरा रंग शरीर में पानी की कमी का संकेत हो सकता है, जबकि हल्का पीला रंग आमतौर पर बेहतर हाइड्रेशन की ओर इशारा करता है। हालांकि, किडनी या हृदय संबंधी बीमारी में डॉक्टर ने तरल पदार्थ सीमित करने को कहा है तो अपनी ओर से पानी की मात्रा नहीं बढ़ानी चाहिए।

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छिपे हुए नमक पर भी रखें नजर

किडनी स्टोन से बचने के लिए सिर्फ खाने में ऊपर से नमक कम करना पर्याप्त नहीं है। कई पैकेज्ड और प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों में सोडियम की मात्रा अधिक हो सकती है। चिप्स, नमकीन, अचार, पापड़, इंस्टेंट नूडल्स, सॉस, रेडी-टू-ईट खाद्य पदार्थ और कुछ बेकरी उत्पाद इसके उदाहरण हैं।

ज्यादा सोडियम क्यों बढ़ा सकता है जोखिम?

अधिक सोडियम का सेवन कुछ लोगों में पेशाब के जरिए कैल्शियम के उत्सर्जन को बढ़ा सकता है। इससे कैल्शियम आधारित पथरी बनने का जोखिम बढ़ सकता है। इसलिए भोजन में नमक की मात्रा नियंत्रित करना उपयोगी हो सकता है। स्वाद बढ़ाने के लिए नींबू, धनिया, जीरा, काली मिर्च और अन्य मसालों या जड़ी-बूटियों का इस्तेमाल किया जा सकता है।

कैल्शियम वाली चीजें पूरी तरह बंद न करें

कैल्शियम स्टोन का नाम सुनकर कुछ लोग दूध, दही और अन्य कैल्शियम युक्त खाद्य पदार्थ खाना बंद कर देते हैं। हालांकि, बिना डॉक्टर की सलाह ऐसा करना उचित नहीं है। भोजन से मिलने वाला कैल्शियम आंत में ऑक्सलेट से जुड़कर उसके अवशोषण को कम करने में मदद कर सकता है। इसलिए संतुलित मात्रा में दूध, दही और पनीर जैसे खाद्य पदार्थ लिए जा सकते हैं।

कैल्शियम सप्लीमेंट डॉक्टर की सलाह से लें

डाइटरी कैल्शियम और कैल्शियम सप्लीमेंट को एक जैसा नहीं माना जाना चाहिए। यदि किसी व्यक्ति को कैल्शियम सप्लीमेंट की जरूरत है, तो उसकी मात्रा और समय डॉक्टर से सलाह लेकर तय करना बेहतर है। पहले से पथरी की समस्या वाले लोगों को बिना चिकित्सकीय सलाह के सप्लीमेंट शुरू या बंद नहीं करना चाहिए।

प्रोटीन का सेवन संतुलित रखें

प्रोटीन शरीर के लिए जरूरी पोषक तत्व है, इसलिए पथरी से बचने के नाम पर इसे पूरी तरह बंद करना सही नहीं है। हालांकि, बहुत ज्यादा रेड मीट, ऑर्गन मीट और कुछ अन्य पशु-आधारित प्रोटीन का सेवन कुछ लोगों में यूरिक एसिड बढ़ा सकता है। इससे यूरिक एसिड स्टोन का जोखिम बढ़ने की संभावना हो सकती है।

प्लांट प्रोटीन भी हो सकता है विकल्प

दाल, चना, राजमा और अन्य पौधों से मिलने वाले प्रोटीन को संतुलित आहार में शामिल किया जा सकता है। लेकिन जिन लोगों को पहले से किडनी स्टोन है, उनके लिए प्रोटीन की सही मात्रा और स्रोत पथरी के प्रकार और जांच रिपोर्ट पर निर्भर कर सकते हैं। इसलिए बार-बार पथरी बनने पर डॉक्टर या डाइट विशेषज्ञ से व्यक्तिगत सलाह लेना बेहतर है।

हर ऑक्सलेट वाली चीज को बंद करना जरूरी नहीं

पालक, चुकंदर, कुछ नट्स और अन्य खाद्य पदार्थों में ऑक्सलेट पाया जाता है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि हर व्यक्ति को इन सभी चीजों को हमेशा के लिए अपनी डाइट से हटा देना चाहिए। बिना जरूरत बेहद सख्त डाइट अपनाने से शरीर को जरूरी पोषक तत्वों की कमी हो सकती है।

बार-बार पथरी बने तो कराएं जांच

यदि किसी व्यक्ति को बार-बार कैल्शियम ऑक्सलेट स्टोन बनता है, तो डॉक्टर 24 घंटे की यूरिन जांच की सलाह दे सकते हैं। इससे पेशाब में कैल्शियम, ऑक्सलेट, यूरिक एसिड और साइट्रेट जैसी चीजों की मात्रा के बारे में जानकारी मिल सकती है। इन रिपोर्ट के आधार पर व्यक्ति के लिए ज्यादा उपयुक्त डाइट और बचाव की रणनीति तैयार की जा सकती है।

क्या नींबू पानी पथरी रोकने में मदद करता है?

नींबू में साइट्रेट पाया जाता है, जो कुछ परिस्थितियों में पथरी बनने की प्रक्रिया को प्रभावित कर सकता है। बिना ज्यादा चीनी वाला नींबू पानी तरल पदार्थों का सेवन बढ़ाने का एक तरीका हो सकता है। हालांकि, इसे किडनी स्टोन का इलाज या पथरी गलाने वाला चमत्कारी उपाय नहीं समझना चाहिए। हर प्रकार की पथरी पर इसका प्रभाव समान नहीं होता और यह डॉक्टर द्वारा सुझाए गए उपचार का विकल्प नहीं है।

इन लक्षणों को नजरअंदाज न करें

किडनी स्टोन के साथ तेज दर्द होने पर कुछ लक्षण गंभीर स्थिति का संकेत हो सकते हैं। दर्द के साथ बुखार या ठंड लगना, पेशाब बहुत कम होना या बंद हो जाना, पेशाब में दिखाई देने वाला खून, लगातार उल्टी और पानी न पी पाना जैसी स्थिति में चिकित्सकीय मदद लेना जरूरी है। गर्भवती महिलाओं, एक ही किडनी वाले लोगों या पहले से किडनी की बीमारी से जूझ रहे व्यक्तियों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए।

रोज की छोटी आदतें बन सकती हैं बचाव का आधार

किडनी स्टोन से बचाव के लिए किसी एक घरेलू नुस्खे पर निर्भर रहने के बजाय रोजमर्रा की आदतों में सुधार करना ज्यादा महत्वपूर्ण है। पर्याप्त पानी पीना, नमक और अत्यधिक प्रोसेस्ड भोजन सीमित करना, प्रोटीन का संतुलित सेवन और पर्याप्त डाइटरी कैल्शियम लेना उपयोगी हो सकता है। अगर पथरी बार-बार बन रही है, तो स्टोन का विश्लेषण और आवश्यक यूरिन जांच कराकर डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर रहेगा। पथरी के प्रकार के अनुसार खानपान संबंधी सलाह बदल सकती है, इसलिए किसी इंटरनेट डाइट चार्ट को बिना विशेषज्ञ सलाह के अपनाने से बचना चाहिए।

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Chandan Das

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