Russia Oil Imports : अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा रूस से तेल आयात पर भारत को चेतावनी देने से पहले ही भारतीय तेल कंपनियों ने रूस से तेल खरीद में उल्लेखनीय कमी कर दी थी। इंडियन एक्सप्रेस ने एनालिटिक्स कंपनी ‘केप्लर’ के हवाले से बताया कि जुलाई में रूस से तेल आयात जून की तुलना में 24% और पिछले साल जुलाई की तुलना में 23.5% कम हुआ।

ट्रंप की घोषणा से पहले ही हो चुका था तेल खरीद का फैसला
रिपोर्ट के मुताबिक, जुलाई में जो तेल भारत पहुंचा, उसका आयात मई या जून में तय किया गया था। यानी स्पष्ट है कि ट्रंप की धमकी या चेतावनी से पहले ही भारतीय कंपनियों ने रूस से तेल खरीद घटाने का फैसला कर लिया था। यह फैसला आर्थिक के साथ-साथ रणनीतिक कारणों से लिया गया बताया जा रहा है।

रूसी रियायतों में कटौती बनी बड़ी वजह
यूक्रेन युद्ध के बाद रूस ने भारत जैसे खरीदारों को भारी छूट दी थी, जिससे भारत को सस्ता कच्चा तेल मिल रहा था। लेकिन हाल ही में रूस ने इस रियायत को कम कर दिया है। रॉयटर्स की रिपोर्ट में बताया गया है कि इसी वजह से इंडियन ऑयल, हिंदुस्तान पेट्रोलियम, भारत पेट्रोलियम और मैंगलोर रिफाइनरी जैसी सरकारी कंपनियाँ रूस की बजाय पश्चिम एशिया से तेल मँगवा रही हैं।
अमेरिकी कूटनीतिक दबाव और भू-राजनीतिक बदलाव असरदार
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में एक विशेषज्ञ ने दावा किया कि भारत की यह रणनीति अमेरिकी दबाव का भी नतीजा है। उन्होंने कहा कि यह निर्णय आर्थिक से अधिक भू-राजनीतिक कारणों से प्रेरित है। अमेरिका लंबे समय से भारत पर दबाव बना रहा था कि वह रूस पर अपनी ऊर्जा निर्भरता कम करे। समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार, भारत ने जनवरी से जून 2025 के दौरान अमेरिका से तेल आयात में 51% की बढ़ोतरी की है। पिछले साल की तुलना में यह आँकड़ा 1.8 लाख बैरल प्रतिदिन से बढ़कर 2.71 लाख बैरल प्रतिदिन हो गया है। इसमें सबसे तेज़ वृद्धि अप्रैल के बाद दर्ज की गई।
ट्रंप ने भारतीय कंपनियों के फैसले का स्वागत किया
ट्रंप ने कहा कि उन्हें जानकारी मिली है कि भारत अब रूस से तेल नहीं खरीदेगा। उन्होंने इस फैसले की सराहना करते हुए कहा, “यह अच्छा निर्णय है, देखते हैं आगे क्या होता है।” हालाँकि, भारतीय विदेश मंत्रालय ने इस पर कोई पुष्टि नहीं की है। प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतें वैश्विक कीमतों और स्थिति को देखते हुए तय करता है।
ट्रंप की चेतावनियों से पहले ही भारत ने रूस से तेल आयात घटाना शुरू कर दिया था। बदलती भू-राजनीतिक परिस्थितियाँ, अमेरिकी दबाव और रूसी छूट में कटौती—इन सबने भारत को विकल्प तलाशने पर मजबूर किया है। अब भारत की नजर पश्चिम एशिया और अमेरिका जैसे स्रोतों की ओर है।









