Dharali Tragedy : उत्तरकाशी के धराली गांव में आई त्रासदी ने पूरे क्षेत्र को झकझोर दिया है। यहां मंगलवार को हुए भयंकर सैलाब के बाद 150 से ज्यादा लोगों के मलबे में दबे होने की आशंका जताई जा रही है। अब तक 5 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जिनमें से 2 शव बरामद किए गए हैं। स्थानीय प्रशासन और SDRF की शुरुआती कोशिशों के बाद अब पूरा बचाव अभियान सेना के हवाले कर दिया गया है।

सड़कें टूटीं, गांव मलबे में तब्दील
धराली गांव और आसपास का पूरा इलाका करीब 20 फीट ऊंचे मलबे में दब चुका है। न सड़कें बची हैं, न ही बाजार का कोई नामोनिशान। घटनास्थल तक बड़ी मशीनें 36 घंटे बीतने के बाद भी नहीं पहुंच पाई हैं। भास्कर ग्राउंड रिपोर्ट के अनुसार, भटवारी से धराली के बीच 60 किलोमीटर की दूरी में 5 से अधिक स्थानों पर सड़कें पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी हैं।

हाथों से मलबा हटाकर खोजे जा रहे लोग
सेना के जवान अब बड़े-बड़े बोल्डरों और भारी मलबे को हाथों से हटाकर दबे लोगों की तलाश कर रहे हैं। अब तक सैकड़ों लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला जा चुका है। विशेष रूप से केरल के 28 और महाराष्ट्र के 51 पर्यटकों को रेस्क्यू किया गया है।
ग्लेशियर टूटने से आई आपदा
इस त्रासदी की वजह सामान्य बादल फटना नहीं था। मौसम विभाग के अनुसार, धराली में घटना वाले दिन केवल 2.7 सेमी बारिश हुई, जो सामान्य मानी जाती है। विशेषज्ञों के मुताबिक, इस तबाही का कारण श्रीखंड पर्वत के ऊपर स्थित 6,000 मीटर ऊंचे “हैगिंग ग्लेशियर” का टूटना रहा। भूगर्भ वैज्ञानिकों ने इसे जलवायु परिवर्तन और ग्लेशियर पिघलने से जुड़ी आपदा बताया है।
वायुसेना और सेना की संयुक्त कार्रवाई
सेना ने राहत कार्य के लिए क्षेत्र में वैली ब्रिज बनाना शुरू कर दिया है, जो गुरुवार तक तैयार हो सकता है। साथ ही वायुसेना की टीम भी MI-17 हेलिकॉप्टर, ALH MK-3 एयरक्राफ्ट, AN-32 और C-295 ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट के साथ ऑपरेशन में जुटी है। ये एयरक्राफ्ट आगरा से देहरादून पहुंच चुके हैं और जल्द ही उड़ान भर सकते हैं।
आगे क्या?
प्रशासन अब हेलिकॉप्टर के जरिए प्रभावित गांवों तक राहत सामग्री पहुंचाने की कोशिश कर रहा है। धराली, हर्षिल और सुखी टॉप जैसे दूरस्थ क्षेत्रों में सर्च और रेस्क्यू ऑपरेशन अभी भी जारी है।
यह त्रासदी सिर्फ एक प्राकृतिक घटना नहीं, बल्कि ग्लोबल वार्मिंग और जलवायु परिवर्तन का डरावना संकेत भी है। फिलहाल पूरे देश की नजरें धराली पर टिकी हैं, जहां हर पल के साथ जिंदगियों को बचाने की जद्दोजहद जारी है।










