US-India relations: भारत और अमेरिका के बीच सामरिक रिश्तों में उस समय तनाव आ गया जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर रूस से सस्ते तेल आयात को लेकर 50% तक टैरिफ बढ़ा दिया। इसके जवाब में भारत सरकार ने 3.6 अरब डॉलर की अमेरिकी हथियार डील को ठंडे बस्ते में डालने का फैसला लिया है। साथ ही, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का प्रस्तावित अमेरिका दौरा भी रद्द कर दिया गया है। क्या थी डील? रॉयटर्स की एक विशेष रिपोर्ट के अनुसार, भारत और अमेरिका के बीच होने वाली इस प्रस्तावित डील में शामिल थे: जनरल डायनामिक्स के Stryker कॉम्बैट व्हीकल्स एंटी-टैंक मिसाइल सिस्टम Javelin 6 बोइंग P-8I समुद्री टोही विमान (भारतीय नौसेना के लिए) यह डील कुल 3.6 बिलियन डॉलर (लगभग ₹30,000 करोड़) की थी और अगले कुछ हफ्तों में राजनाथ सिंह के अमेरिकी दौरे के दौरान इस पर हस्ताक्षर की उम्मीद थी। लेकिन अब दोनों देशों के बीच व्यापारिक तनाव के कारण इसे अनिश्चितकाल के लिए टाल दिया गया है। भारत का रुख: राष्ट्रीय हित सर्वोपरि सरकारी सूत्रों के अनुसार, ट्रंप की टैरिफ नीति को भारत ने “टैरिफ टेररिज़्म” करार दिया है। केंद्र सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने रॉयटर्स को बताया, “हम जब तक स्पष्टता नहीं देखेंगे कि अमेरिका की नीति किस दिशा में जा रही है, तब तक रक्षा समझौतों पर आगे नहीं बढ़ा जाएगा।” भारत ने यह भी कहा है कि उसे “अनुचित तरीके से निशाना बनाया जा रहा है”, जबकि अमेरिका और यूरोपीय देश अपने हितों के लिए अब भी रूस से व्यापार कर रहे हैं। ट्रंप का टैरिफ हमला राष्ट्रपति ट्रंप ने बुधवार को घोषणा की कि रूस से सस्ते तेल के आयात को लेकर भारत पर लगाया गया 25% का अतिरिक्त टैरिफ अब 50% किया जाएगा। ट्रंप की यह टिप्पणी सीधे तौर पर भारत के ऊर्जा नीति पर प्रहार है। विश्लेषकों का मानना है कि यह दुनिया के किसी भी बड़े साझेदार पर लगाया गया सबसे आक्रामक टैरिफ में से एक है। इसके तहत भारतीय स्टील, एल्यूमिनियम, टेक्सटाइल, ऑटो पार्ट्स और फार्मास्युटिकल्स जैसे उत्पादों पर भारी असर पड़ सकता है। भारत की प्रतिक्रिया: डिप्लोमेसी के साथ दबाव भारत सरकार फिलहाल इस मुद्दे पर कूटनीतिक दबाव और व्यावसायिक रणनीति दोनों के जरिए अमेरिका को संदेश दे रही है कि व्यापारिक धमकी के बदले में भारत अपने राष्ट्रीय हितों से समझौता नहीं करेगा। राजनाथ सिंह का दौरा रद्द कर देना और हथियारों की डील को ठंडे बस्ते में डालना अमेरिका को यह संकेत है कि भारत अब सामरिक और सैन्य खरीद के मामले में ‘सिंगल विंडो’ पर निर्भर नहीं रहेगा। आगे क्या? हालांकि, जानकारों का मानना है कि ट्रंप अकसर अपनी टैरिफ नीति को अचानक लागू कर देते हैं और उतनी ही तेजी से वापस भी ले लेते हैं। भारत ने फिलहाल रुख कड़ा किया है, लेकिन द्विपक्षीय बातचीत की संभावनाएं अभी भी जिंदा हैं। सरकारी सूत्रों का कहना है कि “जैसे ही व्यापार नीति में स्थिरता आएगी और पारदर्शिता दिखेगी, तब रक्षा समझौते पर पुनर्विचार किया जाएगा।” अमेरिकी टैरिफ के खिलाफ भारत का यह रणनीतिक जवाब एक स्पष्ट संदेश है कि दबाव की राजनीति अब स्वीकार नहीं की जाएगी। यह न सिर्फ सैन्य सौदों को प्रभावित कर रहा है, बल्कि दोनों देशों के रणनीतिक रिश्तों की दिशा को भी तय कर सकता है। Read More : Ambikapur-Renukoot Rail Line : बरवाडीह के फेर में अंबिकापुर से रेल लाइन विस्तार का प्रस्ताव लंबित – वीरेंद्र पांडेय














