Prashant Kishor attack : बिहार चुनाव से पहले प्रशांत किशोर का बड़ा हमला, स्वास्थ्य मंत्री  बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष पर लगाए गंभीर आरोप

Prashant Kishor attack : बिहार विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक गरमाहट तेज हो गई है। जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर ने पटना में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर भाजपा के दो शीर्ष नेताओं- स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय और प्रदेश अध्यक्ष दिलीप जयसवाल- पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया है कि दोनों नेताओं के बीच गहरा आर्थिक रिश्ता है, जो कई अनियमितताओं का कारण बना है।

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स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय और दिलीप जयसवाल के बीच संदिग्ध वित्तीय लेनदेन

प्रशांत किशोर के मुताबिक, कोविड संकट के दौरान 2020 में स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय ने दिल्ली के द्वारका स्थित CGHS लिमिटेड में पत्नी के नाम पर 86 लाख रुपये का फ्लैट खरीदा था। इस खरीद में बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष दिलीप जयसवाल की ओर से वित्तीय मदद की गई। किशोर ने कहा कि 6 अगस्त 2019 को जयसवाल ने अपने अकाउंट से मंगल पांडेय के पिता को 25 लाख रुपये ट्रांसफर किए, जिन्हें बाद में उनकी बहू उर्मिला पांडेय के खाते में स्थानांतरित कर दिया गया। साथ ही, अवधेश पांडेय ने भी 30 लाख रुपये उर्मिला के खाते में दिए।

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प्रशांत किशोर ने इस धनराशि के स्रोत और फ्लैट की खरीद में संभावित गड़बड़ी पर सवाल उठाए। उन्होंने बताया कि 2020 के एफिडेविट में इस फ्लैट की खरीद के लिए किसी लोन का उल्लेख नहीं किया गया है, जो कानून की अनदेखी हो सकती है। किशोर ने यह भी आरोप लगाया कि फ्लैट खरीद के बाद दिलीप जयसवाल के मेडिकल कॉलेज को डीम्ड यूनिवर्सिटी का दर्जा दिया गया, जिससे उनके बीच हितसंबंधों की गंभीर छानबीन की मांग की गई है।

एम्बुलेंस खरीद में घोटाले का आरोप

प्रशांत किशोर ने बिहार स्वास्थ्य विभाग की एम्बुलेंस खरीद प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए। उन्होंने बताया कि फरवरी 2022 में स्वास्थ्य विभाग ने 200 करोड़ रुपये की लागत से 1250 एम्बुलेंस खरीदने के लिए टेंडर जारी किया था। इसमें 466 टाइप-सी एम्बुलेंस की कीमत तय थी, लेकिन फोर्स मोटर्स से हर एम्बुलेंस की खरीद कीमत 28,47,580 रुपये रही, जबकि बाजार दर करीब 21 लाख रुपये थी।

उन्होंने आरोप लगाया कि टाटा मोटर्स को तकनीकी कारणों से टेंडर से बाहर कर दिया गया, जो संदेह पैदा करता है कि यह पूरी खरीद प्रक्रिया पारदर्शी नहीं रही। किशोर ने कहा कि बिहार में यह खरीद अन्य राज्यों की तुलना में अधिक महंगी साबित हुई है, जिससे सरकारी खरीद प्रक्रिया की ईमानदारी पर गंभीर सवाल उठते हैं।

राजनीतिक हलकों में उठे सवाल

प्रशांत किशोर के इन आरोपों ने बिहार की राजनीतिक पार्टियों और जनता के बीच बहस को बढ़ावा दिया है। भाजपा ने अभी तक इस मामले में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन विपक्ष ने इस मामले को लेकर जांच की मांग शुरू कर दी है।

बिहार में चुनावी माहौल पहले से ही तनावपूर्ण है, और ऐसे आरोप राजनीतिक विवाद को और बढ़ा सकते हैं। प्रशांत किशोर की यह प्रेस कॉन्फ्रेंस बिहार विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा नेतृत्व के लिए चुनौती साबित हो सकती है।

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