Owaisi Netanyahu Clash: भारत-अमेरिका के बीच बढ़ते टैरिफ विवाद के बीच इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू का बयान अब सियासी विवाद का केंद्र बन गया है। नेतन्याहू ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से “निपटने” की सलाह देने की बात कही थी। इस पर AIMIM प्रमुख और हैदराबाद से सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने तीखी प्रतिक्रिया दी है।
ओवैसी ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा, “भारत इतना भी बदकिस्मत नहीं है कि उसके प्रधानमंत्री को एक ऐसे युद्ध अपराधी और नरसंहार के आरोपी से सलाह लेनी पड़े, जिसके खिलाफ इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट का वारंट लंबित है।”
‘फिलिस्तीनियों का नरसंहार करने वाला व्यक्ति’
ओवैसी ने अपने पोस्ट में नेतन्याहू को गाजा में 65,000 से ज्यादा फिलिस्तीनियों के नरसंहार के लिए जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि इनमें से करीब 20,000 बच्चे मारे गए, 12 लाख लोग बेघर हो गए, और संयुक्त राष्ट्र के 2,000 से ज्यादा कर्मचारी मारे गए हैं।
ओवैसी ने आगे लिखा, “नेतन्याहू के खिलाफ दो अंतरराष्ट्रीय अदालतों ने पहले ही उनके खिलाफ फैसले दिए हैं। मैं उम्मीद करता हूं कि पीएम मोदी इतिहास के सही पक्ष में खड़े होंगे और एक युद्ध अपराधी के साथ निष्क्रिय भागीदार नहीं बनेंगे।”
नेतन्याहू ने क्या कहा था?
इजरायल के प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने 8 अगस्त को बयान दिया था कि वह ट्रंप से डील करने को लेकर पीएम मोदी को “व्यक्तिगत रूप से सलाह” देंगे, क्योंकि मोदी और ट्रंप दोनों ही उनके “शानदार दोस्त” हैं। उन्होंने यह भी कहा कि भारत-अमेरिका संबंध मजबूत नींव पर टिके हैं और टैरिफ विवाद को शांतिपूर्ण ढंग से सुलझाना दोनों देशों के हित में है।
भारत पर अमेरिका का टैरिफ दबाव
हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने भारत पर 25% अतिरिक्त टैरिफ लगाने का एलान किया था। इसके साथ ही भारत से आयात होने वाले कुछ उत्पादों पर कुल टैरिफ 50% हो गया है। शुरुआती शुल्क 7 अगस्त से लागू हो चुका है, जबकि अतिरिक्त शुल्क 27 अगस्त से लागू होगा।
नेतन्याहू के हस्तक्षेप पर सवाल
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि नेतन्याहू का यह बयान अमेरिका और भारत के द्विपक्षीय मुद्दे में अनावश्यक हस्तक्षेप माना जा सकता है। वहीं, ओवैसी जैसे विपक्षी नेता इस मौके को इजरायल की गाजा नीति पर भारत की चुप्पी से जोड़कर देख रहे हैं।
नेतन्याहू का बयान जहां एक ओर भारत-अमेरिका संबंधों को “मजबूत” बताता है, वहीं दूसरी ओर यह बयान भारत की विदेश नीति को लेकर घरेलू सियासत में बहस का कारण बन गया है। ओवैसी की प्रतिक्रिया यह दिखाती है कि भारत की विदेश नीति में “नैतिक संतुलन” और “राजनयिक दूरी” को लेकर विपक्षी नेता सजग हैं। अब देखना होगा कि सरकार इस पर क्या रुख अपनाती है।
Read More : Operation Akhal: रक्षाबंधन पर दो जवान शहीद, 10 घायल; आतंकियों के खिलाफ अब तक का सबसे लंबा ऑपरेशन जारी
Owaisi Netanyahu Clash: नेतन्याहू के बयान पर भड़के ओवैसी, बोले- भारत को युद्ध अपराधी से सलाह की जरूरत नहीं
Owaisi Netanyahu Clash: भारत-अमेरिका के बीच बढ़ते टैरिफ विवाद के बीच इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू का बयान अब सियासी विवाद का केंद्र बन गया है। नेतन्याहू ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से “निपटने” की सलाह देने की बात कही थी। इस पर AIMIM प्रमुख और हैदराबाद से सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने तीखी प्रतिक्रिया दी है।
ओवैसी ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा, “भारत इतना भी बदकिस्मत नहीं है कि उसके प्रधानमंत्री को एक ऐसे युद्ध अपराधी और नरसंहार के आरोपी से सलाह लेनी पड़े, जिसके खिलाफ इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट का वारंट लंबित है।”
‘फिलिस्तीनियों का नरसंहार करने वाला व्यक्ति’
ओवैसी ने अपने पोस्ट में नेतन्याहू को गाजा में 65,000 से ज्यादा फिलिस्तीनियों के नरसंहार के लिए जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि इनमें से करीब 20,000 बच्चे मारे गए, 12 लाख लोग बेघर हो गए, और संयुक्त राष्ट्र के 2,000 से ज्यादा कर्मचारी मारे गए हैं।
ओवैसी ने आगे लिखा, “नेतन्याहू के खिलाफ दो अंतरराष्ट्रीय अदालतों ने पहले ही उनके खिलाफ फैसले दिए हैं। मैं उम्मीद करता हूं कि पीएम मोदी इतिहास के सही पक्ष में खड़े होंगे और एक युद्ध अपराधी के साथ निष्क्रिय भागीदार नहीं बनेंगे।”
नेतन्याहू ने क्या कहा था?
इजरायल के प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने 8 अगस्त को बयान दिया था कि वह ट्रंप से डील करने को लेकर पीएम मोदी को “व्यक्तिगत रूप से सलाह” देंगे, क्योंकि मोदी और ट्रंप दोनों ही उनके “शानदार दोस्त” हैं। उन्होंने यह भी कहा कि भारत-अमेरिका संबंध मजबूत नींव पर टिके हैं और टैरिफ विवाद को शांतिपूर्ण ढंग से सुलझाना दोनों देशों के हित में है।
भारत पर अमेरिका का टैरिफ दबाव
हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने भारत पर 25% अतिरिक्त टैरिफ लगाने का एलान किया था। इसके साथ ही भारत से आयात होने वाले कुछ उत्पादों पर कुल टैरिफ 50% हो गया है। शुरुआती शुल्क 7 अगस्त से लागू हो चुका है, जबकि अतिरिक्त शुल्क 27 अगस्त से लागू होगा।
नेतन्याहू के हस्तक्षेप पर सवाल
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि नेतन्याहू का यह बयान अमेरिका और भारत के द्विपक्षीय मुद्दे में अनावश्यक हस्तक्षेप माना जा सकता है। वहीं, ओवैसी जैसे विपक्षी नेता इस मौके को इजरायल की गाजा नीति पर भारत की चुप्पी से जोड़कर देख रहे हैं।
नेतन्याहू का बयान जहां एक ओर भारत-अमेरिका संबंधों को “मजबूत” बताता है, वहीं दूसरी ओर यह बयान भारत की विदेश नीति को लेकर घरेलू सियासत में बहस का कारण बन गया है। ओवैसी की प्रतिक्रिया यह दिखाती है कि भारत की विदेश नीति में “नैतिक संतुलन” और “राजनयिक दूरी” को लेकर विपक्षी नेता सजग हैं। अब देखना होगा कि सरकार इस पर क्या रुख अपनाती है।
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