Pakistan Kashmir Issue : कश्मीर को लेकर पाकिस्तान ने एक बार फिर पुराना राग अलापते हुए शुक्रवार को कहा कि वह इस विवाद के समाधान के लिए अमेरिका समेत किसी भी देश की मध्यस्थता का स्वागत करेगा। हालांकि भारत ने हमेशा की तरह तीसरे पक्ष की किसी भी भूमिका से साफ इनकार किया है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब भारत और पाकिस्तान के बीच मई में हुए चार दिवसीय संघर्ष के बाद से कोई भी सीधा संवाद नहीं हुआ है।

पाक विदेश मंत्रालय की प्रेस ब्रीफिंग में बयान
पाकिस्तान के विदेश कार्यालय के प्रवक्ता शफकत अली खान ने साप्ताहिक प्रेस ब्रीफिंग में कहा, “पाकिस्तान कश्मीर मुद्दे को हल करने और क्षेत्र में शांति और स्थिरता लाने के लिए अमेरिका या किसी भी जिम्मेदार देश की मदद का स्वागत करता है।” उन्होंने यह भी कहा कि “कश्मीर विवाद दक्षिण एशिया में शांति और सुरक्षा की जड़ में है।”

भारत का स्पष्ट रुख: ‘तीसरे पक्ष की कोई जरूरत नहीं’
भारत सरकार लगातार यह स्पष्ट करती आई है कि कश्मीर भारत का आंतरिक मामला है और पाकिस्तान से किसी भी प्रकार की बातचीत का मुद्दा केवल पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) की वापसी और आतंकवाद पर ही सीमित होगा। इसके अलावा, 1972 के शिमला समझौते और 1999 के लाहौर घोषणापत्र में यह साफ किया गया है कि भारत और पाकिस्तान अपने सभी विवादों को द्विपक्षीय बातचीत के ज़रिए ही सुलझाएंगे।
मई के संघर्ष के बाद कोई आधिकारिक वार्ता नहीं
पाकिस्तान के बयान में यह भी स्वीकार किया गया कि मई में हुए भारत-पाक संघर्ष के बाद दोनों देशों के बीच राजनयिक स्तर पर नियमित संपर्क के अलावा कोई खास संवाद नहीं हो रहा है। खान ने कहा, “अमेरिका या अन्य देशों की कोशिश तभी सफल हो सकती है जब भारत अपनी स्थिति पर दोबारा विचार करे।”
आतंकवाद और अफवाहों पर भी सफाई
प्रवक्ता खान ने पाकिस्तान में हाल के दिनों में बढ़े आतंकी हमलों पर भी टिप्पणी की। उन्होंने दावा किया कि पाकिस्तान ने अफगानिस्तान से फैल रहे आतंकवाद का मुद्दा कई बार अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उठाया है।
इसके साथ ही खान ने खनिज संसाधनों को लेकर अमेरिका के साथ किसी भी “गुप्त समझौते” की खबरों को “बेबुनियाद” बताया। इसके अलावा, यूक्रेन युद्ध में पाकिस्तानी नागरिकों की कथित भागीदारी के आरोपों को भी खारिज किया गया। खान ने कहा कि “यूक्रेन सरकार ने अब तक इस मुद्दे पर पाकिस्तान से कोई औपचारिक शिकायत नहीं की है।”
भारत की प्रतिक्रिया की संभावना
हालांकि भारत सरकार की ओर से इस बयान पर कोई तत्काल प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन विदेश मंत्रालय पहले भी स्पष्ट कर चुका है कि पाकिस्तान को सीमा पार आतंकवाद पर लगाम लगानी चाहिए, तभी किसी तरह की बातचीत संभव है।
पाकिस्तान द्वारा बार-बार कश्मीर मुद्दे पर अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता की मांग कोई नई बात नहीं है, लेकिन भारत की नीति शुरू से स्पष्ट है — कश्मीर भारत का अभिन्न हिस्सा है और इस मुद्दे पर कोई तीसरा पक्ष स्वीकार्य नहीं है। पाकिस्तान की यह रणनीति अंतरराष्ट्रीय मंच पर सहानुभूति बटोरने की कोशिश के तौर पर देखी जा रही है, जबकि ज़मीनी हकीकत यह है कि वह अपने आंतरिक संकटों से जूझ रहा है।
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