Sarla Bhatt case : तीन दशक बाद खुला इंसाफ का दरवाज़ा, सरला भट्ट हत्याकांड में SIA की बड़ी कार्रवाई, श्रीनगर में 8 ठिकानों पर छापे

Sarla Bhatt case : जम्मू-कश्मीर में तीन दशक पुराना एक दर्दनाक अध्याय फिर से चर्चा में है। वर्ष 1990 में आतंकवाद का शिकार बनीं कश्मीरी पंडित नर्स सरला भट्ट की निर्मम हत्या की जांच को फिर से गति मिली है। जम्मू-कश्मीर पुलिस की स्पेशल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (SIA) ने इस मामले में पहली बार गंभीर स्तर पर कार्रवाई करते हुए सोमवार देर रात श्रीनगर में 8 ठिकानों पर छापेमारी की।

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शेर-ए-कश्मीर मेडिकल संस्थान से अपहरण

18 अप्रैल 1990 को शेर-ए-कश्मीर इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (SKIMS) के हब्बा खातून हॉस्टल से 27 वर्षीय नर्स सरला भट्ट का अपहरण कर लिया गया था। अगली सुबह उनका शव श्रीनगर के उमर कॉलोनी, मलाबाग इलाके में मिला। शव पर गोलियों के निशान थे और साथ में एक नोट भी मिला था, जिसमें उन्हें पुलिस की मुखबिर बताया गया था।

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JKLF पर आरोप, यासीन मलिक के घर पर भी रेड

पुलिस सूत्रों के अनुसार, सरला की हत्या में जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (JKLF) से जुड़े आतंकवादियों की संलिप्तता सामने आई थी। मैसूमा इलाके में JKLF के पूर्व प्रमुख यासीन मलिक के आवास पर भी तलाशी ली गई है। इसके अलावा, अन्य छापे JKLF के पूर्व कमांडरों और संदिग्ध सहयोगियों के ठिकानों पर डाले गए हैं।

SIA को सौंपी गई थी जांच, मिले नए सुराग

यह मामला 2023 में स्पेशल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (SIA) को सौंपा गया था। अब जाकर मामले में सक्रियता दिखाई गई है। अधिकारियों का कहना है कि छापेमारी के दौरान कुछ महत्वपूर्ण सबूत हाथ लगे हैं, जो आतंकवादी साजिश को बेनकाब कर सकते हैं। इससे न केवल सरला भट्ट को न्याय मिल सकता है, बल्कि उन परिवारों को भी उम्मीद मिलेगी जो आतंकवाद के दौर में अपने परिजनों को खो चुके हैं।

बहादुरी की कीमत चुकाई सरला ने

पुलिस का मानना है कि सरला भट्ट ने आतंकियों के आदेश के खिलाफ आवाज उठाई थी। उन्होंने पंडित कर्मचारियों से सरकारी नौकरियां छोड़ने और कश्मीर छोड़ने के फरमान का विरोध किया था। उन्होंने JKLF की धमकियों को चुनौती दी, जो उनकी हत्या की वजह बनी। दुखद यह भी है कि उनके परिवार को अंत्येष्टि के समय भी धमकियां मिलीं और स्थानीय लोगों ने शवयात्रा में शामिल होने से इनकार कर दिया था।

33 साल बाद, सरला भट्ट की हत्या के मामले में एक बार फिर न्याय की उम्मीद जगी है। जिस मामले को वर्षों तक दबा दिया गया, अब उसके पर्दे उठने लगे हैं। SIA की यह कार्रवाई केवल एक केस की जांच नहीं, बल्कि न्याय के प्रति समाज की जिम्मेदारी और आतंकवाद के खिलाफ एक मजबूत संदेश है। अब नज़र इस पर टिकी है कि क्या इस जांच से सरला को न्याय और देश को सच मिलेगा।

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