CM Himanta Biswa Sarma : असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने सोमवार को एक बड़ा और तीखा बयान देते हुए कहा कि देश के कुछ हिस्सों से “अजीबोगरीब” और “कट्टरपंथी” लोग असम में घुसने की कोशिश कर रहे हैं। सरमा ने आरोप लगाया कि ये लोग खासतौर पर मुंबई और केरल के वकील हैं, जो पूर्व में एनआरसी प्रक्रिया को बिगाड़ने में भी शामिल रहे हैं। मुख्यमंत्री ने साफ कहा कि अगर ऐसे लोग असम की सीमा पार करते हैं तो उन्हें गिरफ्तार किया जाएगा।

एनआरसी में गड़बड़ी का आरोप
गुवाहाटी मेडिकल कॉलेज अस्पताल (GMC) में मीडिया से बातचीत करते हुए सरमा ने कहा: “ये लोग पहले भी एनआरसी के वक्त असम आए थे और उन्होंने जानबूझकर फर्जी दस्तावेजों और झूठे संबंधों के ज़रिए पूरी प्रक्रिया को कमजोर किया।” मुख्यमंत्री का आरोप है कि इन लोगों ने राज्य के निवासियों के झूठे रिश्तेदार बना कर अपात्र लोगों के नाम एनआरसी सूची में शामिल करवाए। उन्होंने इस साजिश के पीछे सामाजिक कार्यकर्ता हर्ष मंदर का नाम भी लिया और कहा कि इस पूरे मामले को अब सुप्रीम कोर्ट में पेश किया जाएगा।

“कट्टरपंथियों को नहीं मिलेगा स्थान”
मुख्यमंत्री सरमा ने दो टूक कहा कि राज्य सरकार किसी भी कट्टरपंथी गतिविधि या संवेदनशील मुद्दों पर राजनीति को बर्दाश्त नहीं करेगी।“चाहे वे दिल्ली से हों, केरल से या मुंबई से अगर वे राज्य की शांति भंग करने आएंगे, तो हम कड़ी कार्रवाई करेंगे।” इस प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान सरमा ने गुवाहाटी मेडिकल कॉलेज अस्पताल (GMC) में चार दिन के नवजात की दर्दनाक मौत पर भी प्रतिक्रिया दी। बच्चा नवजात ICU में एक मेडिकल इक्विपमेंट के तारों से लटका पाया गया था।परिजनों ने अस्पताल स्टाफ पर लापरवाही का आरोप लगाया है, जिसके बाद मुख्यमंत्री ने घटना की गंभीरता से जांच करने के निर्देश दिए। “यह लापरवाही का बेहद गंभीर मामला है। एक जांच समिति गठित कर दी गई है और जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी,” — CM सरमा
मुख्यमंत्री सरमा के इन बयानों ने राज्य की सुरक्षा, एनआरसी की पारदर्शिता और प्रशासनिक जवाबदेही को लेकर एक बार फिर बहस छेड़ दी है। वहीं, GMC में नवजात की मौत पर सरकार की तत्परता भी प्रशासनिक सजगता को दर्शाती है। आने वाले दिनों में सुप्रीम कोर्ट में पेश होने वाले दस्तावेज और जांच समिति की रिपोर्ट से कई नए खुलासे होने की संभावना है।










