Shubhanshu Shukla : गगनयान मिशन में शामिल होंगे शुभांशु शुक्ला, एक्सियम मिशन के जरिए अंतरिक्ष में बिताए दो हफ्ते

Shubhanshu Shukla : भारत के महत्वाकांक्षी मानव अंतरिक्ष मिशन गगनयान की तैयारियों को एक नई दिशा मिली है। भारतीय वायुसेना के ग्रुप कैप्टन और एस्ट्रोनॉट शुभांशु शुक्ला ने हाल ही में एक्सियम मिशन के तहत इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) में दो सप्ताह बिताए। इस मिशन में वे मिशन पायलट और कमांडर की भूमिका में थे, जहां उन्होंने अंतरिक्ष में वैज्ञानिक प्रयोगों से लेकर सिस्टम कमांडिंग तक कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं।

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अंतरिक्ष में दो हफ्तों का अनुभव

शुभांशु शुक्ला ने बताया कि ISS में रहते हुए उन्होंने और उनकी टीम ने कई वैज्ञानिक एक्सपेरिमेंट, तस्वीरें और तकनीकी अभ्यास किए। इस अनुभव के लिए उन्होंने अमेरिका और यूरोप में कई महीनों की गहन ट्रेनिंग ली थी। उनका कहना है कि यह अनुभव “अलग और अविश्वसनीय” था, जो उन्हें गगनयान मिशन के लिए तैयार करेगा।

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क्या है गगनयान मिशन?

गगनयान मिशन भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) का पहला मानव अंतरिक्ष मिशन है। मिशन के तहत 2027 में भारतीय वायुसेना के तीन पायलटों को अंतरिक्ष में भेजा जाएगा। ये पायलट 400 किलोमीटर की ऑर्बिट पर करीब तीन दिन बिताएंगे, जिसके बाद उनकी स्पेसक्राफ्ट हिंद महासागर में लैंड करेगी।

इस ऐतिहासिक मिशन की लागत लगभग ₹20,193 करोड़ आंकी गई है। अभी तक वायुसेना के चार पायलट्स का चयन हो चुका है, जिनमें शुभांशु शुक्ला भी शामिल हैं।

मिशन की तैयारी और चरण

गगनयान मिशन से पहले ISRO तीन टेस्ट फ्लाइट्स भेजेगा:

दो अनमैन्ड (बिना मानव के) टेस्ट फ्लाइट

एक रोबोटिक मिशन, जिसमें अंतरिक्ष यान में रोबोट भेजा जाएगा।

इनकी सफलता के बाद चौथी उड़ान में मानव को अंतरिक्ष में भेजा जाएगा।

ISRO की पहली टेस्ट फ्लाइट 2025 के अंत तक लॉन्च की जा सकती है।

गगनयान से भारत को क्या मिलेगा?

गगनयान सिर्फ एक मिशन नहीं, बल्कि भारत के लिए स्पेस इंडस्ट्री में एक बड़ा कदम है। इससे देश को कई रणनीतिक और आर्थिक फायदे होंगे: भारत रूस, अमेरिका और चीन के बाद चौथा देश बनेगा जो अपने दम पर इंसान को अंतरिक्ष में भेजेगा।स्पेस इकोनॉमी, जो 2035 तक $1.8 ट्रिलियन (154 लाख करोड़ रुपये) तक पहुंच सकती है, उसमें भारत की हिस्सेदारी बढ़ेगी।इससे रिसर्च, डेवलपमेंट और रोजगार के नए अवसर खुलेंगे।भारत को अपना स्पेस स्टेशन बनाने की दिशा में मदद मिलेगी।अंतरराष्ट्रीय सहयोग और विदेशी निवेश को बढ़ावा मिलेगा।

शुभांशु शुक्ला का अंतरिक्ष में दो सप्ताह का अनुभव भारत के गगनयान मिशन की सफलता की दिशा में बड़ा कदम है। भारत की अंतरिक्ष यात्रा अब केवल चंद्रमा या मंगल की कक्षा तक सीमित नहीं रही, बल्कि इंसान को अंतरिक्ष में भेजने के मिशन के साथ एक नया इतिहास रचने जा रहा है।

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