India China relations : पूर्व थलसेनाध्यक्ष जनरल एम. एम. नरवणे ने कहा है कि भारत और चीन के बीच रिश्तों में सुधार की संभावनाएं हैं, लेकिन इसके लिए दोनों देशों की राजनीतिक, कूटनीतिक और सैन्य इच्छाशक्ति जरूरी है। उन्होंने उम्मीद जताई कि चीन भारत की सद्भावना का जवाब सकारात्मक रूप में देगा। “सरहद नहीं, सिर्फ सीमा है – जिससे समझौता संभव” दिल्ली में गुरुवार शाम एक सार्वजनिक कार्यक्रम में जनरल नरवणे ने कहा, “यह एक सीमा है, सरहद नहीं, जो बातचीत के लिए खुली है और जिसमें समझौता संभव है।”

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भारत और चीन के बीच सीमा विवाद को सुलझाने के लिए कई सकारात्मक कदम उठाए गए हैं, जिनमें सीमा पर शांति बनाए रखना, व्यापारिक रिश्तों को दोबारा शुरू करना और डायरेक्ट फ्लाइट्स बहाल करना शामिल है।

हाल की कूटनीतिक पहलें और वार्ताएं
जनरल नरवणे की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने भारत दौरे पर आकर विदेश मंत्री एस. जयशंकर, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल, और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। दोनों देशों ने मिलकर सीमा पर स्थायित्व और सहयोग को बढ़ाने के लिए दूरदर्शी घोषणाएं की हैं। इस कूटनीतिक पहल का उद्देश्य सीमा पर तनाव कम करना, व्यापार और निवेश को प्रोत्साहन देना और द्विपक्षीय विश्वास को दोबारा स्थापित करना है।
“भारत-चीन संबंध सदियों पुराने हैं”
जनरल नरवणे ने कहा कि भारत और चीन के संबंधों का इतिहास सैकड़ों साल पुराना है, जबकि पिछले 60-70 साल का कालखंड महज एक छोटा हिस्सा है। “1962 का युद्ध एक गंभीर मोड़ था, लेकिन ऐसे उतार-चढ़ाव अंतरराष्ट्रीय संबंधों में सामान्य होते हैं,” उन्होंने कहा।
पीएम मोदी के बयान का समर्थन
जनरल नरवणे ने प्रधानमंत्री मोदी के 2024 में दिए गए एक साक्षात्कार का हवाला देते हुए कहा कि “सीमा विवाद को जल्द सुलझाना जरूरी है ताकि असामान्यता समाप्त हो और द्विपक्षीय संबंध सामान्य स्थिति में लौटें।” उन्होंने 2005 में भारत और चीन के बीच हुए राजनीतिक और मार्गदर्शक सिद्धांतों के समझौते का भी जिक्र किया, जो सीमा विवाद के हल की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास था।
जनरल नरवणे की पृष्ठभूमि
जनरल एम. एम. नरवणे दिसंबर 2019 में 28वें थलसेनाध्यक्ष बने थे और उन्होंने अप्रैल 2022 में चार दशकों की सेवा के बाद सेवानिवृत्ति ली। अपनी सेवा के दौरान उन्होंने पूर्वी लद्दाख तनाव, डोकलाम, और कई सामरिक मोर्चों पर निर्णायक भूमिका निभाई। भारत और चीन के बीच लंबे समय से चले आ रहे सीमा विवाद को लेकर अब एक नई आशा की किरण दिखाई दे रही है। जनरल नरवणे की यह टिप्पणी दर्शाती है कि सैन्य नेतृत्व भी शांतिपूर्ण समाधान के पक्ष में है। आने वाले महीनों में दोनों देशों के बीच राजनीतिक और सैन्य स्तर की बातचीत पर विशेष नज़र रहेगी।
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