West Bengal election: पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनावों से पहले चुनाव आयोग द्वारा बूथों की संख्या बढ़ाने को लेकर राजनीतिक तापमान तेजी से बढ़ गया है। राज्य में अब 80,000 से बढ़कर लगभग 94,000 मतदान केंद्र हो जाएंगे। आयोग का तर्क है कि अब हर बूथ पर अधिकतम 1500 की बजाय 1200 मतदाता होंगे, जिससे मतदान प्रक्रिया सुगम और व्यवस्थित होगी। लेकिन इस फैसले ने सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (TMC) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के बीच तीखा सियासी टकराव खड़ा कर दिया है।

टीएमसी का समर्थन और साथ ही ऐतराज
मुख्य चुनाव अधिकारी (सीईओ) मनोज अग्रवाल की अध्यक्षता में कोलकाता में हुई सर्वदलीय बैठक में टीएमसी ने बूथ वृद्धि के फैसले का स्वागत तो किया, लेकिन साथ ही कई चिंताएं भी जताईं। राज्य मंत्री अरूप विश्वास ने कहा, “हमने सुझाव दिया है कि अतिरिक्त बूथ उसी पोलिंग स्टेशन परिसर में बनाए जाएं, ताकि मतदाताओं को दो किलोमीटर दूर न जाना पड़े।” उन्होंने साथ ही चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए कहा, “अगर रेफरी निष्पक्ष नहीं होगा, तो खेल कैसे निष्पक्ष होगा?”

वोटर लिस्ट से नाम हटाने के आरोप
टीएमसी नेताओं ने यह भी आरोप लगाया कि आयोग “विशेष गहन पुनरीक्षण” के नाम पर बड़े पैमाने पर वोटर लिस्ट से नाम हटाने की साजिश कर रहा है। टीएमसी सांसद पार्थ भौमिक ने आशंका जताई कि यह प्रक्रिया एक खास राजनीतिक एजेंडे के तहत चलाई जा रही है।
वहीं, भाजपा नेता शिशिर बजोरिया ने भी सीईओ कार्यालय की निष्पक्षता पर सवाल उठाए और कहा कि राज्य के 40% बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) अस्थायी हैं और उनका संबंध राज्य सरकार से है, जिससे निष्पक्षता प्रभावित हो सकती है।
ममता बनर्जी का सीधा हमला
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस मुद्दे पर खुलकर प्रतिक्रिया दी और आरोप लगाया कि भाजपा, चुनाव आयोग के जरिए लोगों का मताधिकार छीनने की कोशिश कर रही है। उन्होंने दावा किया कि भाजपा ने दूसरे राज्यों से 500 से अधिक टीमें भेजी हैं, जो बंगाल में वोटर लिस्ट से नाम हटाने के मकसद से सर्वे कर रही हैं।
टीएमसीपी (तृणमूल छात्र परिषद) के स्थापना दिवस पर ममता ने लोगों से अपील की, “आप सभी अपने वोटर लिस्ट में नाम की जांच करें। जब तक मैं जिंदा हूं, किसी को भी आपका मताधिकार नहीं छीनने दूंगी।”
भाषायी राजनीति और ऐतिहासिक पहचान पर भी हमला
ममता बनर्जी ने भाजपा पर भाषायी आतंक फैलाने और बंगालियों की ऐतिहासिक भूमिका को मिटाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, “अगर बंगाली भाषा नहीं होती, तो राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत किस भाषा में लिखे जाते? हम बंगाल की अस्मिता पर हमला नहीं सहेंगे।”
पश्चिम बंगाल में चुनावी तैयारियों के तहत बूथों की संख्या में बढ़ोतरी प्रशासनिक निर्णय हो सकता है, लेकिन इसके राजनीतिक निहितार्थ साफ नजर आ रहे हैं। टीएमसी और भाजपा दोनों ही पक्ष इस मुद्दे को चुनावी हथियार के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं। आने वाले महीनों में यह मुद्दा राज्य की राजनीति का केंद्र बिंदु बन सकता है।
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