Jagdeep Dhankhar : हाल ही में उपराष्ट्रपति पद से इस्तीफा देने वाले जगदीप धनखड़ फिर से चर्चा में आ गए हैं। इस बार उनका नाम इसलिए सामने आया है क्योंकि उन्होंने राजस्थान विधानसभा से पेंशन के लिए आवेदन किया है। यह आवेदन उनके उस राजनीतिक करियर की वजह से दिया गया है, जिसमें वे 1993 में राजस्थान की किशनगढ़ विधानसभा सीट से विधायक रहे हैं।

जगदीप धनखड़ का राजनीतिक सफर
जगदीप धनखड़ ने 1989 से 1991 तक राजस्थान के झुंझुनू लोकसभा क्षेत्र से जनता दल के टिकट पर 9वीं लोकसभा में सांसद के रूप में अपनी सेवाएं दीं। इसके बाद वे 1993 में राजस्थान विधानसभा के 10वें सदन के सदस्य चुने गए। इसके साथ ही उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर की सरकार में संसदीय कार्य मंत्री के रूप में भी कार्य किया।

साल 2019 में, 20 जुलाई को उन्हें पश्चिम बंगाल का राज्यपाल नियुक्त किया गया था। इस पद पर रहते हुए उनकी लोकप्रियता बढ़ी और वे भारतीय राजनीति में एक महत्वपूर्ण हस्ती बने।
पेंशन के लिए आवेदन और प्रक्रिया
राजस्थान विधानसभा के नियमों के अनुसार, विधायक और सांसद के रूप में सेवा देने वाले पूर्व नेताओं को पेंशन का अधिकार होता है। इसी के तहत जगदीप धनखड़ ने विधानसभा से पेंशन के लिए आवेदन किया है। राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने उनके आवेदन की पुष्टि करते हुए कहा है कि आवेदन पर प्रक्रिया जारी है।
इंडिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार, धनखड़ को राजस्थान विधानसभा से लगभग 42 हजार रुपये मासिक पेंशन मिलने की संभावना है। राजस्थान में दोहरी और तिहरी पेंशन का प्रावधान है, जिसका अर्थ है कि यदि कोई व्यक्ति एक साथ सांसद और विधायक दोनों रहा हो तो उसे दोनों पदों के लिए अलग-अलग पेंशन मिलती है।
उपराष्ट्रपति पद से इस्तीफा और बाद की स्थिति
धनखड़ ने मानसून सत्र के बीच 21 जुलाई 2025 को उपराष्ट्रपति पद से इस्तीफा दे दिया था। उन्होंने अपने खराब स्वास्थ्य को इस्तीफे का कारण बताया था। इस इस्तीफे ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी थी, और विपक्ष ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा था।
इस्तीफा देने के बाद से धनखड़ किसी सार्वजनिक कार्यक्रम में नहीं दिखे हैं, जिससे उनके स्वास्थ्य को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं। जगदीप धनखड़ का पेंशन के लिए आवेदन उनके राजनीतिक सफर की एक महत्वपूर्ण पड़ाव है। यह कदम उनके लंबे राजनीतिक करियर का प्रमाण भी है, जिसमें उन्होंने विधायक, सांसद और राज्यपाल जैसे कई अहम पद संभाले। उनके इस्तीफे और वर्तमान स्थिति पर राजनीतिक दलों की नजर बनी हुई है।










