Karakoram Highway Attack: पाकिस्तान के गिलगित-बाल्टिस्तान क्षेत्र में शुक्रवार को हुए आतंकी हमले ने एक बार फिर से क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। यह हमला काराकोरम राजमार्ग पर स्थित एक सुरक्षा जांच चौकी पर हुआ, जिसमें दो जवान शहीद हो गए और एक गंभीर रूप से घायल हो गया है।

हमला कब और कहां हुआ?
यह गोलीबारी की घटना चिलास के पास डायमर जिले में स्थित एक चेकपोस्ट पर हुई, जो वर्ष 2023 में बनाया गया था। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, हमला शुक्रवार सुबह अज्ञात बंदूकधारियों द्वारा किया गया।

लिस अधीक्षक अब्दुल हमीद ने पुष्टि की कि हमले में तीन जवान घायल हुए, जिनमें से दो की मौत इलाज के दौरान हो गई, जबकि एक जवान का इलाज जारी है। घायल जवान के पेट में गंभीर चोटें आई हैं।
गोलीबारी के बाद सुरक्षा बढ़ाई गई
हमले के बाद घटनास्थल से दो ग्रेनेड और 17 गोलियों के निशान बरामद किए गए हैं। फिलहाल किसी भी आतंकी संगठन ने हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है, जिससे सुरक्षा एजेंसियों की चिंता और बढ़ गई है।
इलाके में सुरक्षा बलों का व्यापक तलाशी अभियान जारी है और अतिरिक्त पुलिस तथा सेना बलों को तैनात किया गया है। पूरे क्षेत्र को हाई अलर्ट पर रखा गया है।
पहले भी हो चुके हैं हमले
गौरतलब है कि यह पहला हमला नहीं है। पिछले वर्ष इसी क्षेत्र में एक यात्री बस पर भी हमला हुआ था, जिसमें 9 लोगों की मौत और 21 से अधिक घायल हुए थे। इन लगातार हो रहे हमलों ने काराकोरम राजमार्ग और आसपास के क्षेत्रों में यात्रा को खतरनाक बना दिया है।
भारत-पाक वार्ता के संदर्भ में बढ़ती संवेदनशीलता
यह हमला ऐसे समय पर हुआ है जब पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार ने हाल ही में भारत से बातचीत की इच्छा जाहिर की है। हालांकि, भारत ने साफ कर दिया है कि पाकिस्तान के साथ बातचीत सिर्फ पीओके (PoK) और आतंकवाद जैसे मुद्दों तक सीमित रहेगी।
हमले के बाद भारत-पाकिस्तान संबंधों में एक बार फिर सावधानी और सतर्कता का माहौल बन गया है, खासकर ऐसे समय में जब सीमा पार आतंकी गतिविधियां बढ़ती जा रही हैं। गिलगित-बाल्टिस्तान में हुए इस आतंकी हमले ने क्षेत्र की नाजुक सुरक्षा स्थिति को उजागर कर दिया है। लगातार हो रहे हमलों से आम नागरिकों और सुरक्षाकर्मियों दोनों की जान खतरे में है। आने वाले दिनों में इस क्षेत्र में सुरक्षा को और अधिक मजबूत करने की आवश्यकता है।
भारत के लिए यह हमला इस बात का संकेत भी है कि जब तक आतंकवाद पर सख्ती से कार्रवाई नहीं होती, तब तक द्विपक्षीय वार्ता का कोई औचित्य नहीं है।
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