Bhupesh Baghel: छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने हाल ही में हुए एक सनसनीखेज मामले पर सवाल उठाए हैं, जिसमें कैदियों को बिना कोर्ट की अनुमति के जेल से बाहर लाकर काम कराया गया और बाद में वे फरार हो गए। बघेल ने इस पूरे मामले में गृह मंत्री और जेल मंत्री की भूमिका पर संदेह जताते हुए मामले की न्यायिक जांच की मांग की है।

कैदी को जेल से बाहर लाने का अधिकार किसके पास था?
भूपेश बघेल ने एक प्रेस वार्ता के दौरान सवाल उठाते हुए पूछा कि बिना कोर्ट की अनुमति के कैदी को जेल से बाहर किस अधिकार के तहत लाया गया? उनका कहना था कि यह एक गंभीर मामला है, और यह स्पष्ट है कि यह कार्रवाई बिना किसी उचित कानूनी प्रक्रिया के की गई। बघेल ने आरोप लगाया कि इस मामले में अधिकारियों और मंत्रियों की संलिप्तता हो सकती है, और इसलिए इसकी जांच होना आवश्यक है।


गृह मंत्री की भूमिका पर सवाल उठाए
भूपेश बघेल ने आगे कहा कि गृह मंत्री के निर्देश पर कैदियों से काम कराने का आदेश किसने दिया था? उन्होंने इस बात पर सवाल उठाया कि क्या गृह मंत्री और जेल मंत्री के दफ्तर में इस तरह की गतिविधियों का संचालन हो रहा था। बघेल ने कहा कि इस तरह के मामलों में गृह मंत्री की भूमिका की स्पष्टता आनी चाहिए और उन्हें इस पर जवाब देना चाहिए।
कैदी के फरार होने की जिम्मेदारी और कार्रवाई पर सवाल
भूपेश बघेल ने यह भी सवाल किया कि कैदी के फरार होने की जिम्मेदारी किसकी है और अब तक क्या कार्रवाई की गई है? बघेल ने आरोप लगाया कि प्रशासन इस पूरे मामले को दबाने की कोशिश कर रहा है और कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं। उन्होंने मांग की कि इस घटना के संदर्भ में दोषी अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए।
न्यायिक जांच की मांग
भूपेश बघेल ने इस घटना को सामान्य नहीं माना और कहा कि इसमें गृहमंत्री और जेल मंत्री की संलिप्तता साफ नजर आ रही है। उन्होंने मामले की निष्पक्ष जांच के लिए उच्च न्यायालय के सिटिंग जज से जांच कराए जाने की मांग की। उनका कहना था कि अगर मामले की निष्पक्ष जांच नहीं की जाती तो यह प्रशासनिक भ्रष्टाचार और अनियमितताओं को बढ़ावा देगा।
बघेल का यह आरोप छत्तीसगढ़ में एक बड़े प्रशासनिक संकट को उजागर करता है, जिसमें कैदियों को जेल से बाहर लाकर मजदूरी कराने और फिर फरार होने की घटना से सवाल उठ रहे हैं। राज्य सरकार ने इस मामले में न्यायिक जांच की मांग की है, ताकि दोषियों को सजा दिलाई जा सके और प्रशासन की कार्यप्रणाली को पारदर्शी बनाया जा सके।
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