Ukraine Conflict India Role: भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने गुरुवार को यूक्रेन के कार्यवाहक विदेश मंत्री आंद्रेई सिबिहा से टेलीफोन पर वार्ता की। इस महत्वपूर्ण बातचीत में दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय सहयोग और यूक्रेन-रूस संघर्ष को समाप्त करने के प्रयासों पर विचार-विमर्श किया। जयशंकर ने स्पष्ट किया कि भारत इस संघर्ष के शीघ्र और शांतिपूर्ण समाधान का समर्थन करता है।

भारत की पहल: “स्थायी शांति” की वकालत
बातचीत के बाद जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा, “हमारे द्विपक्षीय सहयोग के साथ-साथ यूक्रेन संघर्ष पर भी चर्चा हुई। भारत इस संघर्ष को जल्द खत्म करने और स्थायी शांति की स्थापना का समर्थन करता है।” भारत की यह प्रतिक्रिया ऐसे समय में आई है जब वैश्विक मंचों पर यूक्रेन युद्ध को लेकर फिर से सक्रिय कूटनीतिक चर्चाएं हो रही हैं। भारत ने हमेशा यह रुख अपनाया है कि संवाद और कूटनीति के ज़रिए ही इस संघर्ष को खत्म किया जाना चाहिए।

यूक्रेन की उम्मीद: भारत की “आधिकारिक आवाज और सक्रिय भूमिका”
यूक्रेन के कार्यवाहक विदेश मंत्री आंद्रेई सिबिहा ने भी बातचीत की पुष्टि करते हुए कहा कि उन्होंने जयशंकर को युद्ध की वर्तमान स्थिति और “न्यायपूर्ण शांति” के लिए यूक्रेन के प्रयासों की जानकारी दी। उन्होंने लिखा “हम युद्ध की पूर्ण समाप्ति और व्यापक अंतरराष्ट्रीय शांति प्रयासों के समर्थन में भारत की आधिकारिक आवाज और सक्रिय भूमिका पर भरोसा करते हैं।”
सिबिहा के इस बयान को विश्लेषकों द्वारा अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की हालिया ‘अमेरिका फर्स्ट’ नीति के जवाब के रूप में भी देखा जा रहा है। ट्रंप के निर्णयों से यूक्रेन और उसके सहयोगी देश असहज महसूस कर रहे हैं, ऐसे में भारत की भूमिका अहम मानी जा रही है।
संयुक्त राष्ट्र महासभा में होगी अहम मुलाकात
दोनों विदेश मंत्रियों ने इस महीने के अंत में संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के उच्च स्तरीय सत्र के दौरान न्यूयॉर्क में मुलाकात पर सहमति जताई है। इस मुलाकात में राजनीतिक वार्ता, आर्थिक सहयोग, तकनीकी आदान-प्रदान और द्विपक्षीय संबंधों को गहराई देने के मुद्दों पर चर्चा होगी।
पुतिन-मोदी वार्ता के बाद आई पहल
यह विकास ऐसे समय में हुआ है जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में एससीओ सम्मेलन के दौरान रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मुलाकात की थी। उस बैठक में पीएम मोदी ने पुतिन से स्पष्ट कहा था कि “भारत यूक्रेन में शांति की दिशा में किए गए सभी प्रयासों का स्वागत करता है। यह मानवता का आह्वान है कि जल्द से जल्द संघर्ष को समाप्त किया जाए।”
भारत ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय मंच पर संतुलित, शांति-समर्थक और मानवता-केन्द्रित दृष्टिकोण प्रस्तुत किया है। जयशंकर-सिबिहा वार्ता न सिर्फ भारत-यूक्रेन संबंधों को नई दिशा देगी, बल्कि वैश्विक कूटनीति में भारत की भूमिका को भी मजबूत बनाएगी।










