Monkey Attack UP: उत्तर प्रदेश में एक ग्रामीण क्षेत्र में दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जिसने पूरे गांव को सदमे में डाल दिया है। सीतापुर के एक गांव में बंदरों के हमले में एक दो महीने के मासूम बच्चे की दर्दनाक मौत हो गई। इस हृदयविदारक घटना ने न सिर्फ ग्रामीणों को झकझोर कर रख दिया है, बल्कि प्रशासन और वन विभाग की लापरवाही को भी उजागर कर दिया है।

बंदरों ने मासूम को बनाया निशाना
पीड़ित परिवार के अनुसार, वे अपने दो माह के बेटे को घर में सुलाकर रोज़मर्रा के काम निपटा रहे थे। तभी बंदरों का एक झुंड घर में घुस आया और मासूम बच्चे पर हमला कर दिया। ग्रामीणों का कहना है कि बंदर बच्चे को नोचने और काटने लगे। इसके बाद उन्होंने उसे घर में रखे पानी से भरे ड्रम में फेंक दिया। जब परिजनों ने बच्चे को बिस्तर पर नहीं पाया, तो उन्होंने पूरे घर में उसकी तलाश शुरू की। अंततः बच्चे का शव ड्रम में तैरता हुआ मिला।

परिजन आनन-फानन में बच्चे को पास के अस्पताल ले गए, लेकिन डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। इस घटना के बाद से पूरे गांव में शोक की लहर है और ग्रामीणों में प्रशासन के प्रति भारी नाराजगी देखने को मिल रही है।
ग्रामीणों का फूटा गुस्सा, प्रशासन पर लगाए गंभीर आरोप
ग्रामीणों का कहना है कि वे पिछले कई महीनों से बंदरों के बढ़ते आतंक की शिकायत वन विभाग और जिला प्रशासन से कर रहे हैं। बावजूद इसके, अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। गांव में पहले भी कई लोग बंदरों के हमले में घायल हो चुके हैं, लेकिन अधिकारियों ने इसे कभी गंभीरता से नहीं लिया।
स्थानीय निवासी रामप्रकाश वर्मा ने बताया, “हमने कई बार लिखित और मौखिक शिकायतें कीं, लेकिन आज तक कोई अधिकारी यहां झांकने नहीं आया। अगर पहले कार्रवाई हुई होती, तो आज ये मासूम जिंदा होता।”
प्रशासन और वन विभाग पर उठे सवाल
यह घटना न सिर्फ एक पारिवारिक त्रासदी है, बल्कि सरकारी तंत्र की उदासीनता का भी कड़वा सच उजागर करती है। ग्रामीणों का कहना है कि वन विभाग ने बंदरों की संख्या नियंत्रित करने और उनके हमलों को रोकने के लिए कोई विशेष अभियान नहीं चलाया है। वहीं, जिला प्रशासन भी इस मुद्दे पर चुप्पी साधे बैठा है।
लोगों की मांग: तुरंत कार्रवाई हो
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि बंदरों के हमले को रोकने के लिए तत्काल ठोस कदम उठाए जाएं। क्षेत्र में वन विभाग की विशेष टीम भेजी जाए जो बंदरों को पकड़कर आबादी से दूर जंगलों में छोड़े। इसके अलावा ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो, इसके लिए सुरक्षा उपाय किए जाएं।
सीतापुर की यह घटना मानव और वन्य जीवों के बीच बिगड़ते संतुलन की एक गंभीर चेतावनी है। अगर समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, तो भविष्य में ऐसी दर्दनाक घटनाएं दोहराई जा सकती हैं। शासन और प्रशासन को अब जागने की जरूरत है, ताकि और किसी परिवार को अपने बच्चे की मौत का दुख न सहना पड़े।










