Yograj Singh on Dhoni: भारतीय क्रिकेट से जुड़े विवादों में एक बार फिर से पूर्व क्रिकेटर और युवराज सिंह के पिता योगराज सिंह का नाम सामने आया है। उन्होंने एक ताजा बयान में एक बार फिर एमएस धोनी और कुछ अन्य भारतीय खिलाड़ियों पर निशाना साधते हुए कई गंभीर आरोप लगाए हैं। योगराज का दावा है कि युवराज सिंह को जानबूझकर टीम से बाहर किया गया और उन्हें समय से पहले संन्यास लेने के लिए मजबूर किया गया।

एमएस धोनी पर फिर उठी ऊंगली
अपने तीखे बयानों के लिए चर्चित योगराज सिंह ने एक इंटरव्यू में कहा “सफलता, शोहरत और पैसे की दुनिया में कोई दोस्त नहीं होता। वहां सिर्फ पीठ में छुरा घोंपने वाले लोग होते हैं। एमएस धोनी और कई अन्य खिलाड़ियों को डर था कि युवराज उनकी जगह ले लेंगे, इसलिए उन्होंने उसके खिलाफ साजिशें रचीं।” योगराज यहीं नहीं रुके, उन्होंने यह भी कहा कि सचिन तेंदुलकर को छोड़कर युवराज का टीम इंडिया में कोई सच्चा दोस्त नहीं था।

युवराज सिंह का करियर रहा शानदार
योगराज सिंह के इन बयानों ने भले ही विवाद को जन्म दिया हो, लेकिन यह undeniable है कि युवराज सिंह भारतीय क्रिकेट के सबसे प्रतिभाशाली खिलाड़ियों में से एक रहे हैं। उन्होंने 2000 से 2017 तक भारत के लिए खेलते हुए 402 अंतरराष्ट्रीय मैचों में 11,178 रन बनाए। इसमें 17 शतक और 71 अर्धशतक शामिल हैं। सबसे यादगार प्रदर्शन रहा 2011 वर्ल्ड कप, जहां युवराज ने प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट का खिताब जीता। उन्होंने 362 रन बनाने के साथ-साथ 15 विकेट भी लिए एक ऑलराउंडर के तौर पर यह प्रदर्शन ऐतिहासिक माना जाता है।
योगराज का इतिहास रहा है विवादों से भरा
यह पहली बार नहीं है जब योगराज सिंह ने एमएस धोनी या अन्य भारतीय खिलाड़ियों पर निशाना साधा हो। पूर्व में भी वे कई बार यह आरोप लगाते रहे हैं कि युवराज के साथ पक्षपात किया गया। हालांकि, भारतीय क्रिकेट बोर्ड (BCCI) या युवराज सिंह ने इन बयानों को कभी भी सार्वजनिक रूप से समर्थन नहीं दिया।
एमएस धोनी का रिकॉर्ड
दूसरी ओर, एमएस धोनी को भारतीय क्रिकेट का सबसे सफल कप्तानों में गिना जाता है। उनकी कप्तानी में भारत ने 2007 टी20 वर्ल्ड कप, 2011 वनडे वर्ल्ड कप और 2013 चैंपियंस ट्रॉफी जीती थी। धोनी की कप्तानी में कई युवा खिलाड़ियों को मौका मिला और उन्होंने भारतीय टीम को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया।
योगराज सिंह के हालिया बयानों ने एक बार फिर क्रिकेट जगत में हलचल पैदा कर दी है। हालांकि, यह कहना मुश्किल है कि इनके पीछे कितनी सच्चाई है, क्योंकि युवराज सिंह ने खुद कभी इस तरह की बातों को सार्वजनिक रूप से स्वीकार नहीं किया है। ऐसे में सवाल उठता है कि ये बयान निजी पीड़ा का परिणाम हैं या क्रिकेट सिस्टम पर वाकई कोई सवालिया निशान?











