Manipur Politics 2025: जातीय संघर्षों और राजनीतिक अस्थिरता से जूझ रहे मणिपुर में दो वर्षों के लंबे अंतराल के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दौरे की संभावना जताई जा रही है। अगर सब कुछ योजना के अनुसार चलता है, तो 13 सितंबर 2025 को प्रधानमंत्री मणिपुर की धरती पर कदम रख सकते हैं। इससे पहले वह मिजोरम में एक रेलवे परियोजना का उद्घाटन करेंगे। हालांकि, इस दौरे की अभी तक आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

प्रधानमंत्री का यह संभावित दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब भाजपा को मणिपुर में पार्टी के भीतर बड़ा राजनीतिक झटका लगा है। राज्य के तीन प्रभावशाली नेता—पूर्व विधायक वाई सुरचंद्र सिंह, एल राधाकेश्वर सिंह, और भाजपा के वरिष्ठ नेता उत्तमकुमार निंगथुजम ने पार्टी से इस्तीफा देकर कांग्रेस का दामन थाम लिया है।

कांग्रेस में शामिल हुए भाजपा नेता
इन नेताओं का स्वागत दिल्ली में कांग्रेस मुख्यालय पर किया गया, जहां कांग्रेस के मणिपुर प्रभारी सप्तगिरि शंकर उलाका और राज्य कांग्रेस अध्यक्ष के मेघचंद्र सिंह ने उन्हें पार्टी में शामिल किया। कांग्रेस ने इसे मणिपुर की जनता के भीतर व्याप्त असंतोष और भाजपा सरकार की विफलता का परिणाम बताया। कांग्रेस का दावा है कि यह घटनाक्रम दर्शाता है कि भाजपा की जड़ें मणिपुर में हिल चुकी हैं और राज्य की जनता वैकल्पिक नेतृत्व की तलाश में है।
मणिपुर में जारी संकट की पृष्ठभूमि
मणिपुर मई 2023 से कुकी और मेतेई समुदायों के बीच जारी जातीय संघर्षों की आग में झुलस रहा है। सैकड़ों लोगों की जान जा चुकी है, हजारों विस्थापित हुए हैं और आज भी कई इलाके सुरक्षा बलों के नियंत्रण में हैं।
इन हालातों के बीच, मणिपुर के मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह ने फरवरी 2025 में इस्तीफा दिया और 13 फरवरी को राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू कर दिया गया। इसके बाद से ही विपक्ष और नागरिक समाज बार-बार यह मांग कर रहा था कि प्रधानमंत्री खुद राज्य का दौरा करें और लोगों की पीड़ा को सीधे समझें। प्रधानमंत्री 22 फरवरी 2022 को आखिरी बार मणिपुर आए थे। तब से लेकर अब तक राज्य में राजनीतिक और सामाजिक हालात लगातार बिगड़ते चले गए।
दौरे की संभावनाएं और राजनीतिक अटकलें
सूत्रों के मुताबिक, प्रधानमंत्री इंफाल और दंगा प्रभावित चुराचांदपुर में जनसभाएं कर सकते हैं। यह दौरा न केवल शांति बहाली के प्रयासों को बल देगा, बल्कि आगामी रणनीतिक और राजनीतिक फैसलों की भी दिशा तय कर सकता है।
इस बीच, राज्य में नई सरकार के गठन को लेकर भी अटकलें तेज़ हो गई हैं। भाजपा नेताओं के कांग्रेस में जाने से मौजूदा राजनीतिक समीकरणों में बड़ा बदलाव आ सकता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का प्रस्तावित मणिपुर दौरा राज्य के लिए एक राजनीतिक और सामाजिक रूप से अहम क्षण हो सकता है। हालांकि, भाजपा को दौरे से पहले ही जिन नेताओं के पलायन का सामना करना पड़ा है, वह दर्शाता है कि मणिपुर की राजनीति एक बार फिर नए मोड़ पर खड़ी है। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि प्रधानमंत्री का दौरा जनता की उम्मीदों पर कितना खरा उतरता है।










