Nepal Protests 2025: नेपाल की राजधानी काठमांडू में चल रहे विरोध प्रदर्शनों ने हिंसक रूप ले लिया है। आंदोलन के बीच लुटेरों की घुसपैठ से हालात और बिगड़ गए हैं। नेपाली सेना ने प्रदर्शनकारियों को आगाह करते हुए सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है। सेना की सतर्कता के चलते अब तक 26 संदिग्ध लुटेरे गिरफ्तार किए जा चुके हैं।

काठमांडू में सेना की गश्त, रात 10 बजे से तैनाती
मंगलवार रात से ही काठमांडू की सड़कों पर सेना ने गश्त तेज कर दी है। सेना की तैनाती खास तौर पर उन इलाकों में की गई है, जहां प्रदर्शन के दौरान आगजनी, लूट और तोड़फोड़ की घटनाएं सामने आई हैं। सेना ने साफ किया है कि आंदोलन के नाम पर अराजकता फैलाने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

26 लुटेरे गिरफ्तार, पुलिस के हवाले
नेपाली सेना द्वारा जारी जानकारी के अनुसार, अब तक 26 लुटेरों को गिरफ्तार किया गया है। ये लोग प्रदर्शन के दौरान फैली अफरा-तफरी का फायदा उठाकर लूटपाट में शामिल थे। गिरफ्तारियां काठमांडू और भक्तपुर के विभिन्न हिस्सों से की गई हैं। सभी आरोपियों को आगे की कानूनी कार्रवाई के लिए पुलिस को सौंप दिया गया है।
बंद हुआ हवाई अड्डों का संचालन
सुरक्षा कारणों से नेपाल के सभी हवाई अड्डों पर उड़ान संचालन अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया है। त्रिभुवन इंटरनेशनल एयरपोर्ट सहित अन्य प्रमुख हवाई अड्डों पर सेना ने निगरानी बढ़ा दी है। यात्रियों को पहले से सूचित किया जा रहा है कि वे अनावश्यक यात्रा से बचें।
सेना प्रमुख की अपील: आंदोलन रोको, वार्ता करो
नेपाली सेना प्रमुख जनरल अशोक राज सिग्देल ने प्रदर्शनकारियों से आंदोलन खत्म कर वार्ता का रास्ता अपनाने की अपील की है। मंगलवार देर रात जारी वीडियो संदेश में उन्होंने कहा “प्रदर्शन के दौरान भारी नुकसान हुआ है। अब समय है कि हम सब मिलकर शांति, सुरक्षा और सौहार्द बनाए रखने की दिशा में काम करें। राष्ट्रीय एकता और धरोहरों की रक्षा हमारी जिम्मेदारी है।” उन्होंने स्पष्ट किया कि मौजूदा असहज स्थिति को सामान्य करने, सार्वजनिक और निजी संपत्तियों की रक्षा, आम नागरिकों और राजनयिक संस्थानों की सुरक्षा सुनिश्चित करना सेना की प्राथमिकता है। साथ ही यह भी कहा गया कि सेना आम जनता की सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध है।
नेपाल में जारी हिंसक प्रदर्शनों ने स्थिति को तनावपूर्ण बना दिया है। लुटेरों की सक्रियता ने संकट को और गहरा कर दिया है, लेकिन सेना की सख्ती के चलते हालात पर धीरे-धीरे नियंत्रण किया जा रहा है। ऐसे में अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या प्रदर्शनकारी नेतृत्व वार्ता के प्रस्ताव को स्वीकार करेगा या टकराव की स्थिति और बढ़ेगी।










