Ambikapur News : शिक्षा विभाग में हुए युक्तियुक्तकरण की गड़बड़ियां अब धीरे-धीरे खुलकर सामने आ रही हैं। मनमानी और अनियमितता के आरोपों से घिरे तत्कालीन संभागीय संयुक्त संचालक (JD) हेमंत उपाध्याय को शुक्रवार को निलंबित कर दिया गया है। वहीं, सरगुजा के तत्कालीन जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) अशोक सिन्हा के खिलाफ भी जांच शुरू हो चुकी है। सूत्रों का कहना है कि दोनों अधिकारियों ने नियमों को ताक पर रखकर शिक्षकों की पोस्टिंग मनमाने ढंग से की। काउंसलिंग के कई दिनों बाद तक आदेशों में लगातार संशोधन होते रहे, जिससे पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े हो गए। ऐसे हुई मनमानी और गड़बड़ी अतिशेष शिक्षकों की सूची से बड़े पैमाने पर नाम बाहर रखे गए, जिनमें सुपर 30 के शिक्षकों सहित कार्यालयीन स्टाफ बतौर अटैच किए गए कई शिक्षक भी शामिल थे। कई प्रिंसिपलों से स्कूल में बच्चों की फर्जी संख्या दिखाकर शिक्षकों को अतिशेष सूची से बचाने का दबाव डलवाया गया।वहीं काउंसलिंग पूरी होने के बाद भी एक माह तक आदेशों की बरसात चलती रही, जिससे आर्थिक अनियमितता के आरोप लगे। जिन शिक्षकों का नाम अतिशेष सूची में नहीं था, उनके ऑर्डर सीधे JD और DEO कार्यालय से जारी कर दिए गए। कन्या परिसर जैसे स्कूलों में बिना रिक्त पद के भी शिक्षक पदस्थ कर दिए गए। विषयों का समायोजन भी मनमाने ढंग से हुआ—कहीं रसायन को जीव विज्ञान में एडजस्ट किया गया, तो कहीं नियम लागू ही नहीं किए गए। शिक्षकों का आक्रोश और हाईकोर्ट की चौखट भारी अनियमितताओं से तंग आकर सरगुजा के कई शिक्षक सीधे हाईकोर्ट पहुंचे। इसके बाद राज्य शासन ने जिला व संभागीय स्तर पर समितियां गठित कीं। संभागीय समिति की सुनवाई में अब तक 400 शिक्षकों ने आवेदन दिए, जिनमें से अधिकांश दावे सही पाए गए। अगला निशाना DEO अशोक सिन्हा? जांच की आंच अब पूर्व DEO अशोक सिन्हा तक पहुंच गई है। उनके खिलाफ 11 बिंदुओं पर जवाब तलब किया गया है। माना जा रहा है कि जैसे हेमंत उपाध्याय पर कार्रवाई हुई है, वैसे ही जल्द अशोक सिन्हा पर भी गाज गिर सकती है। सोशल मीडिया पर खुशी की लहर JD हेमंत उपाध्याय के निलंबन की खबर के बाद कई शिक्षकों ने सोशल मीडिया पर राहत और खुशी जताई। यह साफ संकेत है कि युक्तियुक्तकरण की प्रक्रिया में कितनी गंभीर अनियमितताएं हुईं, जिसने सैकड़ों शिक्षकों का भविष्य अधर में डाल दिया। अब सबकी नजरें राज्य सरकार और संभागीय समिति के अंतिम आदेश पर टिकी हैं, जो तय करेंगे कि युक्तियुक्तकरण का यह विवाद कहां जाकर थमेगा।





JD हेमंत उपाध्याय के निलंबन की खबर के बाद कई शिक्षकों ने सोशल मीडिया पर राहत और खुशी जताई। यह साफ संकेत है कि युक्तियुक्तकरण की प्रक्रिया में कितनी गंभीर अनियमितताएं हुईं, जिसने सैकड़ों शिक्षकों का भविष्य अधर में डाल दिया।











