Taliban Attack Pakistan: पाकिस्तान एक बार फिर तालेबानी आतंक का शिकार बना है। शनिवार तड़के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के फक़ीर सराय इलाके में सेना के काफिले पर किए गए भीषण आतंकी हमले में 12 पाकिस्तानी जवानों की मौत हो गई। इस घातक हमले की जिम्मेदारी अफगानिस्तान समर्थित आतंकी संगठन तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) ने ली है।

एएफपी की रिपोर्ट के अनुसार, यह हमला सुबह करीब 4 बजे हुआ, जब सेना का काफिला फक़ीर सराय इलाके से गुजर रहा था। तभी घात लगाए बैठे आतंकियों ने अचानक ताबड़तोड़ गोलियों की बौछार कर दी। हमले के बाद इलाके में अफरातफरी मच गई और देखते ही देखते चारों ओर लाशें बिछ गईं।

हालांकि, हमले के तुरंत बाद पाकिस्तानी सेना और स्थानीय पुलिस मौके पर पहुंच गई, लेकिन तब तक आतंकी घटनास्थल से फरार हो चुके थे। सुरक्षा बलों ने इलाके की घेराबंदी कर सर्च ऑपरेशन शुरू कर दिया है, लेकिन अब तक किसी भी आतंकी की गिरफ्तारी नहीं हो सकी है।
गौरतलब है कि यह पहला मौका नहीं है जब TTP ने पाकिस्तानी सेना को निशाना बनाया हो। इससे पहले जून 2025 में भी उत्तर वज़ीरिस्तान में हुए एक फिदायीन हमले में 16 जवान शहीद हो गए थे।
TTP की बढ़ती चुनौती
TTP, जिसे अफगान तालिबान का समर्थन प्राप्त है, लंबे समय से पाकिस्तान के लिए एक गंभीर सुरक्षा खतरा बना हुआ है। खैबर पख्तूनख्वा, बलूचिस्तान और अन्य सीमावर्ती इलाकों में TTP के आतंकी लगातार पाकिस्तानी सुरक्षा बलों पर हमले करते आ रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि अफगानिस्तान में तालिबान की सत्ता वापसी के बाद TTP की गतिविधियां और अधिक तेज़ हुई हैं। इन हमलों से पाकिस्तान की आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
आर्थिक परियोजनाओं पर भी खतरा
TTP के हमले सिर्फ सैन्य ठिकानों तक सीमित नहीं हैं। चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (CPEC) जैसी महत्वाकांक्षी परियोजनाओं पर भी ये हमले हो चुके हैं। कई बार चीनी अधिकारियों और इंजीनियरों को निशाना बनाया गया है।
इस तरह की घटनाएं पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पर भी नकारात्मक असर डाल रही हैं। निवेशक असुरक्षित माहौल के चलते पीछे हट रहे हैं, जिससे पहले से संकटग्रस्त अर्थव्यवस्था और अधिक दबाव में आ रही है।
फक़ीर सराय में हुआ ताज़ा हमला एक बार फिर यह दर्शाता है कि पाकिस्तान के लिए TTP एक बड़ा खतरा बना हुआ है। जब तक सरकार और सुरक्षा एजेंसियां इस खतरे का सख़्ती से सामना नहीं करतीं, तब तक ऐसे खूनी हमले यूं ही जारी रह सकते हैं।










