Rahul Gandhi Punjab Visit : पंजाब के गुरदासपुर जिले के दीनानगर क्षेत्र में बाढ़ प्रभावित गांवों का दौरा करने पहुंचे कांग्रेस नेता राहुल गांधी को सोमवार को उस समय पुलिस ने रोक दिया जब वे रावी दरिया के दूसरी ओर बसे ग्रामीणों से मिलने की कोशिश कर रहे थे। इस दौरान राहुल गांधी और मौके पर मौजूद प्रशासनिक अधिकारियों के बीच तीखी बहस भी देखने को मिली, जिसका वीडियो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

राहुल गांधी बाढ़ से प्रभावित हुए गांवों की स्थिति का जायजा लेने और पीड़ितों का हालचाल पूछने पहुंचे थे। वह मकोड़ा पतन रावी दरिया क्षेत्र में पहुंचकर स्थानीय लोगों से बातचीत कर रहे थे। लेकिन जब उन्होंने दरिया पार कर दूसरे छोर पर स्थित गांवों में जाने की कोशिश की, तो पुलिस ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए उन्हें रोक लिया।

इस दौरान राहुल गांधी ने मौके पर मौजूद एसपी युगराज सिंह और अन्य अधिकारियों से सवाल किया कि उन्हें पीड़ितों से मिलने से क्यों रोका जा रहा है? उन्होंने कहा, “हम सिर्फ लोगों से मिलने जा रहे हैं, इसमें क्या दिक्कत है?” अधिकारियों ने उन्हें स्थिति की गंभीरता और सुरक्षा जोखिमों की जानकारी दी, लेकिन कांग्रेस नेताओं ने इसे प्रशासन की अवरोधक नीति बताया।
सोशल मीडिया पर बहस का वीडियो वायरल
घटना का एक वीडियो सामने आया है जिसमें राहुल गांधी प्रशासनिक अधिकारियों से बहस करते नजर आ रहे हैं। वीडियो में राहुल गांधी प्रशासन से यह पूछते देखे जा सकते हैं कि आखिर किस आधार पर उन्हें रोका जा रहा है। इस पर अधिकारी उन्हें शांतिपूर्वक समझाने की कोशिश करते रहे।
कांग्रेस नेताओं की तीखी प्रतिक्रिया
इस पूरे घटनाक्रम पर पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी और सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा ने भी तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि प्रशासन का यह रवैया असंवेदनशील है और इससे यह साबित होता है कि सरकार जनता की तकलीफों को छिपाना चाहती है। चन्नी ने कहा, “जब एक जनप्रतिनिधि अपने लोगों का हाल जानना चाहता है, तो उसे रोका जाना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।”
बाढ़ से अब तक 56 मौतें
गौरतलब है कि पिछले दिनों पंजाब में हुई भारी बारिश और नदियों में जलस्तर बढ़ने के कारण कई डैम से पानी छोड़ा गया, जिससे गुरदासपुर, पठानकोट, और होशियारपुर जैसे जिलों में बाढ़ आ गई। अब तक बाढ़ से 56 लोगों की मौत हो चुकी है और दर्जनों गांव बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। राहुल गांधी का यह दौरा भले ही राजनीति से प्रेरित हो या मानवीय दृष्टिकोण से, लेकिन प्रशासन द्वारा उन्हें रोकना कई सवाल खड़े करता है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा वीडियो इस मुद्दे को और ज्यादा गरमाता दिख रहा है। अब देखना होगा कि सरकार इस पर क्या रुख अपनाती है।
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