Ambikapur News : अंबिकापुर के पशु चिकित्सा विभाग में एक गंभीर मामले के बावजूद आरोपी चिकित्सक पर निलंबन की कार्रवाई न होना चर्चा और विवाद का विषय बन गया है। मुर्गी फार्म में पदस्थ पशु चिकित्सक संजीवन टोप्पो, जिन पर एक महिला द्वारा दुष्कर्म का गंभीर आरोप लगाया गया था, एक माह से अधिक समय तक न्यायिक अभिरक्षा में जेल में रहने के बाद हाल ही में जमानत पर रिहा हुए हैं। जेल में लंबा समय बिताने के बावजूद विभाग द्वारा अब तक उन्हें निलंबित न किए जाने से विभागीय कार्यप्रणाली पर कई सवाल खड़े हो रहे हैं। यह स्थिति विभागीय उदासीनता को दर्शाती है, जिससे आम जनता और पीड़ितों के बीच रोष पनप रहा है।

शासकीय सेवा नियमों की अनदेखी का आरोप
विभागीय सूत्रों और प्रशासनिक नियमों के अनुसार, यदि कोई शासकीय अधिकारी या कर्मचारी 48 घंटे से अधिक समय तक पुलिस या न्यायिक हिरासत में रहता है, तो उसे स्वतः ही निलंबित माना जाता है या उसके विरुद्ध तत्काल निलंबन की कार्रवाई की जानी अनिवार्य होती है। इस मामले में आरोपी चिकित्सक ने जेल में लगभग डेढ़ महीने का समय व्यतीत किया है, फिर भी निलंबन का आदेश अब तक जारी नहीं हुआ है। नियमों की इस स्पष्ट अनदेखी ने विभाग की पारदर्शिता और जवाबदेही पर बड़े सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं, जिससे यह प्रतीत होता है कि कहीं न कहीं नियमों के पालन में शिथिलता बरती जा रही है।

उप संचालक लग रहे लापरवाही के आरोप
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार उप संचालक पशु चिकित्सा सेवा डॉ. आरपी शुक्ला ने इसकी त्वरित सूचना कलेक्टर सरगुजा और संचालक को नहीं दी। मामले में विभागीय कार्रवाई अब तक नहीं हो पाने का यही सबसे बड़ा कारण निकल कर आया है। वहीं मामले में लेनदेन कर सूचना छुपाने की चर्चाएं भी विभाग में जोर शोर पर हैं।
मुख्यालय से आदेश की प्रतीक्षा
मामले की गंभीरता को देखते हुए जब उप संचालक पशु चिकित्सा सेवा डॉ. आरपी शुक्ला से इस विषय में जानकारी ली गई, तो उन्होंने स्पष्ट किया कि विभाग की ओर से देरी नहीं की जा रही है। उन्होंने जानकारी देते हुए बताया कि आरोपी चिकित्सक के विरुद्ध निलंबन का प्रस्ताव तैयार कर रायपुर स्थित पशु चिकित्सा सेवा मुख्यालय को काफी पहले ही भेजा जा चुका है।
डॉ. शुक्ला के अनुसार, निलंबन संबंधी अंतिम आदेश मुख्यालय के स्तर से ही जारी किया जाता है और वे अभी उन आदेशों की प्रतीक्षा कर रहे हैं। अब देखना यह है कि प्रशासन के दावों के बावजूद कब तक यह आदेश प्राप्त होता है और विभाग इस गंभीर संवेदनशील मामले पर कितनी तत्परता दिखाता है।
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