Thalapathy Vijay: तमिलनाडु के चर्चित अभिनेता और तमिलगांव मक्कल काची (TVK) पार्टी के प्रमुख थलापति विजय एक बार फिर सियासी विवादों में घिर गए हैं। इस बार उन्होंने राजीव गांधी हत्याकांड के मुख्य साजिशकर्ता और LTTE (लिबरेशन टाइगर्स ऑफ तमिल ईलम) प्रमुख वेलुपिल्लै प्रभाकरण की खुले मंच से तारीफ कर विपक्ष को घेरने का प्रयास किया है।
“प्रभाकरण ने तमिलों को मां की तरह स्नेह दिया” – विजय
एक चुनावी सभा में विजय ने कहा, “प्रभाकरण ने तमिल लोगों को मातृवत स्नेह दिया है। चाहे वे श्रीलंका में हों या तमिलनाडु या दुनिया के किसी और कोने में। तमिलों की आवाज़ उठाना हमारा कर्तव्य है।” यह बयान ऐसे समय में आया है जब तमिलनाडु में अगले विधानसभा चुनाव की सरगर्मी तेज हो चुकी है। थलापति विजय, जो अब फिल्मों से राजनीति की ओर सक्रिय रूप से बढ़ चुके हैं, तमिल अस्मिता और राष्ट्रवाद की भावना को भुनाने की कोशिश कर रहे हैं।
प्रभाकरण: एक संवेदनशील लेकिन विवादास्पद चेहरा
वेलुपिल्लै प्रभाकरण तमिल अलगाववादी संगठन LTTE का संस्थापक था, जिसने श्रीलंका में तमिलों के लिए अलग राष्ट्र “तमिल ईलम” की मांग को लेकर दशकों तक सशस्त्र संघर्ष किया। लेकिन भारत में उसका नाम राजीव गांधी की 1991 में आत्मघाती हमले में हत्या से जुड़ा हुआ है, जिसे LTTE ने अंजाम दिया था। भारत में इसे कभी माफ नहीं किया गया, लेकिन तमिलनाडु के कुछ क्षेत्रों में आज भी प्रभाकरण को “तमिलों का रक्षक” माना जाता है – खासकर सीमावर्ती इलाकों में।
क्यों कर रहे हैं विजय प्रभाकरण की तारीफ?
तमिलनाडु में DMK-कांग्रेस गठबंधन सत्ता में है, और कांग्रेस के लिए प्रभाकरण का नाम बेहद संवेदनशील है क्योंकि वह राजीव गांधी की हत्या से जुड़ा हुआ है। विजय, DMK और कांग्रेस की इसी असहजता को भुनाने की कोशिश कर रहे हैं। विजय तमिल अस्मिता को उभार कर कट्टर तमिल वोट बैंक में पैठ बनाना चाहते हैं।प्रभाकरण का जिक्र कर वह DMK को बैकफुट पर धकेलने की रणनीति अपना रहे हैं। वहीं BJP और AIADMK के खिलाफ सख्त रुख अपना कर, “स्वाभिमानी तमिल नेता” की छवि गढ़ने की कोशिश कर रहे हैं।
BJP और कांग्रेस के लिए चुनौती
जहां एक ओर कांग्रेस इस बयान से असहज है, वहीं BJP के लिए भी यह मसला मुश्किल बन सकता है, क्योंकि केंद्र सरकार हमेशा से LTTE को आतंकी संगठन मानती रही है। DMK प्रमुख एम.के. स्टालिन के लिए यह स्थिति और भी जटिल है क्योंकि वह कांग्रेस के साथ गठबंधन में हैं, और उन्हें न तो खुलकर प्रभाकरण का समर्थन करना है, न ही उसके खिलाफ जाना है।
थलापति विजय का यह बयान केवल एक प्रशंसा नहीं, बल्कि तमिलनाडु की चुनावी राजनीति में एक बड़ी चाल है। तमिल अस्मिता, प्रभाकरण की छवि, और श्रीलंकाई तमिल मुद्दा – ये सब मिलकर एक शक्तिशाली भावनात्मक समीकरण बनाते हैं, जिसे विजय भुनाने की पूरी कोशिश कर रहे हैं।
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Thalapathy Vijay : राजीव गांधी के हत्यारे प्रभाकरण की तारीफ कर फंसे विजय, क्या है तमिलनाडु चुनाव से जुड़ा सियासी गणित?
Thalapathy Vijay: तमिलनाडु के चर्चित अभिनेता और तमिलगांव मक्कल काची (TVK) पार्टी के प्रमुख थलापति विजय एक बार फिर सियासी विवादों में घिर गए हैं। इस बार उन्होंने राजीव गांधी हत्याकांड के मुख्य साजिशकर्ता और LTTE (लिबरेशन टाइगर्स ऑफ तमिल ईलम) प्रमुख वेलुपिल्लै प्रभाकरण की खुले मंच से तारीफ कर विपक्ष को घेरने का प्रयास किया है।
“प्रभाकरण ने तमिलों को मां की तरह स्नेह दिया” – विजय
एक चुनावी सभा में विजय ने कहा, “प्रभाकरण ने तमिल लोगों को मातृवत स्नेह दिया है। चाहे वे श्रीलंका में हों या तमिलनाडु या दुनिया के किसी और कोने में। तमिलों की आवाज़ उठाना हमारा कर्तव्य है।” यह बयान ऐसे समय में आया है जब तमिलनाडु में अगले विधानसभा चुनाव की सरगर्मी तेज हो चुकी है। थलापति विजय, जो अब फिल्मों से राजनीति की ओर सक्रिय रूप से बढ़ चुके हैं, तमिल अस्मिता और राष्ट्रवाद की भावना को भुनाने की कोशिश कर रहे हैं।
प्रभाकरण: एक संवेदनशील लेकिन विवादास्पद चेहरा
वेलुपिल्लै प्रभाकरण तमिल अलगाववादी संगठन LTTE का संस्थापक था, जिसने श्रीलंका में तमिलों के लिए अलग राष्ट्र “तमिल ईलम” की मांग को लेकर दशकों तक सशस्त्र संघर्ष किया। लेकिन भारत में उसका नाम राजीव गांधी की 1991 में आत्मघाती हमले में हत्या से जुड़ा हुआ है, जिसे LTTE ने अंजाम दिया था। भारत में इसे कभी माफ नहीं किया गया, लेकिन तमिलनाडु के कुछ क्षेत्रों में आज भी प्रभाकरण को “तमिलों का रक्षक” माना जाता है – खासकर सीमावर्ती इलाकों में।
क्यों कर रहे हैं विजय प्रभाकरण की तारीफ?
तमिलनाडु में DMK-कांग्रेस गठबंधन सत्ता में है, और कांग्रेस के लिए प्रभाकरण का नाम बेहद संवेदनशील है क्योंकि वह राजीव गांधी की हत्या से जुड़ा हुआ है। विजय, DMK और कांग्रेस की इसी असहजता को भुनाने की कोशिश कर रहे हैं। विजय तमिल अस्मिता को उभार कर कट्टर तमिल वोट बैंक में पैठ बनाना चाहते हैं।प्रभाकरण का जिक्र कर वह DMK को बैकफुट पर धकेलने की रणनीति अपना रहे हैं। वहीं BJP और AIADMK के खिलाफ सख्त रुख अपना कर, “स्वाभिमानी तमिल नेता” की छवि गढ़ने की कोशिश कर रहे हैं।
BJP और कांग्रेस के लिए चुनौती
जहां एक ओर कांग्रेस इस बयान से असहज है, वहीं BJP के लिए भी यह मसला मुश्किल बन सकता है, क्योंकि केंद्र सरकार हमेशा से LTTE को आतंकी संगठन मानती रही है। DMK प्रमुख एम.के. स्टालिन के लिए यह स्थिति और भी जटिल है क्योंकि वह कांग्रेस के साथ गठबंधन में हैं, और उन्हें न तो खुलकर प्रभाकरण का समर्थन करना है, न ही उसके खिलाफ जाना है।
थलापति विजय का यह बयान केवल एक प्रशंसा नहीं, बल्कि तमिलनाडु की चुनावी राजनीति में एक बड़ी चाल है। तमिल अस्मिता, प्रभाकरण की छवि, और श्रीलंकाई तमिल मुद्दा – ये सब मिलकर एक शक्तिशाली भावनात्मक समीकरण बनाते हैं, जिसे विजय भुनाने की पूरी कोशिश कर रहे हैं।
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