Jairam Ramesh CWC: कांग्रेस नेता और पार्टी के वरिष्ठ प्रवक्ता जयराम रमेश ने बिहार की राजनीति में हलचल तेज कर दी है। उन्होंने संकेत दिया है कि राज्य में जल्द ही महागठबंधन की सरकार बन सकती है। रविवार को पटना में आयोजित कांग्रेस कार्यसमिति (CWC) की बैठक के बाद रमेश ने कहा, “सितंबर 2023 में तेलंगाना में भी ऐसी ही CWC की मीटिंग हुई थी और दो महीने के अंदर वहां कांग्रेस की सरकार बन गई। अब पटना में काउंटडाउन शुरू हो चुका है।” उनके इस बयान को बिहार की सियासत में बदलाव के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।

CWC मीटिंग और उसके राजनीतिक मायने
पटना में हुई CWC बैठक को कांग्रेस की रणनीतिक दृष्टि से बेहद अहम माना जा रहा है। इस बैठक में पार्टी के कई दिग्गज नेता शामिल हुए और बिहार में पार्टी के भविष्य की रणनीति पर चर्चा हुई। जयराम रमेश के इस बयान से यह साफ होता है कि कांग्रेस आने वाले चुनावों में महागठबंधन को फिर से मजबूती देने की कोशिश में है।

तेलंगाना का उदाहरण क्यों दिया?
जयराम रमेश ने 2023 में तेलंगाना में हुई CWC बैठक का हवाला देते हुए कहा कि वहां कांग्रेस ने अपनी रणनीति तय की और दो महीने के अंदर ही चुनाव जीतकर सरकार बनाई। उन्होंने पटना बैठक को भी उसी दिशा में एक मजबूत कदम बताया। इससे यह संकेत भी मिला कि कांग्रेस बिहार में JDU-RJD और अन्य विपक्षी दलों के साथ गठजोड़ कर सत्ता में वापसी की योजना बना रही है।
क्या फिर से जेडीयू-कांग्रेस-राजद एक साथ?
बिहार में पिछले एक साल में राजनीतिक समीकरण कई बार बदले हैं। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने एक बार फिर बीजेपी के साथ गठबंधन कर लिया है, जिससे महागठबंधन टूट गया था। लेकिन कांग्रेस नेताओं के हालिया बयानों से यह अनुमान लगाया जा रहा है कि आने वाले चुनावों से पहले एक बार फिर जेडीयू को अलग कर महागठबंधन को पुनर्जीवित करने की रणनीति बन रही है।
कांग्रेस की रणनीति
कांग्रेस बिहार में खुद को एक मजबूत विकल्प के रूप में पेश करना चाहती है। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं का मानना है कि बीजेपी के खिलाफ सभी विपक्षी दलों को एक मंच पर लाना ज़रूरी है। CWC की बैठक में भी यही संदेश देने की कोशिश की गई कि कांग्रेस सिर्फ सहयोगी नहीं, बल्कि नेतृत्वकारी भूमिका में भी आना चाहती है।
जयराम रमेश का “काउंटडाउन शुरू” वाला बयान बिहार की राजनीति में बड़ा संकेत है। यह सिर्फ एक बयान नहीं, बल्कि कांग्रेस की चुनावी तैयारी और रणनीति का हिस्सा है। अब देखना दिलचस्प होगा कि यह बयान महज राजनीतिक उत्साह है या वाकई बिहार की सियासत में एक बार फिर महागठबंधन की वापसी का आग़ाज़।










