Sonia Gandhi Palestine: कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने फिलिस्तीन को लेकर भारत सरकार के रुख की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि “भारत की चुप्पी न सिर्फ मानवता, बल्कि नैतिकता का भी परित्याग है।” उन्होंने यह बात अपने लेख ‘भारत की दबी हुई आवाज, फिलिस्तीन से उसका अलगाव’ में कही, जो हाल ही में द हिंदू में प्रकाशित हुआ।

सोनिया गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विदेश नीति पर सवाल उठाते हुए कहा कि “फिलिस्तीन को लेकर भारत की प्रतिक्रिया व्यक्तिगत कूटनीति से प्रेरित लगती है, न कि हमारे संवैधानिक मूल्यों या दीर्घकालिक रणनीतिक हितों से।”

भारत की ऐतिहासिक भूमिका से पीछे हटने का आरोप
अपने लेख में गांधी ने भारत की ऐतिहासिक विदेश नीति को याद दिलाते हुए कहा कि “भारत ने 1988 में फिलिस्तीनी राज्य को आधिकारिक मान्यता दी थी और दशकों तक फिलिस्तीनी मुक्ति संगठन (PLO) का समर्थन किया। आज वही भारत इस मुद्दे पर अपनी ऐतिहासिक भूमिका से पीछे हटता नजर आ रहा है।”उन्होंने कहा कि 1971 में भारत ने जब बांग्लादेश को जन्म देने वाली कार्रवाई में निर्णायक भूमिका निभाई थी, तब भी उसने मानवाधिकार और न्याय के मूल्यों को प्राथमिकता दी थी। “आज जब फिलिस्तीन नरसंहार का सामना कर रहा है, भारत की चुप्पी खटकती है,” उन्होंने लिखा।
इजराइल-फिलिस्तीन संघर्ष पर तीखी टिप्पणी
गांधी ने कहा कि 7 अक्टूबर 2023 को हमास द्वारा इजराइली नागरिकों पर हमले के बाद इजराइल की सैन्य प्रतिक्रिया “नरसंहार से कम नहीं” रही। उन्होंने दावा किया कि अब तक 65,000 से अधिक फिलिस्तीनी नागरिक मारे जा चुके हैं, जिनमें 17,000 से ज्यादा बच्चे शामिल हैं।उन्होंने कहा कि भारत को इस समय न्याय, सम्मान और मानवाधिकारों की रक्षा के लिए नेतृत्व दिखाने की जरूरत है। “दुनिया के 150 से अधिक देश अब फिलिस्तीन को मान्यता दे चुके हैं, जिनमें फ्रांस, ब्रिटेन, कनाडा, पुर्तगाल और ऑस्ट्रेलिया जैसे देश शामिल हैं,” गांधी ने बताया।
व्यक्तिगत कूटनीति पर निशाना
सोनिया गांधी ने मोदी-नेतन्याहू की करीबी पर सवाल उठाते हुए कहा, “भारत की विदेश नीति किसी एक व्यक्ति की व्यक्तिगत मित्रता या गौरव से संचालित नहीं हो सकती। यह देश के मूल्यों, इतिहास और रणनीतिक हितों पर आधारित होनी चाहिए।”उन्होंने यह भी जोड़ा कि अमेरिका जैसे देशों में भी व्यक्तिगत कूटनीति के प्रयास हाल के महीनों में विफल साबित हुए हैं, जिससे भारत को सीख लेनी चाहिए।
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