Trump 100% Tariff: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर से विवादास्पद निर्णय लेते हुए फार्मा इंडस्ट्री पर 100 प्रतिशत टैरिफ लगाने की घोषणा की है। ट्रंप की इस ‘अमेरिका फर्स्ट’ नीति के तहत किचन कैबिनेट पर 50%, फर्नीचर पर 30% और ट्रकों के आयात पर 25% टैरिफ लगाया गया है। लेकिन सबसे ज्यादा चर्चा का विषय है फार्मास्यूटिकल उत्पादों पर लगाया गया 100% टैरिफ — जिसका सीधा असर भारत सहित दुनिया के टॉप-10 फार्मा एक्सपोर्टिंग देशों पर पड़ेगा। भारत पर पड़ेगा सीधा असर भारत अमेरिका को फार्मा उत्पादों का छठा सबसे बड़ा निर्यातक है। साल 2024 में भारत ने अमेरिका को लगभग 8.73 बिलियन डॉलर (करीब ₹72,000 करोड़) का फार्मा एक्सपोर्ट किया, जो भारत के कुल फार्मा निर्यात का 31% और अमेरिका के फार्मा आयात का 6% हिस्सा है। भारत की ओर से सबसे ज्यादा जेनेरिक दवाएं एक्सपोर्ट की जाती हैं, जो ब्रांडेड या पेटेंट वाली नहीं होतीं। ऐसे में टैरिफ का असर थोड़ी राहत के साथ सीमित नजर आ सकता है, लेकिन यह पूरी तरह टल भी नहीं सकता। डॉ. रेड्डीज़, सन फार्मा और लुपिन जैसी कंपनियां होंगी प्रभावित विशेषज्ञों का मानना है कि भले ही जेनेरिक दवाओं पर टैरिफ का प्रभाव थोड़ा कम हो, लेकिन जिन कंपनियों के पास ब्रांडेड मेडिसिन पोर्टफोलियो है — जैसे डॉ. रेड्डीज़, सन फार्मा, लुपिन, ऑरोबिंदो — उन्हें बड़ा झटका लग सकता है। खासकर कैंसर, डायबिटीज़ और वज़न घटाने वाली दवाइयों की कीमतें दोगुनी तक हो सकती हैं, जिससे अमेरिका में इनकी बिक्री घट सकती है। नतीजतन, भारतीय कंपनियों की कमाई और मुनाफे पर असर पड़ेगा। टैरिफ से कैसे निपटेगी भारतीय फार्मा इंडस्ट्री? इस टैरिफ से बचने और बाजार में प्रतिस्पर्धा बनाए रखने के लिए भारतीय फार्मा कंपनियां अमेरिका में मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स लगाने पर विचार कर सकती हैं। हालांकि, इससे लागत बढ़ेगी, जिससे कंपनियों की बैलेंस शीट पर दबाव आ सकता है। कुछ कंपनियां पहले से ही अमेरिका में मौजूद हैं, लेकिन अब बड़े पैमाने पर निवेश की ज़रूरत पड़ेगी। ट्रंप की ‘अमेरिका फर्स्ट’ नीति और वैश्विक प्रभाव ट्रंप प्रशासन ने यह टैरिफ इसलिए लगाया है क्योंकि अमेरिका को फार्मा सेक्टर में 2024 में 115.5 बिलियन डॉलर का व्यापार घाटा हुआ है। उनका मानना है कि यह घाटा घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देकर और आयात घटाकर कम किया जा सकता है। हालांकि, यह कदम अमेरिकी उपभोक्ताओं के लिए महंगाई बढ़ा सकता है क्योंकि दवाइयों की कीमतों में भारी इजाफा होगा। 100% टैरिफ भले ही जेनेरिक दवाओं पर सीधे लागू न हो, लेकिन भारत की फार्मा इंडस्ट्री को इसकी आर्थिक मार जरूर झेलनी पड़ेगी। बाजार रणनीति में बदलाव, अमेरिका में निवेश, और उत्पादन लागत में वृद्धि जैसी चुनौतियां अब भारतीय फार्मा सेक्टर के सामने हैं। ऐसे में आने वाले महीनों में कंपनियों की बिजनेस रणनीति और शेयर बाजार पर इसका असर दिखना तय है। Read More :Sonam Wangchuk FCRA: FCRA विवाद में घिरे सोनम वांगचुक, केंद्र सरकार ने NGO का रजिस्ट्रेशन रद्द किया, वांगचुक बोले – “मुझे टारगेट किया गया”














