Bihar Election 2025: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की तैयारी जब पूरी गति से चल रही है, तब राजनीति में सियासी जंग भी तेज होती जा रही है। इसी कड़ी में पटना की सड़कों पर जन सुराज पार्टी के संस्थापक और चुनाव रणनीतिकार प्रशांत किशोर (पीके) के खिलाफ विवादित पोस्टर लगाए गए हैं, जो बिहार की राजनीति में नया विवाद खड़ा कर रहे हैं।

विवादित पोस्टरों में क्या लिखा है?
पटना के विभिन्न हिस्सों में लगे इन पोस्टरों में प्रशांत किशोर पर भ्रष्टाचार और जमीन घोटाले जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं। एक पोस्टर में लिखा है,”चारा चोर से भी बड़ा चोर प्रशांत किशोर, जनता से चंदा के नाम पर ठगा पैसा, 32 करोड़ में खरीदी जमीन।”वहीं, दूसरे पोस्टर में उन्हें ‘वितरक जन शराब’ का नेता बताकर भी निशाना बनाया गया है।

पोस्टरों के पीछे कौन?
इन पोस्टरों पर किसी राजनीतिक दल का नाम नहीं लिखा गया है, लेकिन पोस्टर लगाने वालों का दावा है कि ये ‘जनतंत्र मोर्चा’ के हैं। फिलहाल इस बात की पुष्टि नहीं हो सकी है कि इस विवाद के पीछे कौन है, लेकिन ये पोस्टर ऐसे वक्त में सामने आए हैं जब प्रशांत किशोर ने कई बार NDA नेताओं पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए हैं।
https://x.com/i/status/1972545107242135994
प्रशांत किशोर और उनकी छवि पर हमला
प्रशांत किशोर पिछले कुछ समय से बिहार की राजनीति में विपक्ष और सत्ता पक्ष दोनों के लिए अहम फिगर बने हुए हैं। वे बीजेपी और JDU के नेताओं पर लगातार भ्रष्टाचार के आरोप लगाते रहे हैं और अपने ‘जन सुराज’ आंदोलन के जरिए राजनीति में बड़ा असर डालना चाहते हैं। ऐसे में उनके खिलाफ यह विवादित पोस्टर लगाए जाना उनके राजनीतिक करियर के लिए चुनौती साबित हो सकता है।
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यह पोस्टर वार बिहार विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक दलों के बीच सियासी तनाव को और बढ़ाएगा। विपक्ष और समर्थक दोनों ओर से अब इस मुद्दे पर तीखी बयानबाजी होने की संभावना है, जो चुनावी माहौल को और गर्मा देगी।
सोशल मीडिया पर वायरल
पटना में लगे इन पोस्टरों के फोटो और वीडियो तेजी से सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं। लोग इस मुद्दे पर अपनी-अपनी राय दे रहे हैं और चर्चा जोरों पर है। हालांकि, अभी तक प्रशांत किशोर की तरफ से इन पोस्टरों या आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।
चुनाव 2025 की गर्माहट में नई चुनौती
बिहार चुनाव 2025 की घोषणा के साथ ही सभी दल जनता को लुभाने की पूरी कोशिश में लगे हैं। वहीं, पोस्टर वार जैसे विवाद इन चुनावी तैयारियों में राजनीतिक ड्रामा भी बढ़ा रहे हैं। प्रशांत किशोर जैसे राजनीतिक रणनीतिकारों पर लगे आरोप उनकी छवि को प्रभावित कर सकते हैं और आने वाले चुनाव के नतीजों पर भी इसका असर देखने को मिल सकता है।
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