Pawan vs Khesari: बिहार विधानसभा चुनाव जैसे-जैसे नजदीक आ रहे हैं, राज्य की सियासी फिजा में गर्मी बढ़ती जा रही है। इस बार चुनावी मैदान में सिर्फ परंपरागत नेता ही नहीं, बल्कि दो बड़े भोजपुरी सुपरस्टार – पवन सिंह और खेसारी लाल यादव – आमने-सामने नज़र आ रहे हैं। जहां पवन सिंह ने खुलकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) और एनडीए (NDA) का समर्थन किया है, वहीं खेसारी लाल यादव विरोधी खेमा, खासकर राजद (RJD) के समर्थन में खुलकर सामने आ गए हैं।

पवन सिंह का एनडीए समर्थन
भोजपुरी के ‘पावर स्टार’ पवन सिंह लंबे समय से बीजेपी के पक्ष में रुख अपनाए हुए हैं। खबरें हैं कि उन्हें एनडीए गठबंधन की ओर से आरा सीट से उम्मीदवार बनाया जा सकता है। उनका स्टारडम और युवाओं में लोकप्रियता बीजेपी के लिए बड़ा फायदा साबित हो सकता है। पवन सिंह बिहार में विकास, सुरक्षा और केंद्र की कल्याणकारी योजनाओं को चुनावी मुद्दा बना रहे हैं।

खेसारी का वार: “पैसे नहीं, रोजगार चाहिए”
दूसरी ओर, खेसारी लाल यादव ने एनडीए सरकार की नीतियों पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा, “हमें अकाउंट में 10 हजार नहीं चाहिए, हमें हर महीने 10 हजार रुपये की कमाई चाहिए। सरकार हमें रोजगार दे दे, हम खुद कमा लेंगे।” उन्होंने बिहार की कमजोर व्यवस्था और पलायन की मजबूरी पर भी गहरी चिंता जाहिर की है। खेसारी ने युवाओं की बात को चुनावी बहस के केंद्र में ला खड़ा किया है।
पत्नी चंदा देवी की सियासी एंट्री?
खेसारी लाल यादव की पत्नी चंदा देवी को लेकर भी राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज है। माना जा रहा है कि उन्हें राजद की ओर से सारण जिले की मांझी विधानसभा सीट से टिकट मिल सकता है। अगर ऐसा होता है, तो यह भोजपुरी सिनेमा की राजनीति में एक बड़ा कदम होगा, जहां स्टारडम का सीधा टकराव मैदान में दिखेगा।
पवन सिंह और निजी विवाद का सियासी असर
चुनाव से ठीक पहले पवन सिंह और उनकी पत्नी ज्योति सिंह का पारिवारिक विवाद भी सुर्खियों में आ गया है। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो और बयानबाजी के चलते यह मामला अब राजनीतिक बहस का मुद्दा बन चुका है। कुछ विश्लेषक इसे एक सियासी चाल भी मान रहे हैं, ताकि पवन सिंह की छवि को नुकसान पहुंचाया जा सके।
खेसारी ने लिया ज्योति सिंह का पक्ष
इस पूरे विवाद में खेसारी लाल यादव ने पवन सिंह की पत्नी ज्योति सिंह का खुलकर समर्थन किया है। उन्होंने कहा, “अगर ज्योति जी को टिकट मिलता है, तो हम उनका साथ देंगे।” उनके इस बयान से साफ है कि वे पवन सिंह के हर मोर्चे पर विरोध में खड़े हैं – चाहे वह राजनीतिक हो या व्यक्तिगत।बिहार चुनाव 2025 में पवन सिंह बनाम खेसारी लाल यादव की टक्कर सिर्फ सियासी नहीं, बल्कि एक स्टारडम की जंग बन चुकी है। जहां एक तरफ एनडीए को पवन सिंह की लोकप्रियता का सहारा है, वहीं खेसारी लाल यादव जन मुद्दों, खासकर बेरोजगारी को लेकर जनता के दिलों को छूने की कोशिश कर रहे हैं। यह टकराव पूर्वांचल और बिहार के लाखों भोजपुरी दर्शकों और वोटरों को दो हिस्सों में बांट सकता है।











