Bihar Elections 2025: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 को लेकर बिहार से दिल्ली तक राजनीतिक हलचल तेज है। चुनाव आयोग ने बिहार में चुनाव की तारीखें घोषित कर दी हैं, लेकिन एनडीए और महागठबंधन दोनों ही गठबंधनों में सीट शेयरिंग को लेकर अभी तक कोई अंतिम फैसला नहीं हो पाया है। शनिवार को दिल्ली में कई अहम बैठकें हुईं, जिनमें एनडीए की कोर कमेटी की भी बैठक शाम को संपन्न हुई। सूत्रों की मानें तो इस बैठक के बाद भी HAM प्रमुख और एनडीए के सहयोगी जीतनराम मांझी की नाराजगी कम नहीं हुई है।

जीतनराम मांझी की नाराजगी जारी
बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा से हुई बातचीत के बावजूद जीतनराम मांझी की नाराजगी बनी हुई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सीट बंटवारे के फार्मूले को लेकर मांझी के लिए संतोषजनक हल नहीं निकला है। इससे पहले मांझी ने अपनी पार्टी के सभी नेताओं से बातचीत कर उनके विचार जानने की कोशिश की है। HAM प्रमुख की नाराजगी एनडीए में तनातनी बढ़ाने का कारण बन सकती है, जो चुनावी रणभूमि पर गठबंधन को कमजोर कर सकती है।

क्या हो सकता है मांझी का बड़ा कदम?
सूत्रों की मानें तो मांझी बिहार में 15 से 20 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारने की तैयारी कर सकते हैं, यदि सीट शेयरिंग को लेकर उनकी मांगें पूरी नहीं होती हैं। HAM के राष्ट्रीय महासचिव राजेश पांडेय ने भी स्पष्ट किया है कि उन्होंने भाजपा नेतृत्व के सामने अपनी बात रखी है और उनके पास सभी विकल्प खुले हैं। यह संकेत देता है कि मांझी अपनी ताकत दिखाने के लिए कोई बड़ा राजनीतिक कदम उठा सकते हैं।
एनडीए में सीट शेयरिंग पर क्या है स्थिति?
दूसरी ओर बिहार भाजपा अध्यक्ष दिलीप जायसवाल का कहना है कि एनडीए गठबंधन में सब कुछ ठीक है और सीट बंटवारे का ऐलान जल्द ही किया जाएगा। भाजपा के वरिष्ठ नेता राम कृपाल यादव ने भी कहा कि ‘पूरा एनडीए परिवार एक है और छोटी-मोटी समस्याओं का समाधान निकाला जा रहा है। वे उम्मीद करते हैं कि आने वाले एक-दो दिनों में सबकुछ स्पष्ट हो जाएगा और एनडीए एकजुट होकर चुनाव मैदान में उतरेगा।’
राजनीतिक माहौल और चुनौतियां
बिहार चुनाव 2025 में सीट शेयरिंग को लेकर चल रही इस तनातनी से साफ है कि गठबंधन के अंदर सहमति बनाना अभी चुनौतीपूर्ण है। जीतनराम मांझी की नाराजगी अगर बनी रहती है तो यह एनडीए की चुनावी रणनीति पर असर डाल सकती है। दूसरी ओर महागठबंधन भी सीट बंटवारे में अभी तक अंतिम निर्णय नहीं कर पाया है, जिससे बिहार की चुनावी तस्वीर और भी पेचीदा होती जा रही है।
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में सीट बंटवारे को लेकर चल रही यह रस्साकशी राजनीतिक पार्टियों के लिए बड़ी परीक्षा साबित हो सकती है। जीतनराम मांझी की नाराजगी और उनकी संभावित नीतिगत चाल एनडीए के लिए चुनौती होगी। वहीं गठबंधन की एकजुटता से ही बिहार में चुनावी जीत सुनिश्चित हो सकेगी। आने वाले कुछ दिनों में सीट शेयरिंग का ऐलान होने की संभावना है, जो बिहार के राजनीतिक परिदृश्य को नया रंग दे सकता है।
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