Narak Chaturdashi 2025: दीपावली से एक दिन पहले मनाया जाने वाला नरक चतुर्दशी का पर्व सनातन धर्म में विशेष स्थान रखता है। यह पर्व कार्तिक कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को आता है और इस बार नरक चतुर्दशी 18 अक्टूबर 2025 (शनिवार) को मनाई जाएगी। इसे छोटी दिवाली, रूप चौदस और काली चौदस के नाम से भी जाना जाता है।

यह पर्व अंधकार पर प्रकाश की विजय, नरक से मुक्ति, और मृत्यु के भय से छुटकारा दिलाने वाला माना जाता है। इस दिन मृत्यु के देवता यमराज की पूजा का विशेष महत्व है।

क्यों होती है यमराज की पूजा?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नरक चतुर्दशी के दिन यमराज की पूजा करने से व्यक्ति को मृत्यु का भय नहीं सताता, और अकाल मृत्यु से मुक्ति मिलती है। साथ ही, यह पूजा जीवन में दीर्घायु, मानसिक शांति और समृद्धि प्रदान करती है।
गरुड़ पुराण और अन्य शास्त्रों में उल्लेख है कि इस दिन यमराज का ध्यान करने से पाप नष्ट होते हैं और जीवन में सुख-शांति बनी रहती है।
नरक चतुर्दशी और आध्यात्मिक महत्व
नरक चतुर्दशी केवल यमराज की पूजा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पर्व जीवन-मृत्यु के रहस्यों को समझने, धर्म और सत्य के मार्ग पर चलने, तथा कर्मों की शुद्धि का प्रतीक भी है। यह दिन अंतर्मन की सफाई और आध्यात्मिक जागरण का अवसर माना जाता है।
कैसे करें यमराज की पूजा?
नरक चतुर्दशी पर दीपदान की विशेष परंपरा होती है, जो यमराज को समर्पित मानी जाती है। इस दिन शाम के समय निम्न विधि से पूजा की जाती है:
गेहूं के आटे से दीपक बनाएं।
दीपक में चार बत्तियां लगाएं और सरसों का तेल भरें।
दीपक को घर के मुख्य द्वार पर दक्षिण दिशा की ओर रखें।
दीपक के चारों ओर गंगाजल छिड़कें और नीचे थोड़ा अनाज (जैसे चावल या गेहूं) रखें।
दीपक जलाते समय यमराज का ध्यान करें और प्रार्थना करें:
“मृत्यु भय से रक्षा करें, आयु, आरोग्य और समृद्धि प्रदान करें।”
नरक चतुर्दशी का सांस्कृतिक संदेश
इस दिन तड़के उबटन और स्नान करने से रूप-सौंदर्य में वृद्धि होती है, इसलिए इसे रूप चौदस भी कहा जाता है।
मान्यता है कि भगवान श्रीकृष्ण ने नरकासुर का वध इसी दिन किया था और 16,000 कन्याओं को मुक्त कर उन्हें सम्मान प्रदान किया था।
अतः यह दिन न्याय, धर्म, साहस और विजय का प्रतीक भी है।
नरक चतुर्दशी 2025 न केवल दीपावली की शुरुआत का प्रतीक है, बल्कि यह पर्व धार्मिक चेतना, आध्यात्मिक शुद्धि और यमराज की कृपा प्राप्त करने का अवसर भी है। इस दिन किया गया दीपदान, स्नान, और पूजा घर में सकारात्मक ऊर्जा लाने के साथ-साथ परिवार की सुरक्षा और दीर्घायु सुनिश्चित करता है।
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