Blue Star Criticism: पूर्व केंद्रीय मंत्री पी. चिदंबरम ने ऑपरेशन ब्लू स्टार को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि जून 1984 में अमृतसर के स्वर्ण मंदिर से उग्रवादियों को निकालने के लिए चलाया गया ऑपरेशन ब्लू स्टार ‘गलत तरीका’ था। उन्होंने यह भी कहा कि तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने इस गलती की कीमत अपनी जान देकर चुकाई। हालांकि, चिदंबरम ने स्पष्ट किया कि यह फैसला केवल इंदिरा गांधी का अकेला नहीं था, बल्कि यह निर्णय कई कारकों के चलते लिया गया था।

राहुल गांधी के बाद चिदंबरम का बयान
यह बयान ऑपरेशन ब्लू स्टार पर बीते छह महीनों में दूसरा बड़ा राजनीतिक बयान है। इससे पहले कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भी 4 मई को एक वीडियो जारी किया था, जिसमें उन्होंने कहा था कि 1984 का ऑपरेशन ब्लू स्टार एक गलती थी। राहुल गांधी ने उस दौर की कांग्रेस पार्टी की गलतियों की जिम्मेदारी लेने को भी तैयार रहने का ऐलान किया था।

खुशवंत सिंह लिटरेचर फेस्टिवल में चिदंबरम ने जताई अपनी राय
पी. चिदंबरम यह बयान हिमाचल प्रदेश के कसौली में आयोजित ‘खुशवंत सिंह लिटरेचर फेस्टिवल’ में पत्रकार हरिंदर बावेजा की किताब ‘They Will Shoot You, Madam’ की चर्चा के दौरान दिया। बावेजा ने कहा था कि इंदिरा गांधी ने ऑपरेशन ब्लू स्टार के फैसले की कीमत अपनी जान देकर चुकाई, जिस पर चिदंबरम ने कहा कि बिना किसी सैन्य अधिकारी का अपमान किए, यह कहा जा सकता है कि स्वर्ण मंदिर को वापस लेने का यह तरीका गलत था।
चिदंबरम ने आगे कहा, “कुछ साल बाद हमने बिना सेना के सही तरीका अपनाकर स्वर्ण मंदिर को वापस पाया। ऑपरेशन ब्लू स्टार एक गलत तरीका था, और श्रीमती गांधी ने इस गलती की कीमत अपनी जान देकर चुकाई।”
पंजाब की असली समस्या: आर्थिक स्थिति
चिदंबरम ने पंजाब की वर्तमान समस्याओं पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि उनके पंजाब दौरों के दौरान उन्हें महसूस हुआ कि खालिस्तान या अलगाव की राजनीतिक मांग अब लगभग खत्म हो चुकी है। आज की मुख्य समस्या आर्थिक है। उन्होंने यह भी कहा कि अवैध प्रवासियों में सबसे अधिक संख्या पंजाब की है।
ऑपरेशन ब्लू स्टार की पृष्ठभूमि
जर्नैल सिंह भिंडरावाले सिखों के कट्टर धार्मिक समूह दमदमी टकसाल के प्रमुख थे। 1980 के दशक की शुरुआत में विभिन्न हिंसक घटनाओं के बाद भिंडरावाले ने अमृतसर के स्वर्ण मंदिर को अपना ठिकाना बना लिया था। मंदिर परिसर में उनकी उपस्थिति और कट्टरपंथी गतिविधियों के कारण स्थिति बिगड़ी।
1983 में पंजाब विधानसभा भंग कर राष्ट्रपति शासन लगाया गया। दिसंबर 1983 में भिंडरावाले अकाल तख्त में दाखिल हुए। स्थिति नियंत्रण से बाहर होने पर 1984 में सेना ने ‘ऑपरेशन ब्लू स्टार’ चलाया।
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक इस ऑपरेशन में करीब 300 से 400 लोग मारे गए जबकि 90 सैनिक शहीद हुए। लेकिन कई अन्य रिपोर्टों के अनुसार मृतकों की संख्या हजार के करीब थी और शहीद जवान भी अधिक थे।पूर्व मंत्री पी. चिदंबरम का कहना है कि ऑपरेशन ब्लू स्टार गलत रणनीति थी, जिसके परिणामस्वरूप तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने अपनी जान गंवाई। इस घटना ने पंजाब और देश की राजनीति पर गहरा प्रभाव डाला। वर्तमान में पंजाब की सबसे बड़ी चुनौती आर्थिक समस्याएं हैं, न कि राजनीतिक अलगाववाद।











