John Campbell Century : दिल्ली टेस्ट में वेस्टइंडीज के सलामी बल्लेबाज जॉन कैंपबेल (John Campbell) ने अपने टेस्ट करियर का पहला शतक जड़ते हुए इतिहास रच दिया। भारत के खिलाफ खेली जा रही टेस्ट सीरीज के दूसरे मुकाबले की दूसरी पारी में उन्होंने 173 गेंदों में यह उपलब्धि हासिल की, जिसमें 9 चौके और 3 छक्के शामिल रहे। खास बात यह रही कि उन्होंने अपना शतक एक शानदार छक्का लगाकर पूरा किया, जिससे वेस्टइंडीज को मुकाबले में मजबूती मिली।

पहली पारी की नाकामी, दूसरी पारी में चमके
पहली पारी में महज 10 रन बनाकर आउट हुए जॉन कैंपबेल ने दूसरी पारी में जिम्मेदारी से बल्लेबाजी की। शुरू में सतर्क रहने के बाद उन्होंने धीरे-धीरे अपने स्ट्रोक्स लगाए और पारी को संभालते हुए विपक्षी गेंदबाजों पर दबाव बनाना शुरू किया। उनकी इस शतकीय पारी की बदौलत वेस्टइंडीज एक समय पर मुकाबले से बाहर होता दिख रहा था, लेकिन अब एक बार फिर मैच रोमांचक हो गया है।

6 साल, 25 टेस्ट, 50 पारियां – लंबा इंतजार खत्म
जॉन कैंपबेल के लिए यह शतक सिर्फ आंकड़ों का खेल नहीं, बल्कि सालों की मेहनत और धैर्य का फल है। उन्होंने अपना टेस्ट डेब्यू 2019 में इंग्लैंड के खिलाफ किया था और अब 2025 में जाकर उन्होंने पहली बार शतक जड़ा है। यह शतक उनकी 50वीं टेस्ट पारी में आया।
इससे पहले कैंपबेल तीन बार अर्धशतक जरूर बना चुके थे, लेकिन कभी उसे तीन अंकों में नहीं बदल सके थे। उनका टेस्ट करियर का सर्वश्रेष्ठ स्कोर 68 रन था, जो उन्होंने 2020 में बनाया था। लेकिन दिल्ली की पिच पर इस बार उन्होंने कोई चूक नहीं की और यादगार पारी खेली।
भारतीय धरती पर दूसरी पारी में आया पहला शतक
दिलचस्प बात यह है कि कैंपबेल ने भारतीय सरज़मीं पर इससे पहले केवल एक टेस्ट खेला था, जब 2019 में उन्होंने अफगानिस्तान के खिलाफ लखनऊ में मैच खेला था। उस मैच में उनका स्कोर केवल 55 रन था। लेकिन इस बार दिल्ली के फिरोजशाह कोटला मैदान पर उन्होंने न केवल अपने आंकड़े सुधारे, बल्कि टीम के लिए अहम योगदान भी दिया।
वेस्टइंडीज के लिए क्यों है यह शतक खास?
जहां भारत की गेंदबाजी हमेशा मजबूत मानी जाती है, वहीं वेस्टइंडीज के लिए भारतीय उपमहाद्वीप की पिचों पर रन बनाना चुनौतीपूर्ण रहा है। ऐसे में कैंपबेल की यह पारी न केवल उनके करियर की सबसे बड़ी पारी है, बल्कि वेस्टइंडीज के लिए मनोबल बढ़ाने वाली भी है।
यह शतक ऐसे समय आया, जब टीम को एक लंबी साझेदारी और स्थिरता की सख्त जरूरत थी। उनकी यह पारी आने वाले बल्लेबाजों को आत्मविश्वास दे सकती है।जॉन कैंपबेल का यह शतक न सिर्फ उनके करियर की बड़ी उपलब्धि है, बल्कि यह वेस्टइंडीज टीम के लिए भी राहत की सांस है। उन्होंने दिखाया कि धैर्य और मेहनत के दम पर कोई भी खिलाड़ी अपने करियर को नई दिशा दे सकता है। अब देखना होगा कि इस शतक के दम पर वेस्टइंडीज भारत को कितनी चुनौती दे पाता है।
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