Tara Forest : रायपुर में कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव और छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने हसदेव अरण्य क्षेत्र में तारा कोल ब्लॉक की नीलामी को लेकर केंद्र और राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि हसदेव अरण्य और बांगो बांध इस क्षेत्र के लिए जीवनदायिनी हैं। उनके मुताबिक, यहां बड़े पैमाने पर खनन होने से जंगल, जलस्रोत और आदिवासी समुदाय की आजीविका पर गंभीर असर पड़ सकता है।
साय सरकार पर केंद्र को पत्र लिखने का आरोप
भूपेश बघेल ने दावा किया कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व वाली सरकार ने 11 दिसंबर 2025 को तारा कोल ब्लॉक की नीलामी के लिए केंद्रीय कोयला मंत्रालय को पत्र लिखा था। उन्होंने सवाल उठाया कि जब कांग्रेस सरकार ने हसदेव अरण्य में नए कोल ब्लॉक की नीलामी रोकने की मांग की थी, तो भाजपा सरकार ने तारा ब्लॉक की नीलामी की सिफारिश क्यों की।
कांग्रेस सरकार के पुराने फैसलों का दिया हवाला
बघेल ने कहा कि 23 जून 2023 को तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने तारा समेत नौ कोल ब्लॉकों को नीलामी से बाहर रखने के लिए पत्र लिखा था। इसके अलावा 26 जुलाई 2022 को छत्तीसगढ़ विधानसभा ने सर्वसम्मति से हसदेव अरण्य में नए कोल ब्लॉक के आवंटन और नीलामी पर रोक की मांग की थी। उन्होंने कहा कि 16 जुलाई 2023 को सुप्रीम कोर्ट में भी हलफनामा दाखिल कर नई खदानों की जरूरत नहीं होने की बात कही गई थी।
जंगल और हाथियों के आवास पर चिंता
पूर्व मुख्यमंत्री के मुताबिक तारा कोल ब्लॉक करीब 5,000 एकड़ क्षेत्र में फैला है, जिसमें 4,000 एकड़ से ज्यादा हिस्सा घने जंगल का है। उन्होंने दावा किया कि खनन के लिए बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई करनी पड़ेगी। बघेल ने कहा कि इससे लेमरू एलीफेंट रिजर्व के आसपास का पारिस्थितिकी तंत्र प्रभावित होगा और हाथियों के आवागमन के रास्तों पर भी गंभीर असर पड़ सकता है।
अडानी समूह से जुड़ी कंपनी को ब्लॉक मिलने का दावा
भूपेश बघेल ने कहा कि केंद्र सरकार की नीलामी प्रक्रिया में तारा कोल ब्लॉक CG Syn-Gas and Chemicals Limited को मिला है। उन्होंने दावा किया कि यह कंपनी अडानी एंटरप्राइजेज से जुड़ी मूंदड़ा सिनर्जी लिमिटेड की सहायक कंपनी है। बघेल ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार बनने के बाद छत्तीसगढ़ के जल, जंगल और जमीन से जुड़े संसाधनों को निजी हितों के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है।
PSC परीक्षाओं में गड़बड़ी का आरोप
भूपेश बघेल ने छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग यानी PSC की 2024 और 2025 की परीक्षाओं को लेकर भी सरकार पर सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि 2024 की परीक्षा की उत्तर पुस्तिकाओं में मूल्यांकन से जुड़ी गंभीर विसंगतियां सामने आई हैं। उनके अनुसार कुछ मामलों में सही और गलत उत्तरों के लिए समान अंक दिए गए, जबकि कहीं गलत उत्तर को अधिक और सही उत्तर को कम अंक मिलने की शिकायत सामने आई है।
2025 PSC परिणाम पर भी उठाए सवाल
बघेल ने कहा कि 2025 की PSC परीक्षा में 265 पदों के लिए भर्ती प्रक्रिया हुई। नियम के अनुसार मुख्य परीक्षा में पदों की संख्या के तीन गुना यानी 795 अभ्यर्थियों को इंटरव्यू के लिए बुलाए जाने की बात थी, लेकिन 608 अभ्यर्थी ही चयनित हुए। उन्होंने आयोग से मांग की कि वह स्पष्ट करे कि बाकी 187 अभ्यर्थी न्यूनतम अंक हासिल क्यों नहीं कर पाए।
उत्तर पुस्तिकाएं सार्वजनिक करने की मांग
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि जब तक शिकायतों का समाधान नहीं होता, तब तक इंटरव्यू प्रक्रिया स्थगित की जानी चाहिए। उन्होंने सभी अभ्यर्थियों की उत्तर पुस्तिकाएं इंटरव्यू से पहले उपलब्ध कराने की मांग की। साथ ही उन्होंने कहा कि इंटरव्यू के लिए चयनित नहीं हुए अभ्यर्थियों को भी उनकी कॉपियां निःशुल्क दी जानी चाहिए, ताकि मूल्यांकन की निष्पक्षता स्पष्ट हो सके।
मूल्यांकन प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग
बघेल ने PSC मुख्य परीक्षा के लिए मॉडल उत्तर जारी करने और उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन करने वाले परीक्षकों के चयन के लिए स्पष्ट मानदंड तय करने की मांग की। उन्होंने कहा कि भर्ती परीक्षाओं की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए पूरी प्रक्रिया पारदर्शी होना जरूरी है। उन्होंने सरकार से युवाओं की शिकायतों का निष्पक्ष समाधान करने की अपील की।
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