Russia Ukraine War: रूस-यूक्रेन युद्ध ने एक बार फिर भयावह मोड़ ले लिया है। यूक्रेन के दूसरे सबसे बड़े शहर खार्किव पर रूस ने रातभर ग्लाइडेड बम और ड्रोन से हमला किया, जिसमें एक अस्पताल को निशाना बनाया गया और सात लोग घायल हो गए। इस हमले में 50 मरीजों को अस्पताल से बाहर निकालना पड़ा। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की ने इसे एक सुनियोजित हमला बताते हुए दुनिया से एयर डिफेंस सिस्टम और हथियारों की और मदद मांगी है।

रूस के निशाने पर ऊर्जा सुविधाएं
जेलेंस्की ने टेलीग्राम पर जानकारी दी कि रूस रोजाना यूक्रेन के पावर प्लांट्स, बिजली लाइनों और प्राकृतिक गैस केंद्रों पर हमले कर रहा है। इन हमलों का मकसद देश की ऊर्जा आपूर्ति को पूरी तरह ठप करना है।

सर्दी का मौसम शुरू होते ही यूक्रेन की जनता हीटर, गर्म पानी और बिजली के बिना कठिन हालात में जीने को मजबूर है। विशेषज्ञों के अनुसार, रूस इन हमलों के जरिए सर्दी में यूक्रेन की नागरिक सुविधाओं को पंगु करने की रणनीति पर काम कर रहा है।
अमेरिका से फिर मांगी सैन्य मदद
राष्ट्रपति जेलेंस्की जल्द ही वाशिंगटन पहुंचने वाले हैं, जहां उनकी पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात तय है। इस मीटिंग का मकसद यूक्रेन के लिए एडवांस्ड हथियारों और एयर डिफेंस सिस्टम की मांग को दोहराना है।
जेलेंस्की ने कहा, “हम अमेरिका, यूरोप, G-7 देशों और अन्य साझेदारों से अपील करते हैं कि वे हमें ऐसे सिस्टम दें जो हमारे नागरिकों को सुरक्षा दे सकें। हमारा देश टेक्सास जितना बड़ा है, हर हिस्से की हवाई सुरक्षा संभव नहीं। हमें सहयोग चाहिए।”
ट्रंप से मीटिंग में क्या होगा एजेंडा?
ट्रंप और जेलेंस्की की मुलाकात में यूक्रेन को टॉमहॉक क्रूज मिसाइलों की आपूर्ति पर चर्चा हो सकती है। यह वही मिसाइलें हैं, जिनके इस्तेमाल को अमेरिका ने पहले खारिज कर दिया था, युद्ध के और फैलने के डर से। लेकिन अब बदले हालात में अमेरिका इस पर दोबारा विचार कर रहा है।
ट्रंप ने पहले ही रूस को संकेत दे दिया है कि अगर हमले नहीं रुके, तो अमेरिका कड़े कदम उठाएगा। यदि टॉमहॉक मिसाइलों की आपूर्ति होती है, तो यह अमेरिका-रूस के बीच टकराव को और बढ़ा सकता है।रूस-यूक्रेन युद्ध अब केवल दो देशों की लड़ाई नहीं रह गई, बल्कि यह वैश्विक सुरक्षा का मामला बन चुका है। यूक्रेन लगातार हमलों से जूझ रहा है, और जेलेंस्की की अपील अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए एक बड़ा सवाल खड़ा करती है – क्या दुनिया इस संघर्ष को खत्म करने की दिशा में निर्णायक कदम उठाएगी?
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